राष्ट्रीय

राघव चड्ढा ने खुद लाया था दलबदल रोकने का बिल, अगर बन जाता कानून तो नहीं टूटती AAP

राजनीति पूरी तरह से विरोधाभासी विषय है। राघव चड्ढा जो आम आदमी पार्टी में रहकर बीजेपी को कोसते रहते थे, आज वे ही भाजपा में शामिल हो गए हैं। वह अपने साथ 7 सांसदों को भी लाए हैं, लेकिन अगर 2022 में उनके द्वारा लाया गया प्राइवेट बिल संसद में पास हो जाता तो आप टूटती नहीं...

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Apr 27, 2026
Raghav chadha News
राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा। (फोटो- ANI)

राजनीति में विरोधाभास अक्सर तब सामने आता है जब किसी नेता के अपने बोल उसके सामने आ खड़े होते हैं। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा (Raghav Chadha) के साथ कुछ ऐसा ही हो रहा है। साल 2022 में जब चड्ढा राज्यसभा पहुंचे थे, तब उन्होंने सदन में एक निजी सदस्य विधेयक पेश किया था। मकसद था दलबदल रोकना। लेकिन आज आप के भीतर जो हालात हैं, वो उस बिल की याद दिलाते हैं।

क्या था उस बिल में खास

5 अगस्त 2022 को चड्ढा ने संविधान संशोधन विधेयक पेश किया। उस वक्त वो अरविंद केजरीवाल के करीबी और भरोसेमंद साथी माने जाते थे। इस बिल की मांग सीधी थी, दलबदल करना और भी मुश्किल बनाओ। मौजूदा कानून के मुताबिक अगर किसी पार्टी के दो तिहाई विधायक एकसाथ जाएं तो उसे वैध विभाजन माना जाता है। चड्ढा इसे बदलकर तीन चौथाई करना चाहते थे। यानी अगर किसी पार्टी के 100 विधायक हैं तो पहले 67 जाते तो बच जाते, चड्ढा चाहते थे कि कम से कम 75 जाएं तभी वो बचें।

रिसॉर्ट पॉलिटिक्स पर भी निशाना

बिल में एक और अहम प्रस्ताव था। जो विधायक या सांसद जीतने के बाद पार्टी बदले, उस पर छह साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगे। साथ ही देश में जो रिसॉर्ट पॉलिटिक्स की परंपरा बन गई है, उस पर भी चड्ढा ने चोट की। बिल में कहा गया कि अगर कोई चुना हुआ प्रतिनिधि सरकार से समर्थन वापस ले तो उसे सात दिन के भीतर पीठासीन अधिकारी के सामने हाजिर होना होगा। ऐसा न करने पर उसकी सदस्यता खतरे में पड़ सकती है।

खुद लिखा था, दसवीं अनुसूची में बदलाव जरूरी है

बिल के दस्तावेज में साफ लिखा था कि दलबदल विरोधी कानून का मकसद विधायकों की खरीद फरोख्त रोकना था, लेकिन यह समस्या आज भी बड़े पैमाने पर जारी है। चड्ढा ने इसे लोकतंत्र पर कलंक बताया था। संविधान की दसवीं अनुसूची में बदलाव की मांग करते हुए उन्होंने अनुच्छेद 102 और 191 में संशोधन का प्रस्ताव रखा था।

बिल अटका, जवाब नहीं मिला

वो बिल आज भी संसद में लंबित है। इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि जब चड्ढा के दफ्तर से इस पर राय मांगी तो कोई जवाब नहीं आया।

Updated on:
27 Apr 2026 07:50 am
Published on:
27 Apr 2026 07:48 am