
20 जुलाई से संसद का मॉनसून सत्र शुरू हो रहा है। इस दौरान मोदी सरकार और विपक्ष के बीच जोरदार बहस होने वाली है। सबसे बड़ा मुद्दा है वो विवादित बिल जो कहता है कि अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई मंत्री 30 दिन तक जेल में रहे तो वो अपने पद से अपने आप हट जाएंगे।
इसके अलावा, इस सत्र के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पर संसद में झूठ बोलने का आरोप भी विपक्ष जोर-शोर से उठाने वाला है। ये दोनों मुद्दे मिलकर इस सत्र को काफी गरमाने वाले हैं।
सरकार ने शनिवार को ऐलान कर दिया कि संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होगा और 13 अगस्त तक चलेगा। संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दोनों सदनों को बुलाने की मंजूरी दे दी है।
PM-CM हटाओ बिल को लेकर केंद्र सरकार का कहना है कि इससे नेता जवाबदेह बनेंगे। ऊंचे पद पर बैठे लोगों को जवाबदेही बढ़ानी जरूरी है। लेकिन विपक्ष इसे संविधान की आत्मा पर हमला बता रहा है। उनका तर्क है कि ये बिना दोष साबित हुए निर्दोष के सिद्धांत को खत्म कर देगा।
विपक्ष को इस बात का भी डर है कि सत्ताधारी दल राजनीतिक बदले की भावना से झूठे केस करके विपक्षी नेताओं को जेल भेजकर सरकारें गिरा सकते हैं। कई विपक्षी नेता कह रहे हैं कि इसके दुरुपयोग का खतरा बहुत ज्यादा है।
विपक्ष को डर है कि कोई सरकार विपक्षी सीएम को फंसाने के लिए केस चला दे, तो 30 दिन बाद वो खुद-ब-खुद हट जाएगा। ये लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। जबकि सरकार का पक्ष है कि सिर्फ गंभीर अपराधों में ये लागू होगा और कुछ सुरक्षा उपाय भी रखे जाएंगे ताकि राजनीतिक दुरुपयोग न हो।
ये बिल पिछले साल पेश किया गया था। अब जेपीसी रिपोर्ट के बाद इसे सदन में लाया जाएगा। लेकिन इसे पास करने के लिए सिर्फ सामान्य बहुमत नहीं, खास बहुमत चाहिए।
संविधान बदलने के लिए लोकसभा और राज्यसभा दोनों में अलग-अलग खास बहुमत जरूरी है। हर सदन के कुल सदस्यों का बहुमत और मौजूद-मतदान करने वालों में दो-तिहाई बहुमत।
इसके अलावा आधे से ज्यादा राज्यों की विधानसभाओं की मंजूरी भी चाहिए। एनडीए के पास अभी लोकसभा में करीब 320 सांसदों का समर्थन माना जा रहा है। पूरे वोटिंग होने पर 360 वोट चाहिए। यानी अभी 40 वोट कम हैं।
लेकिन अगर विपक्ष के कुछ सदस्य गैर-हाजिर रहें तो आंकड़ा घट सकता है। उधर, राज्यसभा में एनडीए की ताकत करीब 151-154 तक पहुंच गई है। यहां भी पूर्ण उपस्थिति में 163 चाहिए। लेकिन कम उपस्थिति में आंकड़ा कम हो जाता है। हाल की बगावतों और दलबदल ने एनडीए की ताकत बढ़ाई है, लेकिन अभी भी पूर्ण बहुमत के लिए और सहयोगियों की जरूरत है।
दूसरा बड़ा मुद्दा है रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बयान। पिछले साल संसद में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान राजनाथ सिंह ने कहा था कि कोई भारतीय सैनिक शहीद नहीं हुआ। लेकिन बाद में सरकार ने सैनिकों के शहीद होने की पुष्टि की। कांग्रेस ने इसे सीधा झूठ बताया।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा स्पीकर को प्रिविलेज ब्रेक नोटिस दिया है। उन्होंने कहा कि राजनाथ सिंह ने संसद को गुमराह किया।
भाजपा का कहना है कि बयान संदर्भ से बाहर लिया गया है। राजनाथ सिंह किसी खास चरण की बात कर रहे थे, पूरे ऑपरेशन की नहीं। अब स्पीकर ओम बिरला को तय करना है कि ये नोटिस माना जाए या नहीं। ये फैसला भी काफी अहम होगा।