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Petrol Price Difference: हर शहर में अलग क्यों है पेट्रोल-डीजल की कीमत? कहीं सस्ता तो कहीं महंगा, जानें पीछे का कारण

Petrol Price Hike: देश के अलग-अलग राज्यों में पेट्रोल-डीजल के दाम अलग क्यों हैं और कहीं फ्यूल सस्ता तो कहीं महंगा क्यों मिलता है? जानिए टैक्स, VAT और कच्चे तेल की कीमतों का पूरा गणित।

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प्रतीकात्मक तस्वीर

Petrol Price Difference: देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। शुक्रवार सुबह केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दाम में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की, जिसके बाद अलग-अलग शहरों के रेट में बड़ा फर्क साफ नजर आने लगा। दिल्ली में पेट्रोल 97.77 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है, जबकि कोलकाता में इसकी कीमत 108.74 रुपये तक पहुंच गई है। मुंबई में पेट्रोल 106.68 रुपये और चेन्नई में 103.67 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। ऐसे में फिर यही सवाल उठ रहा है कि आखिर एक ही देश में पेट्रोल-डीजल के दाम शहर बदलते ही इतने अलग क्यों हो जाते हैं।

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कीमतों में अंतर होने के पीछे का कारण

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमत सिर्फ कच्चे तेल की कीमत से तय नहीं होती। इसमें तेल की असली कीमत, उसे एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का खर्च, पेट्रोल पंप डीलर का कमीशन और केंद्र सरकार द्वारा लगाया गया एक्साइज टैक्स भी शामिल होता है। इसके बाद हर राज्य अपनी तरफ से वैट और दूसरे टैक्स लगाता है। इसी वजह से अलग-अलग राज्यों में पेट्रोल और डीजल के दाम बदल जाते हैं।

दिल्ली में पेट्रोल-डीजल सस्ता

दिल्ली में फ्यूल पर टैक्स बाकी कई राज्यों के मुकाबले कम है, इसलिए यहां पेट्रोल सस्ता मिलता है। वहीं महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में ज्यादा टैक्स और सेस लगाया जाता है। इसी कारण मुंबई और कोलकाता में लोगों को पेट्रोल के लिए करीब 10 रुपये ज्यादा चुकाने पड़ते हैं। तमिलनाडु में टैक्स लगाने का तरीका अलग है, इसलिए चेन्नई में पेट्रोल की कीमत दिल्ली से ज्यादा लेकिन मुंबई से कम रहती है।

आपको बता दें कि पेट्रोल और डीजल अभी भी जीएसटी सिस्टम के दायरे में शामिल नहीं हैं। इस वजह से राज्यों को इन पर अलग-अलग टैक्स लगाने की पूरी छूट है।

क्या ट्रांसपोर्ट खर्च भी बढ़ाता है कीमत?

रिफाइनरी से पेट्रोल पंप तक तेल पहुंचाने में ट्रांसपोर्ट और ढुलाई का खर्च भी लगता है, लेकिन कीमत बढ़ने की सबसे बड़ी वजह यह नहीं होती। अगर सिर्फ दूरी के हिसाब से दाम तय होते, तो सबसे दूर वाले इलाकों में हमेशा पेट्रोल सबसे महंगा मिलता। लेकिन कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि छोटे या दूरदराज शहरों में भी पेट्रोल बड़े शहरों से सस्ता बिक रहा होता है। इससे साफ होता है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में सबसे बड़ा असर राज्यों के टैक्स और अलग-अलग स्थानीय शुल्कों का होता है।

वैश्विक तनाव का भी पड़ रहा असर

पश्चिम एशिया में माहौल तनावभरा बना हुआ है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे तनाव की वजह से दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। ब्रेंट क्रूड करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल दूसरे देशों से खरीदता है, इसलिए बाहर के बाजार में तेल महंगा होते ही इसका असर सीधे हमारे यहां पेट्रोल और डीजल के दामों पर दिखाई देने लगता है।

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