West Bengal Election Results: ममता बनर्जी का वह दावा झूठा हो गया, जिसमें वह कह रही थी कि भवानीपुर उनका घर है। यहां से वह ही जीतेंगी, जबकि अपनी ही बूथ पर वह लीड नहीं ले पाईं। पढ़ें पूरी खबर...
West Bengal Election Results 2026: पश्चिम बंगाल में 15 साल के तृणमूल शासन का अंत हो गया। तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) खुद अपनी सीट (भवानीपुर) से चुनाव हार गईं। भवानीपुर के 24 बूथों पर उन्हें वोट नहीं मिला। टीएमसी चीफ का वह दावा भी झूठा साबित हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि मैं भवानीपुर से जीतूंगी, भले ही यहां सिर्फ एक वोटर रह जाए।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान ममता बनर्जी ने कहा कि भवानीपुर का घर-घर उन्हें जानता है। यह इलाका उनकी मां जैसा है, लेकिन इस बार नतीजे कुछ और ही कहानी बयान कर रहे हैं। ममता बनर्जी को अपने ही गढ़ में शुभेंदु अधिकारी से 15,105 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। बूथ-दर-बूथ और वार्ड-दर-वार्ड डेटा देखें तो उनकी हार काफी सुनियोजित और भारी नजर आती है।
सबसे बड़ा और प्रतीकात्मक झटका तो हरीश मुखर्जी रोड स्थित मित्रा इंस्टीट्यूशन के बूथ 260 से मिला, जहां ममता खुद वोट डालती हैं। 2021 के उपचुनाव में इस बूथ पर उन्हें 36 वोटों की बढ़त मिली थी। तब उन्हें 321 वोट मिले थे, जबकि भाजपा की प्रियंका टिबरेवाल को 285 वोट, लेकिन इस बार का रुझान अलग रहा। इस बूथ पर उनका समर्थन लगातार घटा है।
ममता ने SIR (Special Intensive Revision) में वोटरों के नाम कटने पर भी तीखा हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि यहां का हर इंसान उन्हें जानता है और यह उनका इलाका है। लेकिन चुनाव आयोग के बूथवार आंकड़े उनके इन दावों के उलट तस्वीर पेश कर रहे हैं। भवानीपुर इलाके में एक समय उनका दबदबा था, लेकिन पिछले कुछ सालों में समीकरण बदले हैं। स्थानीय लोग कह रहे हैं कि कई मुद्दों जैसे विकास, रोजगार और प्रशासन पर लोगों की नाराजगी बढ़ी है।
2021 के उपचुनाव, 2024 के लोकसभा चुनाव (भवानीपुर क्षेत्र) और हाल के राज्य चुनावों के डेटा का अध्ययन बताता है कि ममता का वोट शेयर लगातार कम होता गया। पहले चरण में कुछ सीटें छूटने लगीं, दूसरे चरण में अंतर और बढ़ गया। विश्लेषक मानते हैं कि तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी कलह, स्थानीय नेताओं की शिकायतें और विपक्ष की सक्रियता ने ममता के गढ़ को कमजोर किया। शुभेंदु अधिकारी जैसे मजबूत विरोधी उम्मीदवार ने भी जमीन पर अच्छी लड़ाई लड़ी।
माना जा रहा है कि सुवेंदु का भवानीपुर में ममता बनर्जी के खिलाफ उतारना, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की TMC सुप्रीमो को उनके ही घर में हराने की रणनीति की शुरुआत थी। इसके बाद जमीनी स्तर पर अथक मेहनत, सटीक प्लानिंग और पूरी तरह फोकस्ड मैनेजमेंट का नतीजा था कि ममता बनर्जी को भवानीपुर में करारी हार का सामना करना पड़ा और उनकी पार्टी बंगाल में बुरी तरह से हार गई। यह जीत इन चुनावों का सबसे बड़ा और नाटकीय उलटफेर साबित हुई। BJP के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, अमित शाह ने बहुत पहले ही तय कर लिया था कि ममता बनर्जी को उनके अपने गढ़ में हराकर एक मजबूत संदेश दिया जाएगा।
सुवेंदु अधिकारी जैसे जुझारू और काबिल नेता को साथ पाकर अमित शाह ने भवानीपुर के लिए एक विशेष समर्पित टीम गठित की। BJP के चुनाव प्रचार में शामिल एक सूत्र के मुताबिक, कोलकाता में शाह ने जितनी भी रातें गुजारीं, उनमें से अधिकांश बैठकें सिर्फ भवानीपुर सीट पर केंद्रित रहीं। भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में करीब 25,000 गुजराती और 21,000 मारवाड़ी वोटर थे, जो चुनावी नतीजे तय करने में अहम भूमिका निभा सकते थे।
शाह ने इन दोनों समुदायों के अलग-अलग समूहों से मुलाकात की। इन बैठकों के दौरान एक अनौपचारिक रात्रिभोज का भी आयोजन किया गया, जिससे माहौल काफी सहज और विश्वास भरा बन गया। इन समुदायों ने शिकायत की कि पिछले चुनावों में TMC कार्यकर्ताओं ने उन्हें वोट डालने से रोका, धमकाया और उनके नाम पर फर्जी वोट डाले गए। BJP पदाधिकारी के अनुसार, लोगों ने कहा कि अगर उनकी सोसायटियों में सुरक्षा दी जाए तो वे बिना डर के वोट डाल सकेंगे। शाह ने इसकी पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की।
शाह की टीम ने भवानीपुर के हर बूथ पर एक समर्पित बूथ-स्तरीय प्रभारी नियुक्त किया। उनका काम था कि पार्टी के अंदर किसी भी तरह की कलह या मतभेद को तुरंत सामने लाना। साथ ही, TMC की ओर से हो रही किसी भी धमकी, जबरदस्ती या गड़बड़ी की रिपोर्ट करना।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने निर्देश था कि BJP के सभी कार्यकर्ता सुबह 11 बजे तक अपना वोट डाल लें और उसके बाद पूरे जोर से अन्य मतदाताओं को वोट डलवाने में जुट जाएं। दूसरे राज्यों के BJP विधायकों को भी खास समुदायों से जुड़ाव के आधार पर तैनात किया गया।