Bengal Election: 2026 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी एक बार फिर घुसपैठिया शब्द को जोर-शोर से उठा रही है। पार्टी का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस ने अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को बसाकर अपना वोट बैंक मजबूत किया है।
West Bengal election 2026: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। प्रदेश में स्थनीय से लेकर अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों का जोर है। विधानसभा चुनाव से पहले SIR को लेकर काफी विवाद हुआ था। चुनाव आयोग ने अंतिम वोटर लिस्ट भी जारी कर दी है। इसके साथ ही बीजेपी अपने चुनाव प्रचार के दौरान घुसपैठिया शब्द का इस्तेमाल कर रही है।
दरअसल, पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने घुसपैठिया शब्द को लेकर काफी बयानबाजी की थी। लेकिन 2021 के मुकाबले 2026 में यह शब्द चुनावी नैरेटिव का सबसे बड़ा कीवर्ड बनकर उभरा है।
जहां एक तरफ बीजेपी घुसपैठियों का जिक्र कर रही थी, वहीं दूसरी तरफ ममता बनर्जी ने बीजेपी को बाहरी पार्टी बताया। उस समय बंगाली अस्मिता बनाम बाहरी का नैरेटिव काफी असरदार रहा और बीजेपी को नुकसान उठाना पड़ा।
ममता बनर्जी ने एक बार फिर सत्ता में वापसी की। पिछले चुनाव में बीजेपी भले ही सत्ता में नहीं आई हो, लेकिन 77 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश में SIR को लेकर काफी विवाद हुआ था। प्रदेश में 90 लाख वोटरों का नाम लिस्ट से बाहर कर दिया। ममता बनर्जी ने SIR को लेकर सड़क से लेकर कोर्ट तक लड़ाई लड़ी।
वहीं इसके बाद 2026 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी एक बार फिर घुसपैठिया शब्द को जोर-शोर से उठा रही है। पार्टी का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस ने अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को बसाकर अपना वोट बैंक मजबूत किया है। बीजेपी नेता बार-बार 'डिटेक्ट, डिलीट, डिपोर्ट' की नीति का वादा कर रहे हैं। वे आरोप लगाते हैं कि ममता बनर्जी की टीएमसी सरकार वोट बैंक के लिए घुसपैठियों को शरण दे रही है, जिससे राज्य की जनसांख्यिकी और संस्कृति बदल रही है।
वहीं बीजेपी द्वारा चुनावी रैली में घुसपैठिया शब्द का इस्तेमाल करने पर ममता बनर्जी ने भी पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा की जिम्मेदारी BSF की है, जो केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन आती है। ऐसे में अगर घुसपैठ हो रही है तो जिम्मेदारी केंद्र की बनती है।
TMC का पलटवार है कि BJP बंगाली भाषी मजदूरों को बांग्लादेशी बताकर परेशान कर रही है और बंगाली अस्मिता का अपमान कर रही है। मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) में लाखों नाम कटने से विवाद बढ़ गया है।