घर-घर जाकर झाड़ू-पोछा करने वाली कलिता माझी अब नवनिर्वाचित विधायक हैं। उन्होंने आउसग्राम सीट से चुनावी जीत दर्ज की है। अपने निकटतम टीएमसी उम्मीदवार श्यामा प्रसन्न लोहार को 12,535 वोटों के अंतर से हराया। पढ़ें पूरी खबर...
4 मार्च 2026 को पश्चिम बंगाल (West Bengal Election Result) की राजनीति में बड़ा परिवर्तन आया। 15 साल के निरंतर शासन के बाद तृणमूल कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई। भाजपा ने 293 में से 206 पर कब्जा जमाया। जनता ने इस बार न सिर्फ सरकार बदली, बल्कि सामाजिक बदलाव का भी स्पष्ट संदेश दिया। यह परिवर्तन इतना बड़ा था कि घर की रसोई में काम करने वाली और झाडू़ पोछा करने वाली कलिता माझी (Kalita Majhi) बीजेपी की टिकट पर चुनाव जीतकर अब नव निर्वाचित विधायक हो गई हैं।
कलिता माझी गुस्कारा नगरपालिका क्षेत्र की रहने वाली हैं। कुछ समय पहले तक वे महज 2,500 रुपये मासिक कमाने के लिए चार घरों में घरेलू काम करती थीं। समाज में अक्सर जिस काम को ‘छोटा’ समझा जाता है, उसी काम को करने वाली महिला ने आज विधानसभा पहुंचकर सबको चौंका दिया। आउसग्राम सीट से कलिता माझी ने शानदार जीत दर्ज की। उन्होंने 1,07,692 वोट हासिल कर टीएमसी उम्मीदवार श्यामा प्रसन्न लोहार को 12,535 वोटों के अंतर से हराया।
2021 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने भाजपा के टिकट पर किस्मत आजमाई थी, लेकिन तब उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इस बार पार्टी ने फिर उन पर भरोसा जताया और उन्होंने उसे जीत में बदल दिया। भाजपा सांसद पसी मोहन ने उनकी जीत पर X पर लिखा कि बीजेपी की बंगाल उम्मीदवार कलिता माझी, जो चार घरों में काम करके महज 2,500 रुपये महीना कमाती हैं, ने आउसग्राम सीट जीत ली है। यह भाजपा की ताकत है, जहां साधारण पृष्ठभूमि से आने वाला व्यक्ति भी प्रेरणादायक कहानी लिख सकता है।
चंदना बाउरी पश्चिम बंगाल चुनाव की एक और प्रेरणादायक कहानी हैं। गहरी जमीनी जुड़ाव और संघर्षपूर्ण जीवन से उभरी चंदना, कलिता माझी की तरह ही आम महिला की ताकत का प्रतीक बन गई हैं।मजदूर और गृहिणी के रूप में अपना पूरा जीवन बिताने वाली चंदना बाउरी इस बार सल्तोरा विधानसभा सीट से दूसरी बार विधायक चुनी गई हैं। 20121 में भाजपा के टिकट पर पहली बार चुनाव लड़कर वे विधायक बनी थीं और इस बार जनता ने उन्हें फिर से भरोसा जताया। उनके पति दिहाड़ी मजदूर थे। चंदना खुद भी उनके साथ मजदूरी का काम करती थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि पूरे दिन की कड़ी मेहनत के बावजूद घर का खर्चा महज ₹400 से चलता था।