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मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से झटका, मल्लिकार्जुन खरगे ने बताया आगे का प्लान

Meenakshi Natarajan मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलने पर कांग्रेस हाई कोर्ट जाएगी। मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि कांग्रेस को कमजोर करने के लिए सुनियोजित साजिश रची जा रही है।

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Jun 12, 2026
Congress Rows
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे। (फोटो- IANS)

Meenakshi Natarajan: मीनाक्षी नटराजन मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बाद अब इस मामले को लेकर हाई कोर्ट का रुख किया जाएगा। कांग्रेस ने इसे एक विशेष मामला बताते हुए चिंता जताई गई है कि प्रक्रिया में जितना अधिक समय दिया जाएगा, मामले को उतना ही लंबा खींचा जाएगा। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम को कांग्रेस पार्टी को कमजोर करने और लोकतंत्र को कमजोर करने के लिए यह एक जानबूझकर की गई बड़ी साजिश बताई है।

पीएम मोदी पर लोकतंत्र खत्म करने का आरोप- खरगे

मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का तर्क है कि इस मामले में पहले चुनाव आयोग, फिर हाई कोर्ट और उसके बाद ही सुप्रीम कोर्ट का रुख किया जाना चाहिए। अदालत के इस निर्देश के बाद अब हाई कोर्ट में अपील की जाएगी, लेकिन इस अस्वीकृति को पूरी तरह से अवैध, अनैतिक और लोकतंत्र विरोधी माना गया है। खरगे ने बयान में कहा कि इतने बड़े निर्णय प्रधानमंत्री मोदी की मंजूरी या निर्देश के बिना नहीं होते। यह विपक्ष को परेशान करने, दबाने और कांग्रेस पार्टी को निशाना बनाने की एक सोची-समझी साजिश है।

मीनाक्षी नटराजन ने मिलीभगत का लगाया आरोप

सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपने नामांकन पत्र की अस्वीकृति को चुनौती दी थी। इस पर कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन ने कहा, 'मैं पहले दिन से कह रही हूं कि चुनाव आयोग में मिलीभगत है, और आज की अदालती कार्यवाही ने मेरे इस विश्वास को और पुख्ता कर दिया है। जब अदालत में मध्य प्रदेश राज्य के वकील पेश हुए, तो कई सवाल खड़े हो गए।

जानिए वकीलों ने कोर्ट में क्या कहा?

याचिकाकर्ता के वकीलों ने अदालत में यह भी तर्क दिया कि संविधान के अनुच्छेद 329(बी) के तहत चुनावी मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप पर जो रोक लगाई गई है, वह इस मामले में लागू नहीं होती। उनका कहना था कि याचिका का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को रोकना नहीं, बल्कि उसे निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरा कराना है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील से सहमत नहीं हुआ। अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद उसके संचालन में हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा। इसी आधार पर याचिका खारिज कर दी गई।

Updated on:
12 Jun 2026 05:48 pm
Published on:
12 Jun 2026 05:13 pm