TCS Controversy: नासिक के टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ऑफिस से जुड़े कथित धर्मांतरण मामले में SIT को नए डिजिटल सबूत मिले हैं, जिनसे जांच मालेगांव और मलेशिया तक पहुंचने के दावे हैं।
Nasik TCS Office Case: नासिक (महाराष्ट्र) में TCS ऑफिस से जुड़े कथित धर्मांतरण और धार्मिक भावनाएं आहत करने के मामले ने अब बड़ा और गंभीर रूप ले लिया है। इस हाई-प्रोफाइल केस में आरोपी नीदा खान की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान पीड़ित पक्ष ने अदालत को कई नए और अहम सबूत पेश किए हैं। जांच अब केवल नासिक तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसके तार मालेगांव और मलेशिया तक जुड़े होने के दावे सामने आए हैं।
स्पेशल पब्लिक प्रासीक्यूटर अजय मिश्रा ने नासिक अदालत को बताया कि विशेष जांच दल (SIT) को ऐसे डिजिटल और दस्तावेजी सबूत मिले हैं जो मामले की दिशा बदल सकते हैं। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि शिकायतकर्ता को कथित रूप से इस्लाम धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया गया, उसे नमाज़ पढ़ने की प्रक्रिया सिखाई गई, हिजाब और बुर्का पहनने की सलाह दी गई तथा धार्मिक किताबें और मोबाइल ऐप्स उपलब्ध कराए गए। इन सभी आरोपों की जांच एजेंसियां फिलहाल गंभीरता से जांच कर रही हैं।
अदालत में यह भी दावा किया गया कि शिकायतकर्ता का नाम बदलकर हानिया रखने की कथित योजना बनाई गई थी। इसके अलावा, पीड़ित पक्ष ने कहा कि मोबाइल फोन से धार्मिक सामग्री मिलने का दावा है, साथ ही इंस्टाग्राम रील्स और यूट्यूब लिंक का भी उल्लेख किया गया है, और इस्लामिक कंटेंट से जुड़े पोस्ट की जांच की जा रही है। इन सभी डिजिटल सबूतों को SIT की जांच का एक अहम हिस्सा बताया जा रहा है।
इस मामले में जांच का दायरा अब नासिक से आगे बढ़कर मालेगांव और मलेशिया तक पहुंच गया है। आरोपों के मुताबिक, सह-आरोपी दानिश शेख पर दस्तावेज अपने कब्जे में लेने का आरोप है और उन्हें मालेगांव भेजने की योजना होने का भी दावा किया गया है। साथ ही, एक व्यक्ति इमरान के जरिए नौकरी के बहाने मलेशिया भेजने की तैयारी का आरोप लगाया गया है। अब जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इस कथित नेटवर्क के पीछे कोई वित्तीय या संगठित व्यवस्था थी।
नीदा खान फिलहाल फरार हैं और उनका मोबाइल फोन जांच के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि उससे पूरे नेटवर्क और अन्य लोगों की भूमिका का पता चल सकता है। साथ ही, यह आशंका भी जताई गई कि अगर उन्हें जमानत मिलती है, तो गवाहों को प्रभावित किया जा सकता है।
नीदा खान की ओर से पेश वकील राहुल कसलीवाल ने सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए अदालत में कहा कि महाराष्ट्र में धर्मांतरण से जुड़ा कोई विशेष कानून लागू नहीं है, इसलिए यह मामला केवल धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोपों तक सीमित है। उन्होंने यह भी दलील दी कि एक ही मामले में कई FIR दर्ज करना कानूनी रूप से सही नहीं है।
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 2 मई को तय की है। फिलहाल SIT की जांच जारी है और नए साक्ष्यों की जांच की जा रही है।