
BJP Punjab Strategy: पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले राजनीतिक दलों द्वारा तैयारी तेज कर दी है। सत्ताधारी आम आदमी पार्टी ने पहले ही अपना कैंपेन शुरू कर दिया है। दिल्ली में चुनाव हारने के बाद AAP ने पंजाब में तैयारी शुरू कर दी थी। वहीं आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने भी अपनी रणनीति बनाना शुरू कर दी। बीजेपी अकेले विधानसभा चुनाव लड़ेगी। इसको लेकर पार्टी ने ऐलान भी कर दिया है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट कर दिया है कि विधानसभा चुनाव में बीजेपी किसी भी पार्टी की छोटा भाई नहीं बनेगी।
दरअसल, चुनाव से पहले शिरोमणि अकाली दल (SAD) और बीजेपी के मिलकर चुनाव लड़ने की अटकलें लगाई जा रही थी, लेकिन बीजेपी नेता के बयान के बाद लग रहा है कि पार्टी अकेले ही चुनाव लड़ेगी।
बिहार और बंगाल के बाद अब बीजेपी अपना ध्यान पंजाब पर लगा रही है। दरअसल, बिहार में बीजेपी का कभी मुख्यमंत्री नहीं बना था, लेकिन अब सम्राट चौधरी को सीएम बनाया गया है। वहीं बंगाल में भी बीजेपी कभी चुनाव नहीं जीती थी। विधानसभा चुनाव 2026 में बंगाल में बीजेपी ने शानदार जीत दर्ज की और शुभेन्दु अधिकारी को सीएम बनाया गया।
अब बिहार और बंगाल वाली रणनीति के तहत पार्टी की पूरी नजर पंजाब पर है, क्योंकि पंजाब में बीजेपी ने कभी भी अपने दम पर सरकार नहीं बनाई है। हालांकि शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन में वह सरकार में साथ रही है।
आगामी विधानसभा चुनाव और जातीय समीकरण को देखते हुए बीजेपी ने अपना प्रदेश अध्यक्ष बदला है। सुनील जाखड़ की जगह केवल सिंह ढिल्लो को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। दरअसल, जातीय समीकरण को देखते हुए सिख चेहरे को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। इसको लेकर पार्टी में काफी समय से मांग की जा रही थी।
इसके अलावा केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब बीजेपी का पहला प्रमुख जाट सिख प्रदेश अध्यक्ष बनाना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि पार्टी शहरी हिंदू वोटों के साथ ग्रामीण सिख समाज में भी पैठ बनाना चाहती है।
हालिया राज्य सभा चुनाव में बीजेपी ने रवनीत सिंह बिट्टू को प्रत्याशी नहीं बनाया था। दरअसल, बिट्टू मोदी सरकार में मंत्री है। बिट्टू को प्रत्याशी नहीं बनाए जाने के बाद अब उनकी मंत्रिमंडल से भी छुट्टी तय है। हालांकि पार्टी बिट्टू का इस्तेमाल पंजाब चुनाव में करना चाहती है। यही वजह है कि उन्हें राज्य सभा प्रत्याशी घोषित नहीं किया गया।
रवनीत सिंह बिट्टू और केवल सिंह ढिल्लो दोनों सिख समुदाय के बड़े नेता है। प्रदेश में सिख समुदाय का बड़ा वोट बैंक है, जो कि कृषि कानूनों के कारण बीजेपी से छिटक गया है। इन दोनों नेताओं से बीजेपी सिख वोट बैंक को अपनी तरफ करने का प्रयास करेगी।
पंजाब में ड्रग्स का मुद्दा बेहद प्रभावी और लंबे समय से राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा रहा है। दरअसल, प्रदेश में नशे की समस्या कई वर्षों से चुनावी मुद्दा रही है। 2014 लोकसभा और 2017 विधानसभा चुनावों में भी ड्रग्स बड़ा चुनावी मुद्दा बना था और सत्ता परिवर्तन की बहस में इसकी अहम भूमिका रही। आम आदमी पार्टी ने इसी मुद्दे को विषय बनाकर सत्ता काबिज की थी। वहीं बीजेपी भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाना चाहेगी।
पंजाब में इस बार मुकाबला त्रिकोणीय होने जा रहा है। आम आदमी पार्टी, बीजेपी और कांग्रेस अपने दमखम के साथ चुनाव लड़ने जा रही है। दरअसल, कांग्रेस ने भी इसके लिए तैयारी शुरू कर दी और चुनाव के लिए एक समिति बनाई है। जिसमें अजय माकन, मीनाक्षी नटराजन और भजनलाल जाटव को शामिल किया गया है।