Congress Mukt Bharat: क्या 'कांग्रेस मुक्त भारत' का सपना सिर्फ एक अधूरा ख्वाब बनकर रह गया है? 13 साल के लंबे इंतजार और भारी उतार-चढ़ाव के बाद भी BJP पुरानी पार्टी का नामोनिशान नहीं मिटा सकी, बल्कि अब कांग्रेस ने पलटवार शुरू कर दिया है।
Congress Mukt Bharat: साल 2013 में जब नरेंद्र मोदी ने गोवा की कार्यकारिणी बैठक में 'कांग्रेस मुक्त भारत' का नारा दिया था, तब देश के 14 राज्यों में कांग्रेस का राज था। इसके बाद मोदी लहर आई और कांग्रेस महज 44 सीटों पर सिमट गई। लगा कि अब सब खत्म हो गया, लेकिन साल 2024 के चुनाव नतीजों ने पूरी बाजी पलट दी। जिस कांग्रेस को खत्म माना जा रहा था, उसने अपनी सीटें लगभग दोगुनी 99 कर लीं। BJP पहली बार 272 के आंकड़े से पीछे रह गई। कांग्रेस ने साफ कह दिया कि 'कांग्रेस मुक्त' करने चले थे, खुद बैसाखियों (TDP और JDU) पर आ गए।
केरल के इस साल के नतीजों ने सबको चौंका दिया है। साल 1977 के बाद पहली बार कांग्रेस (UDF) को इतना बड़ा जनादेश मिला है। कुल 140 सीटों में से गठबंधन ने 102 सीटें जीती हैं, जिनमें अकेले कांग्रेस के खाते में 63 सीटें आईं। 50 साल में पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी भी राज्य में कम्युनिस्ट सरकार नहीं है। केसी वेणुगोपाल ने दिसंबर में ही भविष्यवाणी की थी, 'कई लाल किले ढह जाएंगे।' और हुआ भी वही, पिनाराई विजयन को इस्तीफा देना पड़ा।
BJP ने सालों तक राहुल गांधी को एक पार्ट-टाइम राजनेता के रूप में पेश किया, लेकिन 4,000 किलोमीटर लंबी 'भारत जोड़ो यात्रा' ने पूरा खेल बदल दिया। कन्याकुमारी से कश्मीर तक की पैदल यात्रा ने राहुल को जनता से सीधे जोड़ दिया। इसी का नतीजा था कि साल 2023 में तेलंगाना और कर्नाटक जैसे बड़े राज्य कांग्रेस के पक्ष में आए। साल 2013 में कांग्रेस-मुक्त भारत का आह्वान किया गया था, तब कांग्रेस देश के 14 राज्यों में सत्ता में थी। हालांकि, 2014 की हार से केवल 3 राज्यों में सत्ता में रहने तक सिमट गई। कांग्रेस को नियमित स्तर पर राज्यों में हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, पार्टी ने कुछ राज्यों में चुनाव जीतकर यह सुनिश्चित किया कि पार्टी कभी भी राज्यों से पूरी तरह से खत्म न हो जो जाए।
साल 2013 में, जब भाजपा की कमान गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपी गई थी, तब लोकसभा में कांग्रेस के पास 206 सीटें थीं। 2014 में 'मोदी लहर' पर सवार होकर, BJP ने लोकसभा में 282 सीटें जीतकर कांग्रेस को जबरदस्त झटका दिया, उसे सिर्फ 44 सीटों तक ही सीमित कर दिया। 2019 में BJP की सीटों की संख्या बढ़कर 303 हो गई, जबकि कांग्रेस सिर्फ 52 सीटों तक ही पहुंच पाई। 2024 के चुनावों में लोकसभा में कांग्रेस की सीटों की संख्या बढ़कर 99 हो गई। इसके उलट, BJP की सीटों की संख्या घटकर 240 रह गई। जो 2014 के बाद पहली बार बहुमत से कम थी। कांग्रेस ने BJP को यह याद दिलाने में जरा भी देर नहीं की कि जिस पार्टी ने भारत को 'कांग्रेस-मुक्त' बनाने का वादा किया था, वह अपने दम पर सरकार नहीं बना सकती।
कांग्रेस ने तमिलनाडु में भी चौंकाने वाला फैसला लिया। 11 साल पुराने साथी DMK का साथ छोड़कर पार्टी ने अभिनेता विजय की पार्टी TVK से हाथ मिलाया। विजय की पार्टी ने 108 सीटें जीतकर धमाका किया है और कांग्रेस ने उन्हें तुरंत समर्थन देकर सत्ता के गलियारे में अपनी जगह पक्की कर ली है।
अगले साल पंजाब और उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव हैं। पंजाब में आम आदमी पार्टी की अंदरूनी कलह और एंटी-इंकंबेंसी का फायदा उठाने के लिए कांग्रेस तैयार बैठी है। वहीं यूपी में अखिलेश यादव के साथ गठबंधन ने बीजेपी की नींद उड़ा रखी है। भले ही कांग्रेस आज भी BJP से संगठन के मामले में पीछे हो, लेकिन 'कांग्रेस मुक्त भारत' की भविष्यवाणी करने वाले अब खुद गठबंधन बचाने में जुटे हैं। देश आज भी 'कांग्रेस युक्त' है और यह हकीकत BJP के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।