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2 करोड़ में डिप्टी कलेक्टर बनने का दिया झांसा, सपने टूटे, घर उजड़ा और आखिर में मां ने दे दी जान

महाराष्ट्र में शहीद के बेटे को सरकारी नौकरी का झांसा देकर 2 करोड़ की ठगी की गई। पूरी जमा पूंजी खत्म हो गई, परिवार टूट गया और मां ने आत्महत्या कर ली।
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Apr 23, 2026
Job Scam
2 करोड़ में डिप्टी कलेक्टर बनने का दिया झांसा फाइल फोटो-पत्रिका

Job Scam: महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में डिप्टी कलेक्टर बनाने के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ कि पुणे के एक गिरोह ने एक शहीद के बेटे को सरकारी नौकरी का झांसा देकर 2 करोड़ रुपये ठग लिए। इस धोखाधड़ी में पीड़ित परिवार की पूरी जमा-पूंजी और संपत्ति खत्म हो गई। आर्थिक तंगी के चलते मानसिक तनाव के चलते पीड़ित की मां ने आत्महत्या कर ली। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

शहीद के बेटे को बनाया निशाना

मामला 27 साल के सागर का है। सागर के पिता गणपत मडावी साल 2013 में गढ़चिरौली के एटापल्ली इलाके में नक्सलियों से लड़ते हुए शहीद हुए थे। सागर पुणे में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा था, इसी दौरान उसकी मुलाकात ज्ञानेश्वर वरे नाम के व्यक्ति से हुई। ज्ञानेश्वर वरे ने सागर से दावा किया कि उसकी मंत्रालय में ऊंची पहुंच है। वह सीधे ही सागर को डिप्टी कलेक्टर बनवा सकता है यहीं से ठगी का खेल शुरू होता है।

नौकरी के नाम पर 2 करोड़ की वसूली

ठगों ने सिर्फ सागर को नहीं, बल्कि उसके भाई-बहनों को भी सरकारी नौकरी दिलाने का सपना दिखाया। भरोसा इतना बढ़ा कि सागर ने धीरे-धीरे अपनी पूरी जिंदगी की जमा पूंजी दांव पर लगा दी। उसने शहीद पिता की सरकारी सहायता राशि, घर के गहने, जमीन के प्लॉट और यहां तक कि पुश्तैनी घर तक बेच दिया। हालात इतने बिगड़े कि अंत में उसने अपनी बीमा पॉलिसी भी तुड़वा दी। कुल मिलाकर 2 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम आरोपियों के हाथों में चली गई।

मां ने की आत्महत्या

इस घटना का सबसे बड़ा सदमा सागर की मां मीनाबाई मडावी को लगा। उन्हें उम्मीद थी कि शहीद का बेटा अधिकारी बनकर नाम रोशन करेगा, लेकिन जब उन्हें पता चला कि न तो पैसा बचा और न ही घर बचा है। सागर की मां गहरे मानसिक तनाव में चली गई, उन्होंने 4 जनवरी को आत्महत्या कर ली। इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया।

जब सच सामने आया, तब सब खत्म हो चुका था

सागर को कुछ महीने बीतने के बाद भी नौकरी नहीं मिली, तो सागर को शक हुआ। उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जिसके बाद पुलिस जांच शुरू हुई और धीरे-धीरे पूरा धोखा सामने आने लगा। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। परिवार आर्थिक और मानसिक दोनों रूप से टूट चुका था।

पुलिस की कार्रवाई और गिरोह की तलाश

गढ़चिरौली पुलिस ने मुख्य आरोपी ज्ञानेश्वर शिवाजी वरे को गिरफ्तार कर लिया है। अदालत ने उसे चार दिन की पुलिस हिरासत में भेजा है। इस गिरोह में अजय भगत, मुकेश यादव और संदीप कुमार के नाम भी सामने आए हैं, जो फिलहाल फरार हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस गिरोह ने और कितने लोगों को इसी तरह ठगा है।

Updated on:
23 Apr 2026 02:39 pm
Published on:
23 Apr 2026 02:39 pm
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