Iran-US War: भारत ने ईरान के साथ संतुलित कूटनीति अपनाकर होर्मुज स्टेट (Strait of Hormuz) से अपने एलपीजी (LPG) टैंकरों को सुरक्षित निकालने में सफलता पाई। भारत ने ईरान के दूतावास जाकर खामेनेई की मौत पर संवेदना व्यक्त की जिसके बाद उसे जहाज निकालने की अनुमति मिली।
Iran-US War: अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की हत्या के बाद पश्चिम एशिया में तनाव तेजी से बढ़ गया था। इस तनाव का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर पड़ा, खासकर होर्मुज स्टेट (Strait of Hormuz) में आवाजाही लगभग ठप हो गई। ईरान ने होर्मुज स्टेट बंद कर दिया और कई देशों के जहाज बीच समुंद्र फंस गए। लेकिन इस तनाव के बावजूद भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी टैंकरों को सुरक्षित होर्मुज स्टेट से निकलने की अनुमति मिल गई। इसकी बड़ी वजह भारत की संतुलित कूटनीति बताई जा रही है। भारत ने ईरान से लगातार संवाद बनाए रखा जिसके परिणामस्वरूप उसके जहाजों को अनुमति मिली।
भारत के विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और विदेश मंत्री एस जयशंकर के स्तर पर लगातार बातचीत ने इस सफलता में अहम भूमिका निभाई। 5 मार्च को भारत ने ईरान के दूतावास जाकर सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत पर संवेदना व्यक्त की जिसे तेहरान ने सकारात्मक संकेत के रूप में लिया। इसके बाद दोनों देशों के बीच बातचीत तेज हुई। भारत की लगभग 90 प्रतिशत एलपीजी आयात आपूर्ति इसी मार्ग से होती है, इसलिए यह समझौता देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह कोई स्थायी समझौता नहीं है, बल्कि हर जहाज के लिए अलग-अलग बातचीत की जा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने इस पूरे घटनाक्रम में संतुलन बनाए रखने की रणनीति अपनाई। एक ओर भारत के अमेरिका और इजरायल से मजबूत आर्थिक और रक्षा संबंध हैं, वहीं ईरान भी पारंपरिक साझेदार रहा है। इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए भारत ने न तो किसी पक्ष का खुलकर समर्थन किया और न ही दूरी बनाई। 12 मार्च को प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से बातचीत कर ऊर्जा और व्यापार के निर्बाध प्रवाह की अपील की। इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी ने भी अपने वरिष्ठ मुस्लिम नेता को ईरानी दूतावास भेजकर रिश्तों को मजबूत करने का संकेत दिया।
होर्मुज स्टेट में तनाव के कारण भारत में रसोई गैस की कमी का खतरा पैदा हो गया था, जिससे लाखों परिवार और छोटे व्यवसाय प्रभावित हो सकते थे। वर्तमान में 20 से अधिक भारतीय जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। इस स्थिति को देखते हुए भारत ने अरब सागर और ओमान की खाड़ी में अतिरिक्त युद्धपोत तैनात किए हैं ताकि जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कूटनीतिक और सैन्य तैयारी भारत की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।