नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने पंडित नेहरू पर आरोप लगाया कि उन्होंने जानबूझकर 23 जनवरी को गणतंत्र दिवस रिहर्सल रखकर नेताजी का जन्मदिन संसद में धूमधाम से मनाने से रोका। वहीं, ममता बनर्जी ने नेताजी को भावुक श्रद्धांजलि देते हुए उनके धर्मनिरपेक्ष विचारों और आज़ाद हिंद फ़ौज को याद किया...
Netaji Subhas Chandra Bose Jayanti: हर साल 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती मनाई जाती है। बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने नेताजी की जयंती पर पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू पर निशाना साधा है। उन्होंने पंडित नेहरू पर सुभाष चंद्र बोस की जयंती को संसद में धूमधाम से मनाने में रुकावट डालने का आरोप लगाया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए बीजेपी नेता ने लिखा- पंडित नेहरू ने प्रधानमंत्री के तौर पर जानबूझकर 26 जनवरी के रिपब्लिक डे के लिए 23 जनवरी को रिहर्सल डे तय किया था। 23 जनवरी नेताजी सुभाष चंद्र के जन्मदिन से टकराता है।
उन्होंने आगे लिखा, 'यह टकराव नेहरू की जलन की वजह से हुआ, जिसने इस तरह पार्लियामेंट में नेताजी का जन्मदिन धूमधाम से मनाने में रुकावट डाली। मोदी को इसे ठीक करके 22 या 24 जनवरी को रिहर्सल रिपब्लिक डे बना देना चाहिए था। लेकिन मोदी ने ऐसा नहीं किया। क्यों? डर से?'
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती पर बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने भावुक पोस्ट शेयर किया है। एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा, 'देशभक्त नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर, मैं उन्हें दिल से नमन और श्रद्धांजलि देती हूं।'
सीएम ममता बनर्जी ने लिखा- यह हम सभी के लिए दुख की बात है कि नेताजी के गायब होने का रहस्य आज तक सुलझ नहीं पाया है। हमें नहीं पता कि 1945 के बाद उनके साथ क्या हुआ। यह सभी के लिए बहुत दुख की बात है, लेकिन हमने बहुत पहले ही सभी सरकारी फाइलें पब्लिक कर दी हैं। मैं फिर से भारत सरकार से नेताजी से जुड़ी सभी जानकारी को डीक्लासिफाई करने की अपील करूंगा।
बता दें कि 23 जनवरी को कर्तव्य पथ (Kartavya Path) पर गणतंत्र दिवस की फाइनल रिहर्सल इसलिए की जाती है क्योंकि यह दिन नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती होता है, जिसे भारत सरकार ने “पराक्रम दिवस” के रूप में घोषित किया है। इस दिन फाइनल रिहर्सल करके सरकार नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आजादी के आंदोलन में उनके साहस व पराक्रम को सम्मान देती है।