
पटना। बिहार के मोकामा से विधायक अनंत सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। SC ने दुलारचंद यादव हत्याकांड में पटना हाईकोर्ट से मिली उनकी जमानत रद्द कर दी है। साथ ही अनंत सिंह को 1 दिसंबर तक संबंधित अधिकारियों के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया है। इस फैसले पर नवनिर्वाचित जदयू एमएलसी नीरज कुमार ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह अनंत सिंह का निजी मामला है। उन्होंने कहा कि उन्हें इससे खुद निपटना है। यह उनका अपना मामला है। मैं ऐसे लोगों पर कोई ध्यान नहीं देता।
मोकामा टाल इलाके में 30 अक्टूबर 2025 को चुनाव प्रचार के दौरान दुलारचंद यादव की हत्या कर दी गई थी। उस दौरान दुलारचंद यादव जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी का समर्थन कर रहे थे। इसी दौरान उनके समर्थकों और अनंत सिंह के काफिले के बीच टकराव हुआ था।
घोसवरी थाने में दर्ज एफआईआर के अनुसार, अनंत सिंह और उनके सहयोगियों ने कथित तौर पर दुलारचंद यादव को गाड़ी से बाहर खींचा, उनके पैर में गोली मारी, मारपीट की और फिर एसयूवी से कुचल दिया। हालांकि, अनंत सिंह ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताते हुए दावा किया था कि पहले जन सुराज के समर्थकों ने उनके काफिले पर हमला किया था।
बिहार पुलिस ने 1 नवंबर 2025 को अनंत सिंह को गिरफ्तार कर बेऊर सेंट्रल जेल भेज दिया था। जेल में रहते हुए भी उन्होंने जदयू के टिकट पर मोकामा विधानसभा सीट से चुनाव जीता। इसके बाद पटना हाईकोर्ट ने 19 मार्च 2026 को उन्हें जमानत दे दी थी। इस आदेश को मृतक दुलारचंद यादव के पोते और जदयू नेता नीरज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
हाल ही में जदयू ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था। अनंत सिंह ने पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव में जदयू के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के बजाय जन सुराज के प्रत्याशी अनुज कुमार सिंह के समर्थन में प्रचार किया था। इस दौरान उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर भी सवाल उठाए थे।
पार्टी से निष्कासन के बाद बिहार सरकार ने नीलम देवी को राज्यस्तरीय कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति में मिले पद और राज्य मंत्री का दर्जा भी वापस ले लिया। इसके साथ ही उन्हें पटना के 1, मॉल रोड स्थित सरकारी बंगले को खाली करने का नोटिस जारी किया गया। भवन निर्माण विभाग ने 26 अक्टूबर 2026 को यह नोटिस जारी किया था।