
Punjab Congress Crisis: पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले कांग्रेस के अंदर कलह सामने आ गई है। पूर्व सीएम और सांसद चरणजीत सिंह चन्नी एक बार फिर नेतृत्व को लेकर चल रही खींचतान के केंद्र में हैं। हालांकि, इस बार कांग्रेस आलाकमान 2021 जैसी गलती दोहराने के मूड में नहीं दिख रहा।
बता दें कि पार्टी में कलह को समाप्त करने के लिए पिछले दिनों एक लिस्ट जारी की थी, जिसमें अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष पर बरकरार रखा गया। वहीं चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव कैंपेन कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद चन्नी खेमे ने खुलकर नाराजगी जतानी शुरू कर दी।
पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने अपने समर्थकों के साथ बैठकें कीं, जबकि सोशल मीडिया पर सारा पंजाब चन्नी दे नाल जैसे नारे भी ट्रेंड करने लगे। यह वही माहौल है, जैसा 2021 में उनके मुख्यमंत्री बनने से पहले देखने को मिला था।
पंजाब में 2021 में तत्कालीन सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह और प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के बीच लंबे समय तक चली खींचतान ने कांग्रेस को संकट में डाल दिया था। इसको लेकर पार्टी हाईकमान ने चुनाव से पहले बड़ा फैसला लिया। कैप्टन अमरिंदर सिंह की जगह चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम बनाया गया। चन्नी पंजाब के पहले दलित सीएम बने।
पार्टी ने इससे दलित वोट बैंक को साधने की कोशिश की, लेकिन यह दांव उल्टा पड़ गया। 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। पार्टी ने महज 18 सीटों पर जीत दर्ज की थी। बताया जा रहा है कि कांग्रेस का पंजाब में यह अब तक का सबसे बुरा प्रदर्शन रहा।
चरणजीत सिंह चन्नी खुद दो सीटों से हार गए थे। वहीं लोकसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया। अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के प्रदेश अध्यक्ष रहते पार्टी ने 7 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि दबाव में नेतृत्व बदलने का फैसला पार्टी के लिए नुकसानदेह साबित हुआ। इससे न तो गुटबाजी खत्म हुई और न ही संगठन मजबूत हुआ।
दरअसल, इस बार कांग्रेस हाईकमान नेतृत्व में बदलाव के पक्ष में नहीं दिख रहा है। पंजाब कांग्रेस प्रभारी और छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल लगातार कह रहे है कि प्रदेश अध्यक्ष को नहीं बदला जाएगा। यह गुड्डा-गुड्डी का खेल नहीं है।
रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस का मानना है कि अगर वह एक बार फिर दबाव में झुकी तो इससे गुटबाजी और बढ़ेगी। इसलिए पार्टी चाहती है कि चरनजीत सिंह चन्नी और राजा वॉरिंग मिलकर 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी करें।
कांग्रेस के लिए पंजाब अहम है। दरअसल, विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया था। ऐसे में यदि कांग्रेस को 2027 चुनाव में आम आदमी पार्टी को चुनौती देनी है, तो उसके लिए संगठनात्मक एकजुटता सबसे बड़ी जरूरत होगी। लेकिन लगातार जारी अंदरूनी खींचतान विपक्ष को यह कहने का मौका दे रही है कि कांग्रेस चुनाव से पहले ही बंटी हुई है।
2021 में कांग्रेस ने पार्टी के भीतर की बगावत शांत करने के लिए चरनजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया था। लेकिन इससे न तो विवाद खत्म हुआ और न ही चुनावी नुकसान टला।
अब, जब चन्नी समर्थक फिर दबाव बना रहे हैं, कांग्रेस नेतृत्व इस बार नेतृत्व परिवर्तन के बजाय संगठन को स्थिर रखने की रणनीति पर दांव लगा रहा है। पार्टी का मानना है कि आखिरी समय में चेहरा बदलने से बेहतर है कि संगठन को मजबूत किया जाए और एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरा जाए।