
CEC Gyanesh Kumar: 'थोड़ा दिल चाहिए… थोड़ा जिगर भी चाहिए।' मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने जैसे ही दिल्ली में आयोजित पहले अखिल भारतीय मीडिया सम्मेलन 2026 में यह वाक्य कहा, सभागार में मौजूद पत्रकारों की निगाहें उन्हीं पर टिक गईं। यह कोई भावुक टिप्पणी भर नहीं थी, बल्कि चुनाव आयोग के सामने खड़ी रोजमर्रा की चुनौतियों और पिछले एक साल में हुए चुनाव सुधारों का निचोड़ थी। उन्होंने साफ कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में चुनाव कराना केवल एक प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर दिन कई मोर्चों पर लड़ी जाने वाली लड़ाई है।
'चुनावों में मीडिया की भूमिका' विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में देशभर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 380 से अधिक मीडिया प्रतिनिधियों ने शिरकत की। यह भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) का इस तरह का पहला राष्ट्रीय स्तर का आयोजन था, जिसका मकसद चुनावी प्रक्रिया, उसकी पारदर्शिता और उसमें मीडिया की भूमिका को लेकर पत्रकारों के बीच बेहतर समझ बनाना बताया गया। कार्यक्रम की शुरुआत संविधान, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम-1950 व 1951 और आयोग द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों के तहत चुनाव प्रक्रिया की समझ के साथ हुई। सम्मेलन में मौजूद पत्रकारों को मतदाता सूची तैयार होने, मतदान और मतगणना जैसी प्रक्रियाओं का लाइव प्रदर्शन भी दिखाया गया, ताकि वे इन प्रक्रियाओं में इस्तेमाल होने वाले सांविधिक फॉर्म और तरीकों को करीब से समझ सकें। कार्यक्रम का समापन पत्रकारों और सीईसी के बीच सवाल-जवाब सत्र से हुआ।
अपने संबोधन में ज्ञानेश कुमार ने कहा कि भारत में चुनाव संविधान, जनप्रतिनिधित्व कानून और निर्वाचन आयोग के समय-समय पर जारी निर्देशों के अनुरूप कराए जाते हैं। पूरी चुनावी प्रक्रिया समानांतर निगरानी और ऑडिट से गुजरती है, इसलिए इसकी पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल उठाने की गुंजाइश नहीं बचती। उन्होंने आयोग की भूमिका को केवल चुनाव कराने तक सीमित मानने से इनकार करते हुए कहा, 'हम पर व्यक्तिगत हमले होते हैं, संस्थागत हमले होते हैं और साइबर अटैक भी होते हैं… आंधी आए या तूफान… हम संविधान के दायरे में रहकर अपना काम करते रहते हैं।' संबोधन के बाद चर्चा के दौरान सीईसी का संदेश स्पष्ट था कि चुनाव आयोग आलोचनाओं, कानूनी चुनौतियों और तमाम तरह के हमलों के बीच भी संविधान के प्रति अपनी जवाबदेही निभाते हुए निष्पक्ष और विश्वसनीय चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
सीईसी ने आयोग के सामने आने वाली कानूनी चुनौतियों के आंकड़े भी साझा किए। उन्होंने बताया कि बीते एक वर्ष में आयोग को 786 कानूनी मामलों का सामना करना पड़ा, जिसमें से 785 मामलों में अदालतों ने आयोग के पक्ष में फैसला सुनाया। उन्होंने इसे भी एक तरह की 'लीगल बैटल' करार दिया, जिसे आयोग हर दिन अदालतों में लड़ता है।
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) का जिक्र करते हुए सीईसी ने कहा कि इसका मकसद सिर्फ मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना है। इस प्रक्रिया के तहत मृत, स्थानांतरित, दोहरे या अयोग्य मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि लगभग 95 करोड़ मतदाताओं वाली भारत की मतदाता सूची एक 'जीवंत दस्तावेज' है, जो लगातार अद्यतन होती रहती है, और इसे तैयार करने में 12 लाख से अधिक बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) और 15 लाख से अधिक बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) समानांतर ऑडिटर के तौर पर काम करते हैं। हाल की विधानसभा चुनावों में हुए रिकॉर्ड मतदान को उन्होंने भारतीय मतदाताओं के चुनावी तंत्र पर भरोसे और लोकतंत्र की जीवंतता का प्रमाण बताया, साथ ही एसआईआर प्रक्रिया में भाग लेने के लिए देशभर के मतदाताओं का आभार भी जताया।
गौरतलब है कि एसआईआर को लेकर विपक्षी दल, खासकर कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, लगातार सवाल उठाते रहे हैं। बेंगलुरु की महादेवपुरा सीट को लेकर 'वोट चोरी' के आरोपों के बाद सीईसी ने अगस्त में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में विपक्ष को सात दिन के भीतर हलफनामे के साथ शिकायत दर्ज कराने की चुनौती भी दी थी। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी एसआईआर कराने के आयोग के अधिकार को बरकरार रखा है। इसी विवाद की पृष्ठभूमि में मीडिया सम्मेलन में सीईसी की टिप्पणियां और आंकड़े अहम माने जा रहे हैं।
