
Monsoon Session: सोमवार यानि 20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू होने वाला है। इस सत्र के दौरान मोदी सरकार दोबारा परिसीमन बिल लेकर आ सकती है। अप्रैल में संसद के विशेष सत्र के दौरान लोकसभा में दो तिहाई बहुमत नहीं होने के कारण यह बिल पास नहीं हो सका था। जिसके बाद से ही बीजेपी और मोदी सरकार ने दो तिहाई बहुमत जुटाने को लेकर रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया। अब सत्र शुरू होने से पहले लोकसभा अध्यक्ष स्पीकर ओम बिरला ने दो बड़े फैसले लिए हैं। जिसने मोदी सरकार की राह थोड़ी आसान कर दी है।
स्पीकर ओम बिरला ने उद्धव के सांसदों को शिंदे सेना में विलय की मंजूरी दे दी है। इस मंजूरी के साथ ही शिंदे सेना अब NDA की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी बन गई है। 13 सांसदों के साथ यह पार्टी नीतीश कुमार की जदयू से एक कदम आगे निकल गई है, हालांकि चंद्रबाबू नायडू की TDP अभी भी 16 सांसदों के साथ सबसे आगे बनी हुई है।
तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसद जो अब नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) के साथ जुड़ गए हैं। उन्होंने स्पीकर ओम बिरला से सत्र शुरू होने पहले सदन में बैठने की व्यवस्था में बदलाव की मांग की थी। उनकी मांग को भी स्पीकर बिरला ने मंजूर कर लिया है। हालांकि, स्पीकर ने अभी तक उनके NCPI में विलय को औपचारिक तौर पर मंजूरी नहीं दी है।
दिलचस्प बात यह है कि केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को होने वाली सर्वदलीय बैठक में इस बागी गुट के नेता सुदीप बंद्योपाध्याय को न्योता भेज दिया, जिससे टीएमसी भड़क गई। पार्टी सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने इसे लोकतंत्र का मजाक बताते हुए कहा कि स्पीकर तो अभी भी इन्हें टीएमसी सांसद मान रहे हैं, लेकिन सरकार के मंत्री इन्हें पहले से ही अलग पार्टी का हिस्सा मान बैठे हैं।
वहीं, स्पीकर ओम बिरला मानसून सत्र के दौरान बागी सांसदों के NCPI में विलय की मंजूरी देते हैं तो तृणमूल कांग्रेस लोकसभा में चौथी सबसे बड़ी पार्टी होने का अपना स्थान खो देगी। वह 8 सांसदों के साथ नौवें स्थान पर आ जाएगी। जो शरद पवार के नेतृत्व वाली NCP (SP) के बराबर होगा।
अगर बागी टीएमसी सांसदों का विलय आधिकारिक तौर पर मान लिया जाता है, तो एनडीए की ताकत बढ़कर 319 तक पहुंच जाएगी। अगर शरद पवार की एनसीपी (एसपी) भी साथ आ जाती है, तो यह आंकड़ा 327 तक जा सकता है। लेकिन 360 के जादुई नंबर से यह अभी भी 33 सीटें दूर होगा, जो संविधान संशोधन बिल पास कराने के लिए जरूरी है। वहीं, सियासी गलियारों में चर्चा है कि तमिलनाडु में कांग्रेस के टीवीके और एक्टर विजय के साथ जाने के बाद डीएमके पाला बदल सकती है। यदि डीमके के 22 सांसद भी मोदी सरकार के साथ आ गए तो 33 सीटों की दूर घटकर महज 11 रह सकती है।
याद रहे, अप्रैल में जब सरकार ने यही बिल पेश किया था, तो 540 में से 528 सांसदों ने वोट डाला, जिसमें 298 पक्ष में और 230 विपक्ष में गए थे। तब सरकार 352 के आंकड़े से चूक गई थी।