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Meenakshi Natarajan SC Hearing: मैं आपको कुछ ऐसा दिखाता हूं कि आप हैरान रह जाएंगे- जज से बोले अभिषेक मनु सिंघवी

Meenakshi Natarajan: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने रिटर्निंग ऑफिसर (RO) के आदेश को मनमाना और कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण बताया। उन्होंने तर्क दिया कि केवल RO के लिख देने से तथ्य नहीं बदल जाते और जिस शिकायत का आधार बनाया गया...

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Jun 12, 2026
Congress Rajya Sabha Candidate Meenakshi Natarajan Nomination Rejected
मीनाक्षी नटराजन का राज्य सभा नामांकन हुआ रद्द (Photo-IANS)

Meenakshi Natarajan Nomination Cancelled: मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्य सभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी और विवेक तन्खा ने पक्ष रखा। वहीं चुनाव आयोग की तरफ से दामा शेषाद्री नायडू पेश हुए।

सिंघवी ने क्या दी दलील

सुनवाई के दौरान अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि वह कोर्ट को एक चौंकाने वाला पहलू दिखाना चाहते हैं। उन्होंने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 33A का हवाला देते हुए कहा कि इससे अदालत का विवेक झकझोर देने वाला तथ्य सामने आएगा।

सुनवाई के दौरान अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 223 में एक नया प्रावधान जोड़ा गया है, जिसमें कहा गया है कि मामले में संज्ञान लेने से पहले संभावित आरोपी को सुनवाई का अवसर दिया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस मामले में आरोप तय होने की शर्त महत्वपूर्ण है।

मामले में समन जारी किए जा चुके- जस्टिस मिश्रा

इस पर जस्टिस मिश्रा ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इस मामले में समन जारी किए जा चुके हैं। इसके जवाब में सिंघवी ने कहा कि केवल नोटिस जारी हुआ है, समन नहीं। जस्टिस ने कहा कि समन तभी जारी होते हैं जब अदालत प्रथम दृष्टया संतुष्ट होती है।

अभिषेक सिंघवी ने कहा कि कानून के अनुसार आरोप तय होना आवश्यक है। उन्होंने अदालत के समक्ष विभिन्न आदेश-पत्र पेश करते हुए कहा कि इनमें केवल तारीखों का उल्लेख है और कहीं भी उनके खिलाफ विधिवत संज्ञान लेने या आरोप तय करने का रिकॉर्ड नहीं है।

इस दौरान प्रतिद्वंद्वी पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी भी उपस्थित हुए। सिंघवी ने रिटर्निंग ऑफिसर (RO) के आदेश को बेहद विचित्र भी बताया। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में संज्ञान लिया गया होता, तो आरोप तय होने का स्पष्ट रिकॉर्ड होना चाहिए था। उन्होंने कहा कि शिकायत में उनका नाम तक प्रमुख रूप से नहीं है, फिर भी उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।

उन्होंने तर्क दिया कि यदि रिटर्निंग ऑफिसर मनमाने ढंग से कार्य करता है और केवल एक पक्ष को लाभ पहुंचाता है, तो न्यायालय को हस्तक्षेप करना चाहिए।

कोर्ट में अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि क्या रिटर्निंग अधिकारी के लिख देने मात्र से 2+2=6 हो जाएगा? कानून में चुनाव याचिका के निपटारे के लिए 6 महीने का प्रावधान है, लेकिन कई बार फैसला आने में 2-3 साल भी लग सकते हैं।

अंत में उन्होंने कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर के आदेश से पहले कानून की सही व्याख्या होनी चाहिए थी और यह आदेश कई गंभीर कानूनी सवाल खड़े करता है।

Updated on:
12 Jun 2026 12:50 pm
Published on:
12 Jun 2026 12:20 pm