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राहुल गांधी पर मानहानि केस: पुणे कोर्ट में सावरकर के पड़पोते का बयान, ‘सावरकर ने अंग्रेजों को 10 दया याचिकाएं दी थीं’

Freedom Fighter Vinayak Damodar Savarkar: राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि मामले की सुनवाई के दौरान पुणे कोर्ट में सावरकर के पड़पोते सत्यकी सावरकर ने स्वीकार किया कि विनायक दामोदर सावरकर ने ब्रिटिश सरकार को 10 दया याचिकाएं दी थीं। अब अगली जिरह 1 जुलाई को।

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Savarkar mercy petitions discussed in Rahul Gandhi defamation case at Pune court.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विनायक दामोदर सावरकर। (Photo- IANS)

Rahul Gandhi Defamation Case: विनायक दामोदर सावरकर पर कथित अपमानजनक टिप्पणियों को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ पुणे की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। इस दौरान एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। विनायक दामोदर सावरकर के पड़पोते सत्यकी सावरकर ने स्वीकार किया कि विनायक दामोदर सावरकर ने ब्रिटिश सरकार के समक्ष अपनी सजा में राहत के लिए 10 दया याचिकाएं दायर की थीं।

विशेष न्यायाधीश अमोल शिंदे की अदालत में राहुल गांधी की ओर से पेश अधिवक्ता मिलिंद पवार द्वारा की गई जिरह के दौरान सत्यकी सावरकर ने यह जानकारी दी। उन्होंने यह भी माना कि विनायक दामोदर सावरकर को दया याचिकाएं दायर किए जाने के समय भी ‘वीर’ कहा जाता था। उनके अनुसार, इसमें किसी प्रकार का विरोधाभास नहीं है।

भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों ने रियायत स्वीकार नहीं की थी

सत्यकी सावरकर ने अदालत में यह भी स्वीकार किया कि विनायक दामोदर सावरकर ने सजा सुनाए जाने के पहले ही महीने में दया याचिकाएं दाखिल कर दी थीं। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि शिवराम राजगुरु, बटुकेश्वर दत्त और अशफाकउल्ला खां ने ब्रिटिश सरकार से युद्धबंदी जैसा व्यवहार किए जाने की मांग की थी। इन क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों से किसी प्रकार की रियायत स्वीकार करने से इनकार कर दिया था।

सत्यकी सावरकर ने अदालत को यह भी बताया कि सावरकर द्वारा दायर की गई सभी 10 दया याचिकाओं के दस्तावेज सरकारी अभिलेखों में उपलब्ध हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन याचिकाओं की भाषा ब्रिटिश शासन के प्रति निष्ठा प्रदर्शित नहीं करती।

सभी याचिकाएं ब्रिटिश सरकार ने खारिज की थीं

सत्यकी सावरकर के अदालत में दिए गए बयान के अनुसार, 10 दया याचिकाएं दाखिल किए जाने के बावजूद ब्रिटिश सरकार ने सावरकर को कोई राहत नहीं दी। उनकी सभी याचिकाएं खारिज कर दी गई थीं। तत्कालीन ब्रिटिश सरकार को आशंका थी कि वे दोबारा क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं और शासन के लिए परेशानी खड़ी कर सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि दया याचिका देकर सजा में कमी की मांग करना ब्रिटिश शासन के दौरान एक सामान्य प्रक्रिया थी। केवल सावरकर ही नहीं, बल्कि अन्य कैदी भी ऐसी याचिकाएं दायर करते थे। यह न तो असाधारण था और न ही किसी तरह से अवैध। उन्होंने कहा कि कोई भी कैदी दया याचिका दाखिल करने के लिए बाध्य नहीं था। यह पूरी तरह संबंधित कैदी की इच्छा पर निर्भर करता था।

क्या है पूरा मामला?

राहुल गांधी के खिलाफ दायर मानहानि मामले में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने कई अवसरों पर विनायक दामोदर सावरकर के बारे में अपमानजनक टिप्पणियां की हैं। विशेष रूप से 5 मार्च 2023 को इंग्लैंड में ओवरसीज कांग्रेस के एक कार्यक्रम में दिए गए उनके भाषण का उल्लेख किया गया है।

सत्यकी सावरकर का आरोप है कि राहुल गांधी ने जानबूझकर विनायक दामोदर सावरकर के खिलाफ झूठे आरोप लगाए। उनके अनुसार, राहुल गांधी को पता था कि उनके द्वारा लगाए गए आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत हैं। शिकायत में कहा गया है कि इन टिप्पणियों से न केवल सावरकर की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा, बल्कि उनके परिवार को भी मानसिक पीड़ा हुई।

शिकायत में राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 500 के तहत अधिकतम सजा तथा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 357 के तहत अधिकतम मुआवजे की मांग की गई है। मामले में सत्यकी सावरकर की जिरह अब 1 जुलाई को आगे जारी रहेगी।