
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ था, जिसके चलते पश्चिम एशिया में लगातार अस्थिरता का माहौल देखने को मिल रहा था। पिछले सप्ताह अमेरिकी कार्रवाई और उसके बाद शुरू हुई कूटनीतिक बातचीत ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। अब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ नई डील को लेकर बडा बयान देते हुए कहा है कि उनके पास पिछले सप्ताह ईरान पर हमला करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। ट्रंप ने दावा किया कि अब दोनों देशों के बीच हुआ समझौता फेयर और अच्छा है। ट्रंप के इस बयान से क्षेत्र में स्थिरता आने की उम्मीद बढ़ी है।
फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच हुई नई डील पूरी तरह साइन हो चुकी है। उन्होंने कहा कि यह समझौता सफल रहेगा और इसके अगले चरण की बातचीत पहले से आसान होगी। ट्रंप के मुताबिक, हमने जो पहला कदम उठाया है, उससे आगे की प्रक्रिया और सरल हो जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) शुक्रवार तक पूरी तरह खुल जाएगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति सामान्य होने की संभावना है। ट्रंप ने साफ किया कि अमेरिका ईरान में कोई पैसा निवेश नहीं करेगा और ऐसी खबरों को उन्होंने बेतुकी अफवाह बताया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आगे कहा कि मैं पिछले सप्ताह हमला नहीं करना चाहता था, लेकिन हमारे पास कोई चारा नहीं था। हालांकि उन्होंने हमले के बाद बनी स्थिति को बेहतर बताते हुए कहा कि कूटनीतिक समझौते ने तनाव कम करने में मदद की है। ट्रंप ने यह भी माना कि डील से ठीक पहले इजरायल द्वारा बेरूत पर किया गया हमला उन्हें पसंद नहीं आया। उन्होंने कहा कि समझौते पर हस्ताक्षर से दो घंटे पहले हुआ यह हमला अनावश्यक था और उन्होंने इजरायल को अपनी नाराजगी भी जाहिर की थी। ट्रंप के इस बयान को पश्चिम एशिया में बदलती रणनीति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
जी7 सम्मेलन के दौरान कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी ने भी अमेरिका-ईरान समझौते का स्वागत किया। उन्होंने ट्रंप से कहा कि यह डील पूरे मध्य पूर्व में सकारात्मक परिणाम ला सकती है। शेख तमीम ने कहा कि क्षेत्र में अभी काफी काम बाकी है, लेकिन अगर यही गति बनी रही तो पश्चिम एशिया में कई बडे बदलाव संभव हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नई डील से क्षेत्रीय तनाव कम हो सकता है और वैश्विक बाजारों को भी राहत मिल सकती है। हालांकि कई देशों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि समझौते का अगला चरण किस दिशा में आगे बढता है।
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