आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है, जब राघव चड्ढा समेत सात राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़कर बीजेपी का रुख कर लिया। इस घटनाक्रम ने दिल्ली की राजनीति में हलचल मचा दी है और पार्टी नेतृत्व व संगठन की मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) के लिए यह शायद अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका है। एक साथ सात राज्यसभा सांसदों का पार्टी छोड़कर बीजेपी में जाना न सिर्फ संगठन के लिए संकट है, बल्कि नेतृत्व पर भी बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
दिल्ली की राजनीति में अचानक बड़ा उलटफेर तब हुआ जब राघव चड्ढा समेत कई राज्यसभा सांसदों ने आम आदमी पार्टी से दूरी (AAP Split) बना ली। सभी नेता खुलकर बीजेपी के साथ आ गए।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia Meets Arvind Kejriwal) ने दिल्ली के पूर्व सीएम व आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल से उनके आवास पर मुलाकात की। माना जा रहा है कि अब केजरीवाल डैमेज कंट्रोल के लिए नई रणनीति बनाने में जुट गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच करीब आधे घंटे तक बातचीत हुई, जिसमें पार्टी की मौजूदा स्थिति और आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। यह बैठक ऐसे समय हुई जब पार्टी अंदरूनी संकट से जूझ रही है।
जिन नेताओं ने पाला बदला है, उनमें अशोक कुमार मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, रजिंद्र गुप्ता, विक्रमजीत सिंह साहनी और स्वाति मालीवाल शामिल हैं।
अब आम आदमी पार्टी ने भी सख्त कदम उठाने का फैसला किया है। पार्टी के राज्यसभा मुख्य सचेतक एडी गुप्ता जल्द ही राज्यसभा के सभापति को पत्र भेजेंगे। इस पत्र में उन सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी जो बीजेपी के साथ चले गए।
आम आदमी पार्टी का कहना है कि यह मामला सीधे तौर पर दलबदल कानून के दायरे में आता है। पार्टी नेता संजय सिंह ने भी संकेत दिए हैं कि संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत इन सांसदों की सदस्यता खत्म करने की मांग की जाएगी। यह कानून ऐसे मामलों में लागू होता है, जब कोई सांसद पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में शामिल हो जाता है।
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के भीतर मतभेद पिछले कई हफ्तों से बढ़ रहे थे। जब राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता पद से हटाया गया, तब यह विवाद खुलकर सामने आया। इसके बाद कुछ नेताओं ने उन पर बीजेपी के प्रति नरम रुख अपनाने का आरोप भी लगाया।