Lok Sabha Seat increase: विधेयक के पारित होने के बाद देश में लोकसभा और विधानसभा की सीटें आनुपातिक आधार पर बढ़ेंगी। सरकार के सूत्रों का कहना है कि इस बढ़ोतरी से राज्यों की वर्तमान सीटों का अनुपात नहीं बदलेगा।
Women Reservation Bill: 2029 के लोकसभा चुनाव में 33 फीसदी आरक्षण के लिए संसद में लाए जा रहे संविधान संशोधन विधेयक को लेकर सियासत में नई दरार पैदा हो गई है। विपक्ष ने इस महिला आरक्षण को लागू करने के लिए परिसीमन की शर्त से जोड़ने का कड़ा विरोध किया है। विपक्ष ने साफ कर दिया है कि संसद में वो महिला आरक्षण का समर्थन करेंगे, लेकिन परिसीमन के चलते इस संविधान संशोधन का विरोध करेंगे। वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि इस मुद्दे पर विपक्ष गुमराह कर रहा है।
दरअसल, संसद में गुरुवार से तीन दिवसीय विशेष सत्र शुरू होने जा रहा है। इससे पहले सरकार और विपक्ष ने सत्र में एक दूसरे को पटखनी देने के लिए रणनीति बनाई। 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम को जल्द लागू करने के लिए सरकार फिर से संविधान संशोधन करने जा रही है।
सूत्रों ने बताया कि प्रस्तावित संशोधन में लोकसभा में राज्यों की सीटें आनुपातिक आधार पर बढ़ाई जाएगी।
कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी, सपा समेत कई अन्य दल इसका विरोध कर रहे हैं। विपक्ष का दावा है कि सीटें इस तरह से बढ़ाई जा रही है, जिससे हिंदी पट्टी के राज्यों का वर्चस्व बन जाएगा।
संसद में इस संविधान संशोधन विधेयक को लेकर हंगामे के आसार है। इंडिया ब्लॉक की बैठक में करीब 21 विपक्षी दल शामिल हुए। सभी ने विधेयक के विरोध का निर्णय किया है। बैठक में साफ कहा गया कि महिला आरक्षण को लेकर सभी दलों ने 2023 में सरकार को खुले मन से समर्थन दिया था, लेकिन अब सरकार की मंशा सिर्फ चुनावी राजनीति करने की है। यही वजह है कि महिला आरक्षण में सीटों का परिसीमन जोड़ा गया है। इसका संसद में विरोध किया जाएगा।
विधेयक के पारित होने के बाद देश में लोकसभा और विधानसभा की सीटें आनुपातिक आधार पर बढ़ेंगी। सरकार के सूत्रों का कहना है कि इस बढ़ोतरी से राज्यों की वर्तमान सीटों का अनुपात नहीं बदलेगा। संविधान संशोधन के तहत अनुच्छेद 55, 81, 82, 170, 330, 332, 334-ए को एक साथ देखे जाने पर तस्वीर स्पष्ट होती है। सीटों की वास्तविक संख्या शेड्यूल में सामने आएगी पर राज्यों का वर्तमान अनुपात बना रहेगा।
सूत्रों के अनुसार 2011 की जनसंख्या के आधार पर प्रत्येक राज्य के अंदर प्रत्येक सीट की सीमा तय की जाएगी। लोकसभा सीट का आकार 2011 की जनसंख्या से तय होगा। इससे उस राज्य की लोकसभा में कुल सीटों की संख्या का निर्धारण नहीं होगा। यह निर्धारण आनुपातिक रूप से होगा। विपक्षी दलों को यह फार्मूला पहले ही बताया भी गया है।
महिला आरक्षण का मुद्दा आगामी चुनावों में लागू करने के लिए यह संशोधन लाया जाना आवश्यक है, क्योंकि जनगणना में जातीय जनगणना जुड़ने से उसके पूरा होने में देरी होने की आशंका बन गई है। इसके आंकड़ों को सामने आने में डेढ़ से दो साल और उसके बाद परिसीमन में और डेढ़ से दो साल का समय चाहिए। ऐसे में इसके लिए चार साल का समय चाहिए। ऐसे में महिला आरक्षण को तत्काल लागू करने के लिए पिछली जनसंख्या को ही राज्यों में परिसीमन से क्षेत्रों की सीमा तय करने का आधार बनाया जा रहा है।
