
Jharkhand Student Protest Update: झारखंड में JPSC और JSSC अभ्यर्थियों का प्रदर्शन सोमवार को भी जारी है। इस बीच झारखंड की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि सरकार छात्रों के लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन करने के अधिकार का सम्मान करती है, लेकिन परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला संवैधानिक और कानूनी दायरे में ही लिया जा सकता है।
मंत्री ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं और प्रशासन को बल प्रयोग नहीं करने को कहा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन, आंसू गैस या लाठीचार्ज का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच संवाद नहीं होने के आरोपों को खारिज करते हुए दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि पिछले कई दिनों से लगातार बातचीत हो रही है। उन्होंने बताया कि सरकार ने छात्रों के साथ घंटों चर्चा की है।
मंत्री ने कहा-सरकार ने उन सभी मांगों को स्वीकार किया है, जिन्हें राज्य सरकार के स्तर पर पूरा करना संभव था। हालांकि, CGL परीक्षा को पूरी तरह कैंसल करने की छात्रों की मांग कानूनी और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ी होने के कारण जटिल है। एग्जाम को पूरी तरह से कैंसिल करना, कानूनी पैमानों से उलझी हुई है। जिस मुद्दे पर वे CGL एग्जाम कैंसिल करने पर अड़े हैं, उसमें कानूनी निर्देश शामिल हैं। स्टूडेंट्स को यह समझना चाहिए कि राज्य सरकार को संवैधानिक अधिकारों और तय गाइडलाइंस के दायरे में काम करना चाहिए। हमने लगभग हर बात मान ली है।
दीपिका पांडेय सिंह ने सरकार की जांच प्रक्रिया को लेकर भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए सरकार ने जांच का दायरा खुला रखा है। राज्य सरकार न्यायिक निगरानी में जांच के लिए तैयार है। इसके अलावा फाइनेंशियल गड़बड़ियों के आरोपों की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भी जांच में शामिल होने का कहा गया है।
मंत्री ने आगे कहा कि सरकार भर्ती परीक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार की तैयारी कर रही है। छात्रों के साथ हुई बातचीत में भी प्रस्तावित सुधारों की जानकारी साझा की गई है। इसके लिए IIM, IIT, XLRI और ISM जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों को शामिल कर एक कमेटी बनाने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए जरूरी बदलाव करना है। सरकार का लक्ष्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें भविष्य में परीक्षाओं को लेकर किसी तरह की अनियमितता या संदेह की स्थिति पैदा न हो।