
DSC Recruitment Scam: आंध्र प्रदेश में शिक्षक भर्ती को लेकर राजनीति तेज हो गई है। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने राज्य की मेगा डिस्ट्रिक्ट सिलेक्शन कमेटी (DSC) भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए चंद्रबाबू नायडू सरकार को निशाने पर लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं ने लाखों युवाओं के सपनों और भरोसे को झटका पहुंचाया है।
ताडेपल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जगन मोहन रेड्डी ने कहा कि शिक्षक भर्ती जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में सामने आ रही जानकारियां बेहद चिंताजनक हैं। यह भर्ती सिर्फ नौकरियां देने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि लाखों युवाओं की उम्मीदों और भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। आज डिस्ट्रिक्ट सिलेक्शन कमिटी (DSC) के बारे में सामने आ रही सभी बातें बेहद चौंकाने वाली हैं। CM एन. चंद्रबाबू नायडू की सरकार ने घोटालों के जरिए लाखों उम्मीदवारों के भरोसे को तोड़ा है और प्रतिभाशाली उम्मीदवारों की जिंदगी को नुकसान पहुंचाया है।'
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि DSC परीक्षा लाखों युवाओं के लिए सरकारी शिक्षक बनने का रास्ता है। ऐसे में यदि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं, तो इसका सीधा असर उम्मीदवारों के भविष्य पर पड़ता है। उन्होंने कहा, 'इससे पहले कहीं भी भर्ती की इतनी खराब प्रक्रिया नहीं देखी गई है। DSC लाखों युवाओं की उम्मीदों और भविष्य का प्रतिनिधित्व करता है। भर्ती की ऐसी प्रक्रिया में भी भ्रष्टाचार और गड़बड़ियों का सहारा लेना बेहद निंदनीय है। जगन ने आरोप लगाया कि सरकार को युवाओं के हितों की रक्षा करनी चाहिए थी, लेकिन इसके बजाय भर्ती प्रक्रिया विवादों में घिर गई।'
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जगन मोहन रेड्डी ने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि अगर झूठ, धोखेबाजी, विश्वासघात, पीठ में छुरा घोंपने और घोटालों को शर्ट-पैंट पहना दी जाए, तो वे एन. चंद्रबाबू नायडू ही होंगे। हालांकि, आंध्र प्रदेश सरकार पहले ही भर्ती प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी के आरोपों को खारिज कर चुकी है।
31 मई को स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव कोना शशिधर ने स्पष्ट कहा था कि मेगा DSC भर्ती पूरी तरह पारदर्शी तरीके से आयोजित की गई। करीब 6 साल बाद आयोजित यह परीक्षा TCS iON प्लेटफॉर्म पर कंप्यूटर आधारित टेस्ट के जरिए कराई गई। उनके अनुसार, सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्टों में सामने आए आरोप क्षैतिज आरक्षण नियमों को लेकर फैली गलतफहमी का परिणाम हैं।