महिला आरक्षण विधेयक को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस महिला आरक्षण का बिना किसी शर्त के समर्थन करती है। संसद ने 2023 में इस विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किया था। सरकार अब जो प्रस्ताव ला रही है, उसका महिला आरक्षण से संबंध नहीं है। यह संशोधन परिसीमन और निर्वाचन क्षेत्रों की हेरफेर के जरिए सत्ता हासिल करने की कोशिश है। हम ओबीसी, दलित और आदिवासी समुदायों की किसी हालत में हिस्सा चोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हम दक्षिण, उत्तर-पूर्व, उत्तर-पश्चिम और छोटे राज्यों के साथ भी किसी कीमत पर अन्याय नहीं होने देंगे।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने एक अन्य एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा- भाजपा की खतरनाक योजनाओं में से एक यह है कि वह 2029 के चुनावों के लिए सभी लोकसभा सीटों का गैरिमैंडरिंग (अपने फायदे के हिसाब से सीमांकन) करना चाहती है।
प्रस्तावित विधेयक संविधान में मौजूद सीमांकन (Delimitation) से जुड़े सभी सुरक्षा प्रावधानों को हटा देते हैं और पूरी शक्ति सीमांकन आयोग को दे देते हैं, जिसे सरकार खुद नियुक्त और नियंत्रित करेगी।
हम पहले देख चुके हैं कि भाजपा ऐसा कैसे करती है-असम और जम्मू-कश्मीर में सीमांकन प्रक्रिया को अपने पक्ष में मोड़ा गया, जहां भाजपा विरोधी क्षेत्रों और समुदायों को चुनावी लाभ के लिए तोड़ा गया। इसके परिणामस्वरूप:
कुछ सीटों को बिना किसी भौगोलिक या सामाजिक जुड़ाव के टुकड़ों में बांट दिया गया है, कभी-कभी नदियों या पहाड़ों द्वारा अलग किया गया है।
चुनाव आयोग पर नियंत्रण पाने के बाद, प्रधानमंत्री मोदी को भरोसा है कि वह सीमांकन आयोग को भी अपने नियंत्रण में ले सकते हैं। कांग्रेस ऐसा होने नहीं देगी।
सीमांकन एक पारदर्शी नीति ढांचे के आधार पर होना चाहिए, जिसे व्यापक विचार-विमर्श और सहमति के बाद तैयार किया जाए। देश के सभी समुदायों और राज्यों के लोगों को यह भरोसा होना चाहिए कि उनका प्रतिनिधित्व होगा और उनकी आवाज सुनी जाएगी।
यही एकमात्र रास्ता है जिससे हमारे लोकतंत्र की रक्षा और मजबूती सुनिश्चित की जा सकती है।
पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में आगामी दिनों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले संसद में महिला आरक्षण विधेयक लाने पर विपक्ष ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है। विपक्षी दलों ने इसे महिला मतदाताओं को लुभाने की कोशिश भी बताया है। साथ ही कहा कि ये तुष्टिकरण की राजनीति है।
बता दें कि परिसीमन जनसंख्या के आधार पर लोकसभा सीटों की सीमा तय करने की प्रक्रिया है। दक्षिण के राज्यों (तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र, तेलंगाना) ने परिवार नियोजन में बेहतर प्रदर्शन किया, जिससे उनकी जनसंख्या वृद्धि कम रही। 2026 के प्रस्तावित परिसीमन (2011 जनगणना आधारित) से उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे उत्तरी राज्यों की सीटें तेजी से बढ़ेंगी, जबकि दक्षिण की सापेक्ष हिस्सेदारी घट सकती है।
इससे संसद में दक्षिण की राजनीतिक ताकत कमजोर होगी, केंद्र की योजनाओं और फंड आवंटन पर प्रभाव पड़ेगा। दक्षिण इसे जनसांख्यिकीय दंड मानता है।
तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर दक्षिण राज्यों की संसद में सीटों की संख्या कम होती हो तो वे सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।