
Jharkhand Protest: झारखंड में इन दिनों हजारों छात्र सड़कों पर उतरकर भारी विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि JPSC-JSSC परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली और पेपर लीक हुआ है। वे इन परीक्षाओं को लगातार रद्द करने की मांग पर अड़े हैं। इसी हंगामे के बीच CID की जांच में एक चौंकाने वाला नाम सामने आया है, वो हैअभय कुमार तिवारी। गोड्डा जिले में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर (BSO) के पद पर तैनात अभय तिवारी को CID ने गिरफ्तार कर लिया है। अभय को अब झारखंड का 'संजीव मुखिया' कहा जा रहा है, जो बिहार में पेपर लीक कराने के लिए बदनाम है।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं का भरोसा जीतना अभय के लिए बहुत आसान काम था। जांच में सामने आया है कि अभय कोई साधारण सरकारी कर्मचारी नहीं था, बल्कि परीक्षा पास करने में माहिर था। उसने पिछले 13 सालों में 12 से अधिक कठिन प्रतियोगी परीक्षाएं पास की थी।
वह इसी बात का फायदा उठाकर छात्रों के बीच अपनी साख जमाता था। छात्र उस पर यह सोचकर भरोसा कर लेते थे कि जो व्यक्ति खुद एक के बाद एक 12 नौकरियां निकाल सकता है, वह उन्हें भी आसानी से पास करा देगा। इसी भरोसे का फायदा उठाकर उसने अभ्यर्थियों को अपने जाल में फंसाया और उनसे करोड़ों रुपये ऐंठने लगा।
CID की FIR के अनुसार, अभय तिवारी और उसके गिरोह ने सरकारी नौकरियों में चयन कराने के लिए बाकायदा एक रेट कार्ड बना रखा था। शुरुआती परीक्षा में पास कराने के लिए करीब 5 लाख रुपये लेते थे, जबकि मुख्य परीक्षा के नाम पर कम से कम 10 लाख रुपये एडवांस लिए जाते थे। और वहीं, पक्की नौकरी यानी फाइनल सिलेक्शन दिलाने के नाम पर 25 लाख से लेकर 40 लाख रुपये तक की वसूली की जाती थी।
जांच एजेंसियों का अनुमान है कि इस फर्जीवाड़े के जरिए अभय ने लगभग 25 करोड़ रुपये की काली कमाई की है। उसकी महंगी लाइफस्टाइल और कमाई से ज्यादा संपत्ति भी अब जांच के घेरे में है।
अभय तिवारी की सफलता का रिकॉर्ड बहुत ही चौंका देने वाला है। उसने साल 2013 में भारतीय नौसेना की परीक्षा पास की थी। इसके ठीक अगले साल 2014 में उसने भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) में असिस्टेंट पद की परीक्षा और CRPF में हेड कांस्टेबल की लिखित व टाइपिंग परीक्षा भी निकाली थी।
इसके बाद उसने JSSC पुलिस सब-इंस्पेक्टर, IRB कांस्टेबल, नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL), JSSC पोस्ट ग्रेजुएट टीचर (PGT) और CGL परीक्षाएं भी पास की। इतना ही नहीं JPSC की सिविल सर्विसेज और फॉरेस्ट विभाग की अफसर वाली परीक्षाएं भी उसने आसानी से क्लियर की थी।
सरकारी अफसर बनने से पहले अभय TRS Data Processing नाम की एक प्राइवेट कंपनी में काम करता था। यह वही कंपनी है जिसे अप्रैल में आयोजित 14वीं JPSC परीक्षा के संचालन का जिम्मा मिला था और जिसे यूपी सरकार धांधली के आरोपों के चलते पहले ही ब्लैकलिस्ट कर चुकी है। BSO बनने के बाद भी अभय का इस कंपनी और परीक्षा माफियाओं से साठगांठ बनी रही, जिससे उसे पेपर लीक कराने में आसानी रहती थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए CID ने रांची, पलामू, हजारीबाग, बोकारो और धनबाद समेत 18 ठिकानों पर छापेमारी की है। अभय तिवारी समेत 11 आरोपियों पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के गंभीर मामले दर्ज किए गए हैं।