
दिशा सालियान और आदित्य ठाकरे। फाइल फोटो- आईएएनएस
Disha Salian Case: भाजपा विधायक राम कदम ने दिशा सालियान मामले में आदित्य ठाकरे के जवाब पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले की सीबीआई जांच चल रही है और जांच के बाद सच्चाई सामने आएगी। राम कदम ने कहा कि यदि आदित्य ठाकरे का इस मामले से कोई संबंध नहीं है तो दिशा सालियान के पिता की ओर से उनका नाम लिए जाने पर सवाल उठना स्वाभाविक है। राम कदम ने कहा कि उद्धव ठाकरे सरकार के कार्यकाल में इस मामले को दबाने के प्रयास के आरोप खुद पीड़ित परिवार ने लगाए थे। दिशा सालियान के परिवार ने लगातार न्याय की मांग की और मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की अपील भी की थी।
उन्होंने सवाल किया कि परिवार को न्याय की मांग के लिए इतने लंबे समय तक इंतजार क्यों करना पड़ा। राम कदम ने कहा कि इस मामले में आदित्य ठाकरे क्या कहते हैं, उससे ज्यादा महत्वपूर्ण पीड़ित परिवार की बात है। अब सीबीआई मामले की जांच करेगी और जांच के बाद जो भी सच्चाई होगी, वह सामने आएगी। सुनेत्रा पवार की अपील पर राम कदम ने कहा कि उन्होंने अपने पति को खोया है और उनके बेटों जय व पार्थ ने अपने पिता को खोया है। महाराष्ट्र ने भी अपने एक नेता को खोया है। इसके बावजूद पवार परिवार ने साहस के साथ सामाजिक जीवन में वापसी की है। उन्होंने कहा कि सुनेत्रा पवार खुद अपील कर रही हैं कि उनके पति के निधन को लेकर राजनीतिक स्तर नहीं गिराया जाए।
राम कदम ने विपक्षी नेताओं से सवाल किया कि क्या वे पवार परिवार की भावनाओं का सम्मान करेंगे और आगे इस मुद्दे पर राजनीति करने से बचेंगे। सीजेपी को लेकर राम कदम ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बयान का हवाला देते हुए इसे 'कांग्रेस को जिताओ पार्टी' बताया। उन्होंने कहा कि इस संगठन से अलग होने वाले कुछ लोग भी उसके नेतृत्व पर आरोप लगा रहे हैं। युवाओं और छात्रों को राजनीतिक गतिविधियों के जरिए भ्रमित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा राजनीतिक गतिविधियों के पीछे कांग्रेस और अरविंद केजरीवाल से जुड़े लोगों की भूमिका है।
राम कदम ने केंद्र की आर्थिक उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश की जीडीपी वृद्धि उम्मीद से बेहतर रही है और भारत वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में विपक्ष की ओर से की जा रही राजनीति एक सोची-समझी रणनीति और अवसरवाद का हिस्सा है। मराठा आरक्षण आंदोलन पर राम कदम ने कहा कि मराठा समाज लंबे समय से अपनी मांग को लेकर संघर्ष कर रहा है। पिछली सरकारों ने इस मांग पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया, जबकि देवेंद्र फडणवीस और बाद में एकनाथ शिंदे ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मांग रखने, उपवास करने और आंदोलन करने का अधिकार है। सरकार को संवाद और चर्चा के जरिए समाधान निकालना चाहिए।
राम कदम ने कहा कि भाजपा मराठा समाज के साथ है, लेकिन किसी दूसरे समाज के अधिकार या आरक्षण को नुकसान पहुंचाकर समाधान निकालना उचित नहीं होगा। सरकार की प्राथमिकता मराठा समाज को न्याय दिलाने के साथ अन्य समुदायों के आरक्षण को भी प्रभावित होने से बचाना है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए राम कदम ने कहा कि आगामी चुनाव में उन्हें हार दिखाई दे रही है और इसी वजह से वे आपत्तिजनक टिप्पणियां कर रहे हैं। उन्होंने अखिलेश यादव के 'चवन्नी' शब्द के इस्तेमाल पर सवाल उठाया। राम कदम ने समाजवादी पार्टी की पिछली सरकारों के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए अयोध्या से जुड़े घटनाक्रम को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए।उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता तय करेगी कि राजनीतिक विरोधियों के बारे में इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करने वालों को कितना महत्व दिया जाए।
Updated on:
04 Sept 2026 06:45 pm
Published on:
04 Sept 2026 06:45 pm
