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Monsoon Session: मानसून सत्र 20 जुलाई से हो सकता है शुरू, जानें तीन महीनों में कितनी बदल गई संसद?

संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो सकता है। ऐसे में तृणमूल कांग्रेस में संभावित फूट, शिवसेना (उद्धव गुट) के सांसदों के दल-बदल और डीएमके-कांग्रेस के बीच मतभेद के कारण सदन में सियासी बदलाव की संभावना है।
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फाइल फोटो - IANS

Monsoon Session likely to start on July 20: संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलने की संभावना है। इस दौरान कुल 19 बैठकें हो सकती है। हालांकि दल बदल, नए गठबंधन, पार्टियों के विलय, सांसदों की नई बैठक व्यवस्था और बदले राजनीतिक समीकरणों के कारण यह सत्र काफी हंगामेदार रह सकता है। यह सत्र ऐसे समय में होगा, जब भाजपा को पश्चिम बंगाल असम और पुडुचेरी में जीत मिली है।

यह मानसून सत्र ऐसे समय में हो रहा है जब हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों ने संसद के समीकरण बदल दिए हैं। एक ओर बीजेपी को पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी जैसे राज्यो में राजनीतिक बढ़त मिली है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष की ताकत को झटका लगा है।

तीन महीनों में बदला संसद का समीकरण

तृणमूल कांग्रेस में टूट, शिवसेना (UBT) से सांसदों का अलग होना और डीएमके-कांग्रेस गठबंधन टूटने से लोकसभा की संख्या और राजनीतिक संतुलन में बड़ा बदलाव आने वाला है। इन घटनाओं से सत्तारूढ़ पक्ष की ताकत बढ़ेगी, जबकि विपक्ष कमजोर नजर आएगा।

एक और अहम बदलाव डीएमके और कांग्रेस के रिश्तों में भी आया है। तमिलनाडु में कांग्रेस के TVK के साथ गठबंधन करने के बाद DMK ने INDIA गठबंधन से दूरी बना ली है। डीएमके ने अपने सांसदों के लिए कांग्रेस से अलग बैठने की व्यवस्था करने का अनुरोध लोकसभा अध्यक्ष से किया है।

कई बड़े बिल लाने की तैयारी में सरकार

नई सियासी समीकरणों के चलते सरकार उत्साहित है। ऐसे में मानसून सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। सरकार की प्राथमिकता 131वां संविधान संशोधन विधेयक हो सकता है। यह बिल महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़ा है। यह विधेयक पिछले सत्र में पारित नहीं हो सका था।

इसके अतिरिक्त सरकार 130वां संविधान संशोधन विधेयक भी ला सकती है। इस विधेयक में प्रस्ताव है कि यदि कोई मुख्यमंत्री, मंत्री या प्रधानमंत्री किसी गंभीर अपराध के मामले में लगातार 30 दिनों तक गिरफ्तारी या न्यायिक हिरासत में रहता है तो वह स्वतः अपने पद से हट जाएगा। संयुक्त संसदीय समिति इस विधेयक में कुछ महत्वपूर्ण संशोधन सुझा सकती है। 'वन नेशन, वन इलेक्शन' विधेयक को पारित कराने की कोशिश हो सकती है।

इसके अलावा एफसीआरए संशोधन विधेयक, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, एंटी-डोपिंग विधेयक, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने वाले अध्यादेश को प्रतिस्थापित करने वाला विधेयक, वेतन संहिता के केंद्रीय नियम, कॉरपोरेट कानून और प्रतिभूति बाजार संहिता से जुड़े विधेयक भी पेश किए जा सकते हैं।

सरकार को घेरने की तैयारी में विपक्ष

हाल के सियासी घटनाक्रमों के चलते विपक्ष भले ही कमजोर हुआ है, लेकिन वो सरकार को घेरने का कोई भी मौका नहीं चूकेगी। विपक्षी पार्टियां राम मंदिर दान चोरी का मामला, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें, महंगाई, बेरोजगारी और क्षेत्रीय दलों में टूट-फूट के मुद्दे पर सरकार को जोर-शोर से घेरेंगी।