
श्रेया घोषाल (फोटो सोर्स- Youtube/ Hauterrfly)
Shreya Ghoshal First Period: अपनी आवाज से करोड़ों दिलों पर राज करने वाली श्रेया घोषाल आज भारतीय संगीत की सबसे लोकप्रिय गायिकाओं में शामिल हैं। बेहद कम उम्र में संगीत की दुनिया में कदम रखने वाली श्रेया की कामयाबी के पीछे उनकी प्रतिभा के साथ-साथ परिवार का भी बड़ा योगदान रहा है। खासकर अपने पिता के साथ उनका रिश्ता हमेशा बेहद खास रहा है। अब एक बातचीत के दौरान श्रेया ने बचपन का ऐसा अनुभव साझा किया है, जब पहली बार पीरियड आने पर वह काफी घबरा गई थीं। सबसे खास बात यह रही कि उस मुश्किल घड़ी में उनके पिता ने बिना झिझक बेटी को संभाला।
श्रेया घोषाल ने 'हॉटरफ्लाई' के साथ इंटरव्यू में बताया कि उन्हें पहली बार मासिक धर्म तब आया था, जब वह ट्रेन से सफर कर रही थीं। उस वक्त वह ‘सा रे गा मा पा’ से जुड़े काम के सिलसिले में यात्रा कर रही थीं और अपने घर वापस लौट रही थीं।
कम उम्र में पहली बार ऐसा अनुभव होने की वजह से श्रेया को समझ नहीं आया कि अचानक उनके साथ क्या हो रहा है। वह घबरा गईं और उन्होंने सबसे पहले अपने पिता को इसकी जानकारी दी।
उस समय ट्रेन में होने की वजह से तुरंत मेडिकल स्टोर या बाजार तक जाना आसान नहीं था। ऐसे में श्रेया के पिता ने स्थिति को समझा और बेटी को परेशान होने के बजाय शांत रहने के लिए संभाला। उन्होंने उस समय उपलब्ध साधनों से उनकी मदद की और सफर पूरा होने तक बेटी का ख्याल रखा।
घर पहुंचने के बाद उन्होंने सबसे पहले श्रेया के लिए सैनिटरी पैड खरीदा। श्रेया के लिए यह घटना इसलिए भी यादगार रही क्योंकि उस उम्र में जिस चीज को लेकर वह घबरा गई थीं, उनके पिता ने उसे बिल्कुल सामान्य तरीके से लिया।
श्रेया ने अपने पिता के साथ रिश्ते को याद करते हुए बताया कि उन्होंने कभी समाज की सोच को अपनी बेटी के सपनों के बीच नहीं आने दिया। जब श्रेया छोटी थीं और संगीत की ओर उनका झुकाव दिखाई देने लगा था, तब आसपास के कुछ लोग उनके परिवार से सवाल करते थे कि बेटी की पढ़ाई पर ध्यान देने के बजाय उसे गायन के लिए इतना समय क्यों दिया जा रहा है।
लेकिन श्रेया के पिता ने इन बातों को कभी गंभीरता से नहीं लिया। उनका मानना था कि अगर उनकी बेटी संगीत में आगे बढ़ना चाहती है तो उसे पूरा अवसर मिलना चाहिए। लोगों की नकारात्मक बातों के बावजूद उन्होंने श्रेया का हौसला बढ़ाया और उनके संगीत के सफर में मजबूती से साथ दिया।
श्रेया ने यह भी बताया कि जब उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में काम करना शुरू किया, तब उनके माता-पिता अक्सर उनके साथ रहते थे। कम उम्र में करियर शुरू करने की वजह से परिवार का साथ उनके लिए सुरक्षा और आत्मविश्वास दोनों का बड़ा आधार था।
उनके मुताबिक, उस दौर में महिलाओं के लिए फिल्म इंडस्ट्री का माहौल आज की तुलना में कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण था। सोशल मीडिया के व्यापक प्रभाव से पहले किसी गलत व्यवहार या अनुचित स्थिति के खिलाफ आवाज उठाना भी आसान नहीं था। श्रेया ने कहा कि उनके माता-पिता की मौजूदगी की वजह से उन्हें कभी ऐसे अनुभव का सामना नहीं करना पड़ा।
श्रेया ने इंडस्ट्री में कास्टिंग काउच के सवाल पर कहा कि उनका व्यक्तिगत अनुभव ऐसा नहीं रहा, लेकिन वह इस बात से इनकार नहीं करतीं कि ऐसी चीजें इंडस्ट्री में मौजूद रही हैं। उन्होंने यह भी माना कि सोशल मीडिया के दौर में स्थिति पहले के मुकाबले बदली है।
फीस को लेकर उन्होंने कहा कि इसे केवल महिला और पुरुष के बीच का अंतर मानना सही नहीं होगा। उनके मुताबिक कई कलाकार करियर की शुरुआत में बिना भुगतान या बहुत कम फीस पर भी काम करते हैं और बाद में अनुभव तथा काम की मांग के आधार पर उनकी फीस बढ़ती है।
श्रेया घोषाल ने कम उम्र में ही संगीत की दुनिया में अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी थी। संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘देवदास’ से उनका बॉलीवुड सफर आगे बढ़ा और ‘बैरी पिया’ जैसे गीत ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई।
आज श्रेया की आवाज हिंदी सिनेमा के साथ-साथ कई भारतीय भाषाओं के संगीत का अहम हिस्सा है। लेकिन उनकी सफलता की कहानी