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बंगाल का रण 2026: इन 5 ‘हॉट सीटों’ पर पूरे देश की रहेगी नज़र, दिग्गजों की साख दांव पर

Bengal Assembly Election: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में 5 हॉट सीटों पर सबसे कड़ा मुकाबला होने जा रहा है। भवानीपुर, नंदीग्राम और जादवपुर जैसी सीटों पर दिग्गजों की साख दांव पर है, समझें पूरा सियासी समीकरण।

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Mar 18, 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पश्चिमी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी। ( फोटो: AI)

Bengal Election: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव (Bengal Election) का बिगुल बज गया है और इसके साथ ही सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। सभी राजनीतिक दलों ने कमर कस ली है और उम्मीदवारों की सूचियां सामने आने लगी हैं। इस बार कुछ खास विधानसभा क्षेत्रों में सीधा और कड़ा मुकाबला (Tough Fight) होने वाला है। बंगाली और अंग्रेजी मीडिया (Media Reports) के अनुसार इस बार ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी (BJP) के बीच आर-पार की लड़ाई मानी जा रही है। राज्य की 5 ऐसी खास सीटें हैं (Hot Seats), जिन पर पूरे देश की नजर टिकी हुई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन सीटों के नतीजे ही बहुत हद तक तय करेंगे कि बंगाल की सत्ता (Bengal Politics) किसके हाथ में जाएगी। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि ये 5 हॉट सीटें (Key Constituencies) कौन सी हैं और वहां जमीन पर क्या सियासी समीकरण (Political Equation) बन रहे हैं।

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1.भवानीपुर: सत्ता का केंद्र और प्रतिष्ठा का सवाल (Bhabanipur Seat)

भवानीपुर (Bhabanipur) में टीएमसी (TMC) से ममता बनर्जी (मुख्यमंत्री) और भाजपा (BJP) से शुवेंदु अधिकारी (नेता प्रतिपक्ष) उम्मीदवार हैं । भवानीपुर सीट कोलकाता के बिल्कुल बीचों-बीच है और इसे मुख्यमंत्री का सबसे मजबूत किला माना जाता है। इस बार विपक्ष ने रणनीति बदलते हुए यहां से एक कद्दावर चेहरे को उतारने का मन बनाया है। इस सीट की जीत या हार पूरे बंगाल के चुनाव का माहौल तय करेगी।

2. नंदीग्राम: साख की सबसे बड़ी लड़ाई (Nandigram Battle)

नंदीग्राम सीट पिछले चुनाव से ही पूरे देश में मशहूर हो चुकी है। यह वो सीट है जहां हार-जीत का अंतर बहुत कम रहता है और मुकाबला बेहद कांटे का होता है। एक बार फिर यहां दो दिग्गजों की साख दांव पर है, जिससे यह चुनाव का सबसे बड़ा 'कुरुक्षेत्र' बन गई है। नंदीग्राम (Nandigram) में टीएमसी (TMC) से पवित्र कर उम्मीदवार और वे हाल ही में भाजपा छोड़कर टीएमसी में शामिल हुए हैं। भाजपा ने शुभेंदु अधिकारी को इस बार भवानीपुर और नंदीग्राम, दोनों अहम सीटों से चुनावी मैदान में उतारा है।

3. मुर्शिदाबाद: त्रिकोणीय मुकाबले का रोमांच (Murshidabad Contest)

देश भर में चर्चित हुमायूं कबीर (Humayun Kabir) इस चुनाव में सुर्खियों में छाए हुए हैं। वे अपनी बनाई गई नई पार्टी जनता उन्नयन पार्टी (Janata Unnayan Party - JUP) से उम्मीदवार हैं। पहले वे तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कद्दावर नेता थे और मुर्शिदाबाद जिले की भरतपुर विधानसभा सीट से टीएमसी के विधायक रहे हैं। हालांकि, दिसंबर 2025 में कुछ विवादित बयानों के कारण टीएमसी ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया था। इसके बाद, 22 दिसंबर 2025 को उन्होंने अपनी खुद की नई राजनीतिक पार्टी 'जनता उन्नयन पार्टी' का गठन किया। आगामी 2026 के विधानसभा चुनाव में वे अपनी इसी नई पार्टी के बैनर तले मुर्शिदाबाद की सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। मुर्शिदाबाद (Murshidabad) से टीएमसी (TMC) के शाओनी सिंह रॉय और भाजपा (BJP) से गौरी शंकर घोष उम्मीदवार हैं। मुर्शिदाबाद जिले की राजनीति हमेशा से दिलचस्प रही है। यहां अल्पसंख्यक वोटर निर्णायक भूमिका में होते हैं। इस बार टीएमसी, बीजेपी और लेफ्ट-कांग्रेस गठबंधन के बीच यहां कड़ा त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है, जिससे समीकरण उलझ गए हैं।

4. खड़गपुर सदर: मजबूत किले को बचाने की चुनौती (Kharagpur Sadar)

खड़गपुर सदर को एक मजबूत राजनीतिक आधार वाला क्षेत्र माना जाता है। यहां से फायरब्रांड नेताओं का चुनावी मैदान में उतरना इसे एक 'हॉट सीट' बनाता है। जो भी इस सीट को जीतेगा, उसका प्रभाव आसपास के कई ग्रामीण और शहरी इलाकों पर भी पड़ेगा। खड़गपुर सदर (Kharagpur Sadar) से टीएमसी (TMC) के प्रदीप सरकार और पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और कद्दावर नेता दिलीप घोष भाजपा (BJP) से उम्मीदवार हैं।

5. जादवपुर: वैचारिक युद्ध का प्रमुख मैदान (Jadavpur Constituency)

जादवपुर बंगाल की छात्र और बौद्धिक राजनीति का केंद्र है। वामपंथी दल यहां से अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए अपने सबसे मजबूत और दिग्गज चेहरों को उतार रहे हैं। टीएमसी के लिए इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखना एक बड़ी चुनौती होगी। जादवपुर (Jadavpur) सीट से टीएमसी (TMC) के देबब्रत मजूमदार प्रत्याशी हैं और
विपक्ष (BJP/Left) इस सीट पर टीएमसी के सामने कड़ी चुनौती है। जहां भाजपा अपने पत्ते खोल रही है, वहीं वाम मोर्चे (Left Front) ने यहां से अपने दिग्गज नेता बिकास रंजन भट्टाचार्य को उतारकर इस मुकाबले को सबसे बड़ा वैचारिक युद्ध बना दिया है।

साइलेंट वोटर' में पूरे चुनाव के नतीजे पलटने की ताकत

स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों और आम मतदाताओं का मानना है कि इस बार चुनाव में 'खेला होबे' के साथ-साथ रोजगार, महंगाई और सुरक्षा जैसे जमीनी मुद्दे ज्यादा हावी रहेंगे। जनता इस बार चेहरों से ज्यादा काम पर वोट देने का मन बना रही है
जैसे-जैसे सभी राजनीतिक दल अपनी फाइनल लिस्ट और चुनावी घोषणापत्र (मेनिफेस्टो) जारी करेंगे, इन 5 सीटों पर चुनाव प्रचार और आक्रामक हो जाएगा। अगले कुछ हफ्तों में यहां कई बड़ी रैलियां और रोड शो देखने को मिलेंगे।
इन हाई-प्रोफाइल 5 सीटों के अलावा, उत्तर बंगाल और जंगलमहल के आदिवासी बहुल इलाकों की सीटों पर भी कांटे की टक्कर है। वहां का 'साइलेंट वोटर' इस बार पूरे चुनाव के नतीजे पलटने की ताकत रखता है।

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