ज्ञानेश कुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल ऑनलाइन मतदान शुरू करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है, क्योंकि संविधान में इसकी व्यवस्था नहीं है। वहीं मतदान कक्ष में सीसीटीवी लगाने की मांग पर उन्होंने कहा कि ऐसा करने से गुप्त मतदान की संवैधानिक व्यवस्था प्रभावित होगी, इसलिए यह संभव नहीं है।
मीडिया की तीखी आलोचना पर सीईसी ने तंज कसते हुए कहा कि जैसे सूरज हमेशा पूरब से ही उगता है, वैसे ही आयोग हमेशा संविधान के दायरे में रहकर ही काम करता है। उन्होंने एक किस्सा सुनाते हुए बताया कि एक बार जब मीडिया में सूरज को दक्षिण से उगता दिखाया गया, तो उन्होंने संबंधित पत्रकारों को बुलाकर बिंदुवार स्पष्टीकरण दिया, जिसके बाद कुछ दिन सब ठीक चला। लेकिन फिर अचानक एक दिन सूरज उत्तर से उगता दिखा दिया गया — इस बार कोई और लोग थे, जिन्हें फिर बुलाकर समझाया गया कि सूरज पूरब से ही उगता है। कुछ दिन बाद सूरज पश्चिम से उगता दिखाया गया। इस पर सीईसी ने कहा कि बार-बार यही बात दोहराने से बेहतर यही समझा गया कि सूरज को अपना काम करने दिया जाए।
केरल कैडर के 1988 बैच के आईएएस अधिकारी ज्ञानेश कुमार बीते वर्ष यानी फरवरी 2025 में देश के 26वें मुख्य निर्वाचन आयुक्त बने थे। नए कानून सीईसी और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और पदावधि) अधिनियम, 2023 के तहत नियुक्त होने वाले वे पहले सीईसी हैं। उनका कार्यकाल 26 जनवरी 2029 तक है। इससे पहले वे केंद्रीय गृह मंत्रालय में जम्मू-कश्मीर से जुड़े कश्मीर डिवीजन में संयुक्त सचिव रह चुके हैं और अनुच्छेद 370 हटाए जाने की प्रक्रिया की तैयारियों में अहम भूमिका निभाई थी। उनकी नियुक्ति उस तीन-सदस्यीय चयन समिति ने की थी, जिसमें प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी शामिल थे। राहुल गांधी ने उस समय भी नियुक्ति प्रक्रिया पर असहमति नोट दर्ज कराया था। उनके कार्यकाल में बिहार सहित कई राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया पूरी कराई जा चुकी है, जिसे लेकर आयोग लगातार अपनी पारदर्शिता का दावा करता रहा है, वहीं विपक्षी दल इस पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं।
ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल शुरू से ही विवादों और सवालों के घेरे में रहा है, और हर बार उन्होंने या आयोग ने पलटवार करते हुए अपनी बात रखी है। तमाम विवादों की पृष्ठभूमि में मीडिया सम्मेलन में सीईसी की टिप्पणियां 786 कोर्ट केस में 785 में जीत के आंकड़े से लेकर 'सूरज पूरब से ही उगता है' वाले तंज तक आयोग के इसी रुख की अगली कड़ी मानी जा रही हैं कि वह आलोचनाओं और आरोपों के बावजूद अपनी कार्यप्रणाली पर कायम है।
अगस्त 2025 में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कर्नाटक की महादेवपुरा और महाराष्ट्र की राजुरा विधानसभा सीटों का हवाला देते हुए 2024 के लोकसभा चुनाव में बड़े पैमाने पर 'वोट चोरी' का आरोप लगाया था। बाद में उन्होंने हरियाणा में भी करीब 25 लाख वोटों में गड़बड़ी का दावा किया। इस पर सीईसी ज्ञानेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर पलटवार करते हुए कहा कि यदि किसी को शिकायत दर्ज करानी है तो उसे किसी क्षेत्र विशेष का मतदाता होकर, या गवाह के तौर पर हलफनामे के साथ सात दिन के भीतर आना होगा, वरना दावों को आधारहीन माना जाएगा। आयोग ने बाद में एक औपचारिक बयान जारी कर राहुल गांधी के सभी आरोपों को 'निराधार और तथ्यात्मक रूप से गलत' करार दिया और यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी वोट को ऑनलाइन तरीके से डिलीट नहीं किया जा सकता।
बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के दौरान विपक्ष ने आरोप लगाया कि इसकी आड़ में वोट चोरी की साजिश रची जा रही है। सीईसी ने इसके जवाब में कहा था कि कुछ राजनीतिक दल आयोग के कंधे पर बंदूक रखकर मतदाताओं को निशाना बनाकर राजनीति कर रहे हैं। हाल के मीडिया सम्मेलन में भी उन्होंने बीएलओ-बीएलए की भूमिका और सुप्रीम कोर्ट के एसआइआर को वैध ठहराने वाले फैसले का हवाला देकर इसी सफाई को दोहराया।
राहुल गांधी के आरोपों पर सीईसी के आक्रामक रवैये को लेकर पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने कहा था कि गुस्से में जवाब देने के बजाय आयोग को तुरंत जांच के आदेश देने चाहिए थे, क्योंकि यह सिर्फ एक व्यक्ति की राय नहीं बल्कि कई लोगों की चिंता का मामला था। पूर्व सीईसी ओपी रावत ने भी कहा था कि आयोग का काम सवाल पूछना नहीं, शंका दूर करना होता है।
आम आदमी पार्टी ने ज्ञानेश कुमार और उनके पूर्ववर्ती राजीव कुमार पर दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले करीब 42,000 नामों को सूची से हटाए जाने की शिकायतों पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया था। आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री आतिशी को 7 अनुबंधों सहित 76 पन्नों का विस्तृत जवाब पहले ही भेजा जा चुका था।