Lok Sabha Seats: केंद्र सरकार तीनों विधेयक पारित करने के लिए गुरुवार से संसद की विशेष बैठकें बुला रही हैं। विधेयकों का प्रारूप सामने आने के बाद विपक्षी दल इसके अध्ययन और राजनीतिक गुणा-भाग में लग गए हैं।
Lok Sabha Seat Expansion 2026: देश की चुनावी राजनीति का नक्शा बदलने की तैयारी शुरू हो गई है। केंद्र सरकार लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने, 2026 की जनगणना के बजाय 2011 की जनगणना के आधार पर ही परिसीमन करने और 33% महिला आरक्षण 2029 के आम चुनाव से ही लागू करने का रास्ता साफ करने के लिए संविधान संशोधन की दिशा में आगे बढ़ चुकी है। पिछले कुछ दिनों की अटकलों को विराम देते हुए और विपक्ष के गोपनीयता के आरोपों के बीच केंद्र सरकार ने मंगलवार को सांसदों को तीन विधेयकों के ड्राफ्ट भेजे हैं।
इनमें एक संविधान संशोधन (131वां) विधेयक है, जबकि दो विधेयक परिसीमन आयोग के गठन से जुड़े हुए हैं। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि 131वां संविधान संशोधन विधेयक महिला आरक्षण को लागू करने के लिए लाया जा रहा है। केंद्र सरकार ने संविधान संशोधन विधेयक के जरिए परिसीमन और महिला आरक्षण को जोड़ दिया है। केंद्र सरकार तीनों विधेयक पारित करने के लिए गुरुवार से संसद की विशेष बैठकें बुला रही हैं। विधेयकों का प्रारूप सामने आने के बाद विपक्षी दल इसके अध्ययन और राजनीतिक गुणा-भाग में लग गए हैं।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम के अनुसार महिला आरक्षण 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना के आंकड़ों के प्रकाशन के बाद परिसीमन से लागू हो सकता था। अब संविधान संशोधन विधेयक में नवीनतम प्रकाशित जनगणना के आधार पर परिसीमन की अनुमति देकर इसे जल्दी लागू करने का इंतजाम किया जा रहा है।
| वर्ष | सीटें |
| 1950 | 489 |
| 1956 | 494 |
| 1962 | 520 |
| 1973 | 545 (जिसमें 2 एंग्लो इंडियन नामित) |
| 2020 | 543 (एंग्लो-इंडियन मनोनयन समाप्त होने से) |
| 2026 | 850 (प्रस्तावित) |
1. लोकसभा की सीटों में वृद्धि: अनुच्छेद 81 में संशोधन कर लोकसभा की सदस्य संख्या बढ़ाकर अधिकतम 815 (राज्यों से) और 35 (केंद्र शासित प्रदेशों से) की जा सकती है।
2. जनसंख्या की नई परिभाषा: अनुच्छेद 55, 81, 82, 170, 330 और 332 में ‘जनसंख्या’ शब्द की व्याख्या को बदला गया है। अब इसका अर्थ उस जनगणना से होगा जिसे संसद कानून बनाकर निर्धारित करे और जिसके आंकड़े प्रकाशित हो चुके हों।
3. परिसीमन आयोग की भूमिका: अनुच्छेद 82 और 170 में संशोधन कर यह स्पष्ट किया गया है कि सीटों का आवंटन और निर्वाचन क्षेत्रों का विभाजन निर्धारित जनगणना के आधार पर परिसीमन आयोग द्वारा किया जाएगा।
1.अवधि: महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण 15 साल के लिए होगा, जिसे संसद आगे बढ़ा सकती है।
2. रोटेशन: महिला आरक्षित सीटें रोटेशन से तय होंगी, एससी-एसटी सीटों में आनुपातिक कोटा होगा।
3. एसटी आरक्षण में बदलाव: अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड और त्रिपुरा की विधानसभाओं में अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटों के आरक्षण के मानदंडों में भी संशोधन प्रस्तावित है।
विधेयक के उद्देश्यों में कहा गया है कि 1971 की जनगणना के आधार पर सीटों को फ्रीज करने का एक महत्वपूर्ण नीतिगत उद्देश्य था, लेकिन तब से देश के जनसांख्यिकीय प्रोफाइल में भारी बदलाव आए हैं। साथ ही नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित होने से लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए लगभग एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान भी किया जाना है।
महिला आरक्षण यह कानून पारित होने के बाद होने वाली पहली जनगणना के पश्चात लागू किया जाना था लेकिन अगली जनगणना और उसके बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया में काफी समय लगेगा, जिससे हमारी लोकतांत्रिक राजनीति में महिलाओं की प्रभावी और समर्पित भागीदारी में देरी होगी। इसलिए इसे शीघ्र लागू करने के लिए विधेयक लाया जा रहा है।