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NEET पेपर लीक का नासिक कनेक्शन: पहली डिजिटल कॉपी वहीं बनी, मोबाइल नहीं पोर्टेबल स्कैनर से हुआ खेल

NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में नासिक कनेक्शन सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ कि पहली डिजिटल कॉपी पोर्टेबल स्कैनर से तैयार की गई और सीकर से पूरे नेटवर्क को ऑपरेट किया गया।
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May 13, 2026
NEET Paper Leak Nashik Connection
NEET Paper Leak Nashik Connection (AI Image)

NEET Paper Leak Nashik Connection: देशभर में चर्चा का विषय बने नीट यूजी NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में जांच एजेंसियों को अब बड़े और चौंकाने वाले सुराग मिले हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस पूरे रैकेट की शुरुआत महाराष्ट्र के नासिक से हुई, जहां सबसे पहले मेडिकल प्रवेश परीक्षा के प्रश्नपत्र की डिजिटल कॉपी तैयार की गई। इसके बाद राजस्थान के सीकर से इस नेटवर्क को बड़े स्तर पर ऑपरेट किया गया। जांच में यह भी पता चला है कि पेपर लीक करने के लिए हाईटेक तकनीक का इस्तेमाल किया गया, ताकि किसी को शक न हो।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपियों ने मोबाइल कैमरे का इस्तेमाल नहीं किया क्योंकि उससे पकड़े जाने का खतरा ज्यादा था। इसके बजाय हाई-डेफिनिशन पोर्टेबल स्कैनर का इस्तेमाल किया गया। स्कैन की गई कॉपी को टेलीग्राम और व्हाट्सऐप जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए अलग-अलग राज्यों में भेजा गया।

नासिक से शुरू हुआ पूरा नेटवर्क

सूत्रों के अनुसार, NEET प्रश्नपत्र की पहली डिजिटल कॉपी नासिक में तैयार की गई थी। इसके बाद स्थानीय प्रिंटिंग प्रेस में उसकी कॉपी निकाली गई। वहां से पेपर हरियाणा के गुरुग्राम पहुंचा और फिर जयपुर होते हुए राजस्थान के सीकर तक ले जाया गया।

सीकर को इस पूरे नेटवर्क का मुख्य केंद्र माना जा रहा है। जांच एजेंसियों का कहना है कि यहीं से लीक हुए प्रश्नपत्र जम्मू-कश्मीर, बिहार और केरल जैसे राज्यों तक पहुंचाए गए।

प्राइवेट माफिया नाम के नेटवर्क की जांच

जांच में एक टेलीग्राम नेटवर्क का भी पता चला है, जिसका नाम प्राइवेट माफिया बताया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक इस ग्रुप में करीब 400 सदस्य जुड़े हुए थे और इसका इस्तेमाल कथित तौर पर लीक हुए पेपर शेयर करने के लिए किया जाता था।

एजेंसियां अब इस नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान करने में जुटी हैं। इसके अलावा नासिक में एक शैडो सर्वर के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि यह सर्वर एक छोटे आईटी स्टार्टअप की लीज्ड लाइन पर चल रहा था जिसका इस्तेमाल डेटा ट्रांसफर छिपाने के लिए किया गया।

जांच एजेंसियों को शक है कि एक निजी कूरियर कंपनी के कर्मचारी ने भी इस पूरे खेल में मदद की हो सकती है। आशंका है कि प्रश्नपत्र रखने वाले ट्रंक्स तक करीब 30 मिनट के लिए पहुंच दिलाई गई, जिसके दौरान पेपर की कॉपी तैयार की गई।

गेस पेपर के नाम पर बांटे गए असली सवाल

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि लीक हुए प्रश्नपत्रों को गेस पेपर के नाम पर छात्रों तक पहुंचाया गया। सूत्रों के अनुसार, राजस्थान के सीकर स्थित कुछ कोचिंग संस्थानों की भूमिका भी जांच के घेरे में है।

बताया जा रहा है कि कुछ चुनिंदा छात्रों को इन्हीं गेस पेपर के जरिए NEET की तैयारी कराई गई थी। कुछ छात्रों को प्रश्नपत्र की PDF कॉपी दी गई जबकि कुछ को इसकी प्रिंट कॉपी उपलब्ध कराई गई।

जांच एजेंसियों ने पाया कि NEET बायोलॉजी पेपर के सभी 90 सवाल गेस पेपर से मेल खाते थे। वहीं केमिस्ट्री के 46 में से 35 सवाल भी लगभग पूरी तरह समान पाए गए। कई सवालों में भाषा और विराम चिह्न तक एक जैसे थे।

राजस्थान और नासिक से गिरफ्तारियां

राजस्थान की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) अब तक इस मामले में 15 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें मनीष यादव और राकेश मंडवारिया के नाम शामिल हैं। राकेश मंडवारिया के सीकर के एक कंसल्टेंसी सेंटर से जुड़े होने की आशंका है।

वहीं नासिक क्राइम ब्रांच ने शुभम खैरनार नाम के एक BAMS छात्र को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे।

CBI ने संभाली जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान SOG ने जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है। गिरफ्तार किए गए सभी 15 आरोपियों को अब CBI के हवाले किया जाएगा।

गौरतलब है कि 3 मई को आयोजित NEET-UG 2026 परीक्षा को अनियमितताओं की शिकायतों के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने रद्द कर दिया था। अब यह परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी।

Updated on:
13 May 2026 12:35 am
Published on:
13 May 2026 12:35 am
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