
Defence Investiture Ceremony 2026: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में रक्षा अलंकरण समारोह 2026 (चरण- प्रथम) के अन्तर्गत भारतीय सेना, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और राज्य व केंद्र शासित प्रदेश पुलिस के कर्मियों को वीरता पुरस्कार प्रदान किए। ये पुरस्कार सशस्त्र बलों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के कर्मियों द्वारा दिखाए गए असाधारण शौर्य के लिए दिए गए। ये सम्मान जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर क्षेत्र और सीमावर्ती इलाकों में आतंकवाद, उग्रवाद तथा बाहरी खतरों के खिलाफ देश की सुरक्षा में दिए गए अद्वितीय योगदान को रेखांकित करते हैं। साथ ही, विमानन, समुद्री अभियानों और मानवीय सहायता मिशनों में प्रदर्शित असाधारण वीरता और साहस को भी मान्यता प्रदान करते हैं।
राष्ट्रपति ने 7 कीर्ति चक्र (2 मरणोपरांत), 15 वीर चक्र (3 मरणोपरांत) और 29 शौर्य चक्र (1 मरणोपरांत) प्रदान किए। ये पुरस्कार उन जवानों को दिए गए जिन्होंने कर्तव्य पालन के दौरान अदम्य साहस, वीरता और राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अपनी जान की परवाह न करते हुए उल्लेखनीय कार्य किया। इनमें कई जवानों ने जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर, अंतरराष्ट्रीय सीमा और आतंकवाद विरोधी अभियानों में अद्भुत बहादुरी दिखाई। कुछ पुरस्कार मरणोपरांत दिए गए, जो देश के लिए प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों को समर्पित हैं।
कीर्ति चक्र प्राप्त करने वालों में लांस नायक मीनाक्षी सुंदरम ई, नायब सूबेदार डोलेश्वर सुब्बा, मेजर अर्शदीप सिंह, एयर कमोडोर प्रशांत बालकृष्णन नायर और कैप्टन लालरीनावमा सैलो शामिल हैं।
वीर चक्र से सम्मानित वायु सेना के कई पायलटों (ग्रुप कैप्टन रणजीत सिंह सिद्धू, मनीष अरोड़ा, अनिमेष पटनी आदि) और सेना के कर्नल कोशांक लांबा, लेफ्टिनेंट कर्नल सुशील बिष्ट सहित अन्य वीर शामिल हैं।
शौर्य चक्र प्राप्त करने वालों में लेफ्टिनेंट कर्नल नीतीश भारती शुक्ला, मेजर आदित्य प्रताप सिंह, लेफ्टिनेंट कमांडर सूरज पराशर, मेजर भार्गव कलिता, मेजर शिवकांत यादव आदि प्रमुख हैं। समारोह में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और तीनों सेनाओं के प्रमुख उपस्थित रहे।
समारोह के दौरान एक हृदयविदारक और भावुक क्षण देखने को मिला। कुलगाम में शहीद हुए सिपाही जंजाल प्रवीण प्रभाकर की मां जब मरणोपरांत कीर्ति चक्र लेने मंच पर पहुंचीं तो भावुक होकर फूट-फूटकर रो पड़ीं। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कंधे पर सिर रख दिया। राष्ट्रपति ने शहीद की मां को गले लगा लिया, उनके आंसू पोंछे और ढांढस बंधाया। यह दृश्य पूरे समारोह में मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर गया।