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IIT मद्रास के स्टार्टअप का कमाल, दुनिया में पहली बार बनी Opto-SAR तकनीक, क्या और कैसे करेगी काम?

IIT मद्रास स्टार्टअप गैलेक्सीआई का ‘दृष्टि’ सैटेलाइट लॉन्च, पहली बार Opto-SAR तकनीक का इस्तेमाल, अब हर मौसम, बादल और रात में भी साफ और सटीक तस्वीरें मिलेंगी।

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May 03, 2026
दुनिया में पहली बार बनी Opto-SAR तकनीक (AI Photo)

Indian Space Startup: भारत के अंतरिक्ष सेक्टर में एक बड़ा कदम देखने को मिला है। भारतीय IIT मद्रास के स्टार्टअप गैलेक्सीआई (GalaxEye) ने दुनिया का पहला 'दृष्टि' सैटेलाइट (Drishti Satellite) लॉन्च किया है, जो Opto-SAR तकनीक से लैस है। यह तकनीक ऑप्टिकल और रडार (SAR) इमेज को एक साथ जोड़ती है, जिससे एक ही समय पर सटीक डेटा मिलता है। इसकी खासियत यह है कि यह भारी बारिश, घने बादलों और रात के अंधेरे में भी साफ तस्वीरें दे सकता है। AI की मदद से यह खराब परिस्थितियों में भी डेटा को समझने योग्य बनाता है। यह सैटेलाइट रक्षा, कृषि और आपदा प्रबंधन के लिए गेम-चेंजर साबित होगा। इस मिशन में कुल 45 पेलोड शामिल थे और भारत के लिए यह लॉन्च खास इसलिए भी है क्योंकि यह तकनीक पहली बार इस्तेमाल में लाई गई है।

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जानिए क्या है ‘Opto-SAR’ तकनीक?

‘दृष्टि’ सैटेलाइट की सबसे बड़ी खासियत इसकी ऑप्टो-एसएआर (Opto-SAR) तकनीक है। आम तौर पर सैटेलाइट दो तरह की इमेज बनाता हैं, पहली ऑप्टिकल इमेज (कैमरे जैसी साफ तस्वीरें) और दूसरी होती है, रडार इमेज (SAR तकनीक से हर मौसम में तस्वीरें) लेकिन दोनों के अपने-अपने सीमित उपयोग थे। ऑप्टिकल इमेज बादलों और रात में काम नहीं करतीं, जबकि SAR इमेज को समझना आसान नहीं होता। ‘दृष्टि’ इन दोनों तकनीकों को एक साथ जोड़कर एक ही समय में एक ही जगह की तस्वीरें लेने में सक्षम है।

क्यों खास है यह सैटेलाइट

अब तक अलग-अलग सैटेलाइट से मिले डेटा को जोड़कर जानकारी तैयार करनी पड़ती थी। इसमें समय लगता था और सटीकता भी प्रभावित होती थी। ‘दृष्टि’ इस समस्या को खत्म करता है क्योंकि

  • यह एक साथ ऑप्टिकल और रडार इमेज लेता है
  • एक ही जगह को एक ही समय पर कैप्चर करता है
  • डेटा को समझना आसान बनाता है
  • इससे यूजर्स को बिना झंझट के ज्यादा सटीक और तुरंत जानकारी मिल सकेगी।

AI से बनेगी साफ तस्वीरें

जब बादलों या मौसम की वजह से ऑप्टिकल इमेज नहीं मिल पाती, तब यह सैटेलाइट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से SAR डेटा को ऑप्टिकल जैसी तस्वीर में बदल देगा। इसका मतलब है कि खराब मौसम में भी साफ और समझने लायक तस्वीरें मिलती रहेंगी।

IIT मद्रास के छात्रों की पहल

GalaxEye की शुरुआत IIT मद्रास के पूर्व छात्रों ने की थी। कंपनी के फाउंडर सुयश सिंह के मुताबिक, इस तकनीक को विकसित करना आसान नहीं था क्योंकि ऑप्टिकल और SAR सेंसर अलग-अलग तरीके से काम करते हैं और पृथ्वी को अलग-अलग एंगल से देखते हैं। इन्हें एक साथ सिंक करना ही सबसे बड़ी चुनौती थी, जिसे कंपनी ने अपने खास टेक्नोलॉजी स्टैक से हल किया।

सेना से लेकर खेती तक होगा फायदा

यह तकनीक खास तौर पर भारत जैसे उष्णकटिबंधीय देशों के लिए अहम है, जहां अक्सर बादल छाए रहते हैं और मौसम तेजी से बदलता है। पश्चिमी देशों में मौसम अपेक्षाकृत साफ रहता है, इसलिए वहां इस तरह की जरूरत कम महसूस हुई। ‘दृष्टि’ इस कमी को पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इस सैटेलाइट से मिलने वाला डेटा कई क्षेत्रों में काम आएगा।

  • रक्षा और निगरानी
  • आपदा प्रबंधन
  • खेती और मौसम पूर्वानुमान
  • शहरी योजन

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Updated on:
03 May 2026 03:49 pm
Published on:
03 May 2026 03:48 pm
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