
ओमान तट और होर्मुज स्ट्रेट के पास हाल के दिनों में समुद्री तनाव तेजी से बढा है। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर कई जहाजों को निशाना बनाया गया, जिससे वैश्विक शिपिंग और तेल आपूर्ति प्रभावित हुई। इसी बीच पलाऊ ध्वज वाले तेल टैंकर एमटी सेट्टेबेलो पर हुए हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत ने भारत की चिंता बढा दी है। भारत सरकार ने इस घटना पर अमेरिका के सामने कडा विरोध दर्ज कराया है और विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि जिन जहाजों पर हमला हुआ, वे विदेशी ध्वज वाले जहाज थे, भारतीय स्वामित्व वाले नहीं।
पलाऊ ध्वज वाले एमटी सेट्टेबेलो पर उस समय हमला हुआ जब जहाज ओमान तट के पास से गुजर रहा था। जहाज पर कुल 28 चालक दल सदस्य मौजूद थे, जिनमें 24 भारतीय नागरिक शामिल थे। शुरुआती जानकारी में तीन भारतीय नाविक लापता बताए गए थे, लेकिन बाद में उनकी मौत की पुष्टि हुई। मृतकों की पहचान आदित्य शर्मा, शिवानंद चौरसिया और पतनाला सुरेश के रूप में हुई है। केंद्रीय शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने घटना को दुखद बताते हुए कहा कि सरकार मृतकों के परिवारों के साथ है और शवों को जल्द भारत लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस हमले के बाद भारत ने नई दिल्ली में अमेरिकी चार्ज डी अफेयर्स को तलब कर कडा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि जब पलाऊ ध्वज वाले एमटी सेट्टेबेलो पर हमला हुआ, तब हमने अमेरिकी पक्ष के सामने अपनी गहरी चिंता रखी। जयसवाल ने आगे कहा कि जिन जहाजों पर हमला हुआ वह विदेशी ध्वज वाले जहाज थे, वे भारतीय स्वामित्व वाले नहीं थे। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में शिपिंग पर हो रहे हमले बेहद चिंताजनक हैं और यह मध्य पूर्व संघर्ष का सीधा परिणाम है। भारत ने तत्काल तनाव कम करने की अपील दोहराई है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बाद में स्वीकार किया कि उसके युद्धक विमान ने जहाज पर कार्रवाई की थी। अमेरिका का दावा है कि जहाज ने अमेरिकी निर्देशों का पालन नहीं किया और वह ईरान से तेल लेकर जा रहा था। बता दें कि, होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति का बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। फरवरी में शुरू हुए अमेरिका-इजरायल और ईरान तनाव के बाद यह इलाका लगातार संवेदनशील बना हुआ है। ईरान और अमेरिका दोनों की तरफ से लगाए गए प्रतिबंधों और नाकेबंदी ने समुद्री यातायात को प्रभावित किया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी असर दिखाई दे रहा है।