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रुपया टूटा, सपनों पर पड़ा असर, अमेरिका में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों पर अचानक बढ़ा आर्थिक बोझ

America में पढ़ रहे Indian students पर रुपये की गिरावट, महंगी फीस, वीजा अनिश्चितता और बढ़ते हवाई किराए का दबाव बढ़ा, जिससे विदेश शिक्षा का कुल खर्च तेजी से बढ़ गया।

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May 29, 2026
भारतीय छात्रों पर टूटा खर्चों का पहाड़ (AI-Photo)

Indian Students Study In US: अमेरिका में पढ़ाई का सपना देखने वाले लाखों भारतीय छात्रों के लिए हालात लगातार मुश्किल होते जा रहे हैं। रुपये में रिकॉर्ड गिरावट, महंगी हवाई टिकटें, वीजा से जुड़ी अनिश्चितता और बढ़ते वैश्विक तनाव ने विदेशी शिक्षा का खर्च काफी बढ़ा दिया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार 12 लाख से ज्यादा भारतीय छात्र विदेशों में पढ़ रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या टियर-2 और टियर-3 शहरों से आती है। कमजोर होते रुपये के कारण ट्यूशन फीस, रहने और रोजमर्रा के खर्चों का बोझ तेजी से बढ़ रहा है।

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विदेश में पढ़ाई का सपना क्यों हो रहा महंगा?

भारत से हर साल बड़ी संख्या में छात्र उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाते हैं। लेकिन अब सिर्फ यूनिवर्सिटी में एडमिशन मिलना ही चुनौती नहीं है, बल्कि पढ़ाई का पूरा खर्च संभालना भी परिवारों के लिए बड़ी चिंता बनता जा रहा है। रुपये की कमजोरी ने ट्यूशन फीस, हॉस्टल, किराया, खाने-पीने और रोजमर्रा के खर्चों को सीधे प्रभावित किया है। अमेरिका में पढ़ रहे छात्रों को अब पहले की तुलना में कहीं ज्यादा रकम खर्च करनी पड़ रही है।

कितने भारतीय छात्र विदेशों में पढ़ रहे हैं?

विदेश मंत्रालय (MEA) के साल 2025 के आंकड़ों के मुताबिक 12 लाख से अधिक भारतीय छात्र विदेशों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इससे पहले यह संख्या 13.3 लाख थी। हालांकि कुल संख्या अभी भी बड़ी है, लेकिन साल-दर-साल विदेशी शिक्षा के लिए जाने वाले छात्रों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। इसके पीछे वीजा नियमों की सख्ती, वैश्विक अनिश्चितता, आर्थिक अस्थिरता और नई नीतियां प्रमुख कारण हैं।

शहरों के छात्रों पर सबसे ज्यादा असर

शिक्षा ऋण देने वाली संस्था प्रोडिजी फाइनेंस (Prodigy Finance) के अनुसार विदेश में पढ़ाई की इच्छा अभी भी मजबूत बनी हुई है, लेकिन आर्थिक दबाव तेजी से बढ़ा है। संस्था के पुराने शोध के मुताबिक विदेश में पढ़ाई की योजना बनाने वाले 79% से ज्यादा भारतीय छात्र टियर-2 और टियर-3 शहरों से आते हैं। इनमें से लगभग 60% छात्र ऐसे परिवारों से हैं जिनकी आय सीमित है और जहां माता-पिता बच्चों की पढ़ाई के लिए बड़े आर्थिक त्याग करते हैं।

रुपये की गिरावट ने बढ़ाई परेशानी

इस साल भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर हुआ है। साल 2026 में अब तक रुपया लगभग 7.04% तक गिर चुका है। जनवरी में डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 89.50 से 89.90 रुपये के बीच चल रहा रहा था। लेकिन जनवरी से मई के बीच यह लगातार नए निचले स्तर छूता रहा। रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड 96.56 रुपये तक पहुंच गया, जिससे विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों और उनके परिवारों की चिंता और बढ़ गई।

सिर्फ रुपया नहीं, ये संकट भी बढ़ा रहे मुश्किलें

वीजा अनिश्चितता बनी चिंता- विदेश में पढ़ाई की तैयारी कर रहे छात्रों को वीजा से जुड़ी अनिश्चितताओं का भी सामना करना पड़ रहा है। कई देशों में नियमों में बदलाव और जांच प्रक्रिया के कारण छात्रों की चिंता बढ़ी है।

हवाई यात्रा का खर्च भी बढ़ा- वैश्विक तनाव और ईंधन बाजार में उतार-चढ़ाव का असर हवाई किरायों पर भी दिख रहा है। विदेश जाने वाले छात्रों के लिए टिकटों का खर्च अब कुल बजट का बड़ा हिस्सा बनता जा रहा है।

बदलते हालात को देखते हुए छात्रों को ऐसे फ्लाइट टिकट चुनने चाहिए जिनमें तारीख बदलने की सुविधा हो। साथ ही विदेशी मुद्रा में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर शिक्षा खर्च पर पड़ता है, इसलिए छात्रों और अभिभावकों को फंडिंग और भुगतान की रणनीति पहले से तैयार रखनी चाहिए।

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Published on:
29 May 2026 09:06 pm
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