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ममता बनर्जी-शुवेंदु अधिकारी के बीच किस बात पर हुई थी कहासुनी? TMC छोड़कर BJP में आए और CM को 2 बार हराया

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक समय ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद लेफ्टिनेंट रहे शुवेंदु अधिकारी आज उनकी सबसे बड़ी चुनौती बन चुके हैं। टीएमसी छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद शुवेंदु ने न केवल ममता को 2021 के नंदीग्राम में हराया, बल्कि 2026 के विधानसभा चुनाव में भवानीपुर से भी उन्हें करारी शिकस्त दी।

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Mamata Banerjee vs Suvendu Adhikari

West Bengal New Chief Minister: पश्चिम बंगाल को 9 मई को नया मुख्यमंत्री मिल जाएगा। कोलकाता में हुई भारतीय जनता पार्टी विधायक दल की बैठक में शुवेंदु अधिकारी के नाम पर मुहर लग गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुवेंदु के नाम का ऐलान किया है। शुवेंदु अधिकारी शनिवार को को सुबह 11 बजे कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। एक समय ऐसा था कि शुवेंदु अधिकारी, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस में थे। दोनों के बीच ऐसा क्या हुआ कि शुवेंदु अधिकारी ने टीएमसी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए। आइए जानते है पूरा घटनाक्रम।

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भरोसेमंद लेफ्टिनेंट रहे शुवेंदु बना सबसे बड़ी चुनौती

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक समय ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद लेफ्टिनेंट रहे शुवेंदु अधिकारी आज उनकी सबसे बड़ी चुनौती बन चुके हैं। टीएमसी छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद शुवेंदु ने न केवल ममता को 2021 के नंदीग्राम में हराया, बल्कि 2026 के विधानसभा चुनाव में भवानीपुर से भी उन्हें करारी शिकस्त दी। यह दो बार की हार ममता बनर्जी के राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है, जिसने टीएमसी के 15 साल के शासन को भी समाप्त कर दिया।

सुवेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के पहले भाजपाई सीएम बन सकते हैं। (AI Generated Photo).

टीएमसी में कई महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री बने शुवेंदु

शुवेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के पूर्वी मिदनापुर जिले से ताल्लुक रखते हैं। 2007 के नंदीग्राम आंदोलन में उन्होंने ममता बनर्जी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ा। भूमि अधिग्रहण के खिलाफ यह आंदोलन टीएमसी के सत्ता में आने का प्रमुख आधार बना। 2011 के ऐतिहासिक 'परिवर्तन' में शुवेंदु अहम भूमिका निभाने वाले नेताओं में शामिल थे। वे परिवहन, सिंचाई और जल संसाधन जैसे महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री बने और पार्टी के ग्रामीण विस्तार के आर्किटेक्ट माने जाते थे।

2010 में आई दरार

रिश्तों में दरार 2010 के अंत में साफ दिखने लगी। ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के पार्टी में तेजी से उभरने से शुवेंदु को किनारे किया जा रहा था। शुवेंदु ने इसे 'वंशवाद' बताया, जिसके खिलाफ उन्होंने कभी वामपंथियों से लड़ाई लड़ी थी। नीतिगत मतभेद भी उभरे—खासकर तुष्टिकरण की राजनीति और भ्रष्टाचार के आरोपों पर। 2020 में शुवेंदु ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और दिसंबर में भाजपा जॉइन कर ली। ममता के लिए यह बड़ा झटका था। टीएमसी ने उन्हें 'गद्दार' करार दिया, जबकि शुवेंदु ने इसे 'बंगाल बचाओ' अभियान बताया।

2021 में नंदीग्राम की ऐतिहासिक लड़ाई

2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने शुवेंदु के गढ़ नंदीग्राम से टिकट लिया। शुवेंदु ने ममता को मात्र 1,956 वोटों से हराया। यह हार ममता के लिए व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों रूप से करारी थी। शुवेंदु 'जायंट किलर' के रूप में मशहूर हो गए। ममता बाद में भवानीपुर उपचुनाव से जीतकर मुख्यमंत्री बनीं, लेकिन नंदीग्राम का घाव गहरा था।

2026: भवानीपुर में दोहराई गई हार

2026 के चुनाव में शुवेंदु ने नंदीग्राम से फिर जीत हासिल की और भवानीपुर से ममता को चुनौती दी। अमित शाह समेत भाजपा नेताओं ने इसे 'ममता के घर में घुसकर हराने' का संकल्प बताया। नतीजे चौंकाने वाले रहे—शुवेंदु ने भवानीपुर में ममता को 15,000 से ज्यादा वोटों से हराया। भाजपा ने बहुमत हासिल कर टीएमसी के 15 साल के राज को खत्म कर दिया। शुवेंदु बंगाल में भाजपा के सबसे मजबूत चेहरे बने और शनिवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं।

भवानीपुर चुनाव नतीजा 2026: सुवेंदु ने ममता को दी शर्मनाक हार

क्र.सं.उम्मीदवारपार्टीEVM वोटपोस्टल वोटकुल वोटवोट %
1सुवेंदु अधिकारी भारतीय जनता पार्टी73,46345473,91753.02
2ममता बनर्जीऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस58,34946358,81242.19
3प्रदीप प्रसादइंडियन नेशनल कांग्रेस1,243141,2570.9
4श्रीजीब विश्वासकम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी)3,513433,5562.55
5अनुमिता शॉसोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्युनिस्ट)21722190.16
6मणिका मुखर्जीभारतीय न्याय-अधिकार रक्षा पार्टी703730.05
7मलय गुहा रॉयनिर्दलीय (Independent)671680.05
8मुमताज अलीनिर्दलीय (Independent)790790.06
9नारायण दासनिर्दलीय (Independent)831840.06
10सफर शेखनिर्दलीय (Independent)710710.05
11एसके सफी अहमदनिर्दलीय (Independent)14111420.1
12सुब्रत बोसनिर्दलीय (Independent)30513060.22
13नोटा (NOTA)इनमें से कोई नहीं817128290.59
कुल योग1,38,4189951,39,413

कहासुनी और आरोप-प्रत्यारोप

दोनों नेताओं के बीच कहासुनी बेहद तीखी रही। शुवेंदु ममता पर भ्रष्टाचार, परिवारवाद और तुष्टिकरण का आरोप लगाते रहे। उन्होंने नंदीग्राम आंदोलन के शहीदों को 'धोखा' देने का भी आरोप लगाया। ममता पक्ष ने शुवेंदु को 'विश्वासघाती' बताया और उनके परिवार पर विभिन्न आरोप लगाए। चुनावी रैलियों में दोनों ने एक-दूसरे पर तीखे हमले किए। शुवेंदु ने कहा कि टीएमसी में कोई विचारधारा नहीं बची, जबकि ममता ने उन्हें 'बाहरी ताकतों का खिलौना' करार दिया।

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Published on:
08 May 2026 05:48 pm
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