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Paper Leak पर राहुल गांधी का बड़ा बयान, पूछा- बार-बार क्यों हो रहा है छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ ?

Rahul Gandhi : नीट पेपर लीक मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और पीएम मोदी पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने बार-बार होने वाले पेपर लीक पर गंभीर सवाल उठाते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने की मांग की है।

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May 17, 2026
Rahul Gandhi(Image-ANI)

NTA : नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की ओर से आयोजित नीट परीक्षा को लेकर देश भर में भारी आक्रोश है। नीट परीक्षा में लगातार हो रही गड़बड़ी और पेपर लीक मामले में अब विपक्ष के नेता राहुल गांधी का बड़ा बयान सामने आया है। राहुल गांधी ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए पूछा है कि देश में बार-बार पेपर लीक क्यों हो रहे हैं और देश के लाखों होनहार छात्रों के भविष्य के साथ यह खिलवाड़ कब रुकेगा? उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले पर कड़ा एक्शन लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत उनके पद से बर्खास्त करने की मांग की है।

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पूरे देश में सरकार के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग

इस गंभीर मुद्दे पर आम जनता और छात्रों का गुस्सा भी फूट पड़ा है। लोगों का कहना है कि जब यूपीएससी जैसी संस्थाएं बिना किसी गड़बड़ी के हर साल देश की सबसे बड़ी परीक्षाएं सफलतापूर्वक आयोजित करा सकती हैं, तो फिर एनटीए का पेपर ही बार-बार क्यों लीक हो जाता है ? बार-बार रद्द होने वाली परीक्षाओं से छात्रों की सालों की मेहनत और मानसिक स्थिति पर गहरा असर पड़ रहा है, जिसे लेकर अब पूरे देश में सरकार के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की जा रही है।

लगातार धांधली से नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की विश्वसनीयता खत्म

सत्र 2026 की नीट-यूजी परीक्षा के बाद देश के शैक्षणिक इतिहास पर एक बार फिर गहरा दाग लगा है। एनटीए, जिसे देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा को निष्पक्ष तरीके से कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, आज खुद कटघरे में खड़ी है। बिहार, उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों से पेपर लीक के जो पुख्ता सबूत सामने आ रहे हैं, उसने एजेंसी की कार्यप्रणाली की पोल खोल कर रख दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा तंत्र के भीतर सक्रिय एक बड़ा माफिया गिरोह हर बार सुरक्षा घेरे को तोड़ने में कामयाब हो रहा है। ऐसे में यह सवाल लाजिमी हो जाता है कि जब तक शीर्ष स्तर पर बैठे अधिकारी और इस परीक्षा को संचालित करने वाले नीति-निर्देशक पूरी तरह जवाबदेह नहीं ठहराए जाएंगे, तब तक इस पारदर्शी व्यवस्था की उम्मीद करना बेमानी होगा।

विपक्ष का आर-पार का रुख, संसद से सड़क तक बड़े आंदोलन की चेतावनी

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के इस कड़े रुख के बाद पूरे विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने साफ कर दिया है कि वे इस संवेदनशील विषय को ठंडे बस्ते में नहीं जाने देंगे। आगामी संसदीय सत्र में इस मुद्दे को पूरी ताकत से उठाने की रणनीति तैयार की जा रही है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नई कैबिनेट से सीधे तौर पर जवाब मांगा जाएगा। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं है, बल्कि यह करोड़ों युवाओं के सपनों की सरेआम हत्या है। यदि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत पद से बर्खास्त नहीं किया गया और पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो देशव्यापी स्तर पर सड़क से लेकर संसद तक एक बड़ा छात्र आंदोलन खड़ा किया जाएगा।

छात्रों में गहरा डिप्रेशन और मानसिक तनाव, व्यवस्था से उठ रहा भरोसा

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे डरावना और दुखद पहलू देश के युवाओं की मानसिक स्थिति पर पड़ रहा विपरीत असर है। कोटा से लेकर दिल्ली और पटना तक, लाखों छात्र दिन-रात एक करके, अपने परिवार की गाढ़ी कमाई को कोचिंग संस्थानों में झोंककर इस परीक्षा की तैयारी करते हैं। लेकिन जब परीक्षा के ठीक बाद या परिणाम आने के दौरान पेपर लीक की खबरें आती हैं, तो इन होनहारों का हौसला पूरी तरह टूट जाता है। लगातार परीक्षाओं के रद्द होने और दोबारा परीक्षा के आयोजन की अनिश्चितता ने छात्रों को गहरे डिप्रेशन और मानसिक तनाव में धकेल दिया है। अभिभावकों का कहना है कि परीक्षा प्रणाली की इस सड़ांध के कारण अब बच्चों का देश की पूरी शिक्षा और रोजगार व्यवस्था से भरोसा उठता जा रहा है, जो कि किसी भी लोकतांत्रिक देश के भविष्य के लिए बेहद खतरनाक संकेत है।

यूपीएससी मॉडल अपनाने और सख्त कानून लागू करने की जरूरत

अब समय आ गया है कि सरकार केवल बयानों और जांच कमेटियों के गठन से आगे बढ़कर कोई ठोस और ऐतिहासिक कदम उठाए। देश की आम जनता और शिक्षाविदों की यह मांग अब तेज हो गई है कि एनटीए के पूरे ढांचे को भंग कर परीक्षा आयोजन के लिए संघ लोक सेवा आयोग जैसी सख्त, गोपनीय और अभेद्य व्यवस्था का मॉडल अपनाया जाए। इसके साथ ही, संसद द्वारा पास किए गए एंटी-पेपर लीक कानून के तहत पकड़े गए दोषियों, कोचिंग माफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाकर उन्हें उम्रकैद और करोड़ों रुपये के जुर्माने जैसी सख्त से सख्त सजा दी जानी चाहिए। जब तक इस देश में पेपर लीक करने वालों के मन में कानून का खौफ नहीं बैठेगा, तब तक ईमानदारी से पढ़ने वाले छात्रों को उनका हक कभी नहीं मिल पाएगा।


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