
Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर से नया मोड़ आ गया है। टीएमसी से अलग होकर एनसीपीआई के रूप में मान्यता पाने की कोशिश कर रहे सांसदों के गुट में अंदरूनी मतभेद सामने आ रहे है। मंगलवार को एनडीए की मंगल मिलन बैठक हुई। इसमें टीएमसी के तीन बागी मुस्लिम सांसदों (यूसुफ पठान, अबू ताहिर खान, खलीलुर रहमान) ने भाग नहीं लिया। इससे पहले भी इन सांसदों ने एनडीए की बैठक का बहिष्कार किया था।
लोकसभा चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के 28 सांसदों ने जीत दर्ज की थी। वहीं विधानसभा चुनाव हारने के बाद पार्टी के अंदर अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई। पार्टी विधानसभा से लेकर संसद तक टूट गई।
28 में से 20 सांसदों ने बागी होकर एनसीपीआई में विलय कर लिया और सदन में एनडीए को समर्थन देने की बात कही। वहीं अब इस गुट को एंटी-डिफेक्शन कानून का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि तीन सांसद एनडीए में शामिल नहीं होना चाहते हैं।
बता दें कि अब बागी सांसदों के सामने सबसे बड़ी चुनौती एंटी-डिफेक्शन कानून से जुड़ी है। दरअसल, किसी अलग हुए गुट को दलबदल कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए मूल दल की कुल विधायी संख्या के कम से कम दो-तिहाई सांसदों का समर्थन जरूरी होता है।
TMC के मूल 28 लोकसभा सांसदों में से कम से कम 19 सांसदों का NCPI के साथ रहना जरूरी है। ऐसे में अगर तीनों सांसद NCPI से अलग होते हैं तो गुट की संख्या घटकर 17 रह जाएगी। इससे पूरे विभाजन की कानूनी स्थिति खतरे में पड़ सकती है और बागी सांसदों पर उपचुनाव का संकट भी मंडरा सकता है।
बहरामपुर से सांसद यूसुफ पठान, मुर्शिदाबाद से अबू ताहिर खान और जंगीपुर से खलीलुर रहमान ने मंगलवार को लगातार दूसरी बार NDA की बैठक में हिस्सा नहीं लिया। पिछले सप्ताह भी तीनों सांसद बैठक से दूर रहे थे।
इसको लेकर TMC नेता सौगत रॉय ने दावा किया था कि तीनों सांसद BJP की विचारधारा से सहज नहीं हैं और वे दोबारा ममता बनर्जी के खेमे में लौटना चाहते हैं।
मंगलवार को अबू ताहिर खान ने अपने रुख को लेकर किसी तरह की अस्पष्टता नहीं छोड़ी। उनके साथ खलीलुर रहमान भी मौजूद थे, जबकि सूत्रों के मुताबिक यूसुफ पठान भी दोनों सांसदों के रुख से सहमत हैं।
पत्रकारों से बातचीत में अबू ताहिर खान ने कहा था कि अभी हम NCPI में हैं, लेकिन न तो NDA में हैं और न ही BJP में। उन्होंने कहा कि हम किसी ऐसे कदम, नीति या विधेयक का समर्थन नहीं करेंगे जो मुसलमानों के हितों के खिलाफ हो। हम मुर्शिदाबाद से आते हैं और बंगाल के सबसे बड़े अल्पसंख्यक समुदाय के हितों की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है।
उनके इस बयान से साफ संकेत मिला कि मुस्लिम बहुल इलाकों में गठबंधन की राजनीतिक छवि को लेकर सांसदों के बीच चिंता है।
दरअसल, अबू ताहिर खान के बयान से NCPI के भीतर सब कुछ ठीक होने के दावों पर सवाल उठने लगे हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी वाली NDA बैठक में सुदीप बंद्योपाध्याय और बारासात की सांसद काकोली घोष दस्तीदार अग्रिम पंक्ति में नजर आए थे। बंद्योपाध्याय ने सोमवार शाम प्रधानमंत्री मोदी से भी मुलाकात की थी।
वहीं बीरभूम की सांसद शताब्दी रॉय और हुगली की सांसद रचना बनर्जी ने NCPI में सब कुछ ठीक होने का दावा किया, लेकिन जब उनसे तीनों मुस्लिम सांसदों के रुख को लेकर सवाल पूछा गया तो वे स्पष्ट जवाब नहीं दे सकीं।
TMC विधायक कुणाल घोष ने लगातार दावा किया कि NCPI के तीन नहीं, बल्कि छह सांसद ममता बनर्जी के खेमे के संपर्क में हैं। उनके मुताबिक ये सांसद दोबारा TMC में लौटने की संभावनाएं तलाश रहे हैं।