Operation Sindoor पर एक साल बाद बड़ा खुलासा, Rajnath Singh बोले भारत ने खुद रोका अभियान, कोई मजबूरी नहीं थी, जरूरत पड़ती तो देश लंबी जंग के लिए तैयार था।
करीब एक साल बाद देश की सुरक्षा नीति पर बड़ा बयान सामने आया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने साफ कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) को भारत ने किसी मजबूरी में नहीं, बल्कि अपने फैसले पर रोका था। उनका कहना है कि जरूरत पड़ती तो भारत लंबी लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार था।
नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की ताकत कम नहीं हुई थी। उन्होंने 'सर्ज कैपेसिटी' का जिक्र करते हुए बताया कि अचानक जरूरत पड़ने पर सैन्य क्षमता बढ़ाने की पूरी ताकत भारत के पास थी और आज भी है, बल्कि पहले से ज्यादा मजबूत है। उनके मुताबिक, अगर हालात बिगड़ते तो सेना लंबे समय तक के लिए पूरी तरह तैयार रहती। ऑपरेशन को रोकना एक रणनीतिक फैसला था, न कि कोई दबाव।
रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर को भारतीय सेना की एकजुट ताकत का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि थल सेना, नौसेना और वायुसेना ने एक साथ मिलकर काम किया। यह पहली बार था जब इतनी साफ तरीके से तीनों सेनाओं ने एक ही रणनीति के तहत कार्रवाई की। इससे यह संदेश गया कि भारत अब अलग-अलग नहीं, बल्कि एक संयुक्त और आधुनिक सैन्य शक्ति के रूप में काम करता है।
ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 7 मई को हुई थी। यह कार्रवाई पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में की गई थी, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी। रक्षा मंत्री ने कहा कि इस ऑपरेशन में सिर्फ उन्हीं ठिकानों को निशाना बनाया गया जो हमले के लिए जिम्मेदार थे। उन्होंने दोहराया कि कार्रवाई पूरी तरह सटीक और योजनाबद्ध थी।
पाकिस्तान को लेकर भी रक्षा मंत्री ने सख्त रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि भारत ने किसी भी तरह की परमाणु धमकी को गंभीरता से नहीं लिया। उनका कहना था कि भारत ने संयम के साथ, लेकिन मजबूती से जवाब दिया और किसी दबाव में नहीं आया। उन्होंने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का केंद्र बताते हुए कहा कि आतंकवाद को जड़ से खत्म करना जरूरी है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि दुनिया में शांति बनाए रखने के लिए ताकत का होना जरूरी है। उन्होंने 'भय बिन होय ना प्रीत' का जिक्र करते हुए कहा कि मजबूत सैन्य शक्ति ही स्थिरता की गारंटी देती है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता लगातार बढ़ रही है और अब कई देश भारतीय हथियारों में रुचि दिखा रहे हैं।