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नए दलों को बढ़ाकर खुद पीछे रह जाती है कांग्रेस, पहले AAP, TMC और अब TVK, कैसे खुद बना रही अपने नए प्रतिद्वंदी?

Congress Supports TVK: कांग्रेस की पुरानी रणनीति फिर चर्चा में है, जहां वह नए दलों को समर्थन देकर सत्ता में मदद करती है, लेकिन वही दल आगे चलकर उसके प्रतिद्वंदी बन जाते हैं।

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May 10, 2026
नए दलों को बढ़ाकर खुद पीछे रह जाती है कांग्रेस (AI PHOTO)

Congress Political Strategy: तमिलानाडु में रविवार को अभिनेता से राजनेता बने थलापति विजय ने राज्य के नए मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। लेकिन इस जीत के पीछे सबसे अहम भूमिका कांग्रेस की रही, जो अक्सर नए राजनीतिक चेहरों को आगे बढ़ाने में मदद करती रही है। कांग्रेस जिन नए दलों को सहारा देती है, वही आगे चलकर उसके सबसे बड़े प्रतिद्वंदी बन जाते हैं। आज फिर यह सवाल उठने लगा है कि क्या कांग्रेस खुद ही अपने नए राजनीतिक प्रतिद्वंदी तैयार कर रही है। कांग्रेस ने 2013 में दिल्ली में आम आदमी पार्टी को समर्थन दिया था, जब वह खुद सिर्फ 8 सीटों पर सिमट गई पश्चिम बंगाल में कांग्रेस ने ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के साथ मिलकर वाम मोर्चे को हराने में मदद की थी समर्थन दिया था, लेकिन कुछ ही समय बाद दोनों पार्टीयों का गठबंधन टूट गया।

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कांग्रेस समर्थन से बदला सत्ता समीकरण

कांग्रेस के पांच विधायकों के समर्थन ने समीकरण बदल दिए। इसके बाद VCK और IUML ने भी समर्थन दिया, जबकि CPI और CPI(M) ने भी कांग्रेस के साथ रुख अपनाया। कुल 120 विधायकों के समर्थन के बाद विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस शपथ ग्रहण में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की मौजूदगी भी चर्चा में रही। उन्होंने X पर लिखा, तमिलनाडु ने अपना चुनाव कर लिया है। एक नई पीढ़ी, एक नई आवाज, एक नई सोच। विजय को मेरी शुभकामनाएं वे तमिलनाडु की जनता की उम्मीदों को पूरा करें।

दिल्ली से लेकर बंगाल तक कांग्रेस का पुराना पैटर्न

कांग्रेस ने 2013 में दिल्ली में आम आदमी पार्टी को समर्थन दिया था, जब वह खुद सिर्फ 8 सीटों पर सिमट गई थी। उस समय शीला दीक्षित ने कहा था, हम दिल्ली की जनता के फैसले का सम्मान करते हैं और पिछले 15 सालों से हमारा समर्थन करने के लिए उन्हें धन्यवाद देते हैं। बाद में योगेंद्र यादव ने कहा था, कांग्रेस सिकुड़ जाएगी और अगले 5 सालों में उसके अस्तित्व को लेकर सवाल उठेंगे। दिल्ली में AAP ने साल 2015 में 67 सीटों के साथ भारी जीत हासिल की और कांग्रेस लगभग खत्म हो गई। आज स्थिति यह है कि दिल्ली में कांग्रेस के पास कोई विधायक नहीं है। इसी तरह साल 2011 में पश्चिम बंगाल में कांग्रेस ने ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के साथ मिलकर वाम मोर्चे को हराने में मदद की थी। लेकिन कुछ ही समय बाद यह गठबंधन टूट गया और दोनों दल अलग हो गए।

जनता दल और पुरानी राजनीतिक कहानी

साल 1980 के दशक के अंत में भी यही पैटर्न देखने को मिला, जब वीपी सिंह ने कांग्रेस छोड़कर जनता दल बनाया और सत्ता में पहुंचे। बाद में सरकार गिरने के बाद कांग्रेस ने भी अलग धड़ों को समर्थन देकर राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिश की।आज तमिलनाडु में TVK और विजय को समर्थन देकर कांग्रेस एक बार फिर सत्ता के केंद्र में तो दिख रही है, लेकिन सवाल वही है कि क्या यह रणनीति लंबे समय में उसके लिए फायदेमंद साबित होगी या इतिहास फिर दोहराया जाएगा। कांग्रेस जिन नए दलों को सहारा देती है, वही आगे चलकर उसके सबसे बड़े प्रतिद्वंदी बन जाते हैं।

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Published on:
10 May 2026 03:24 pm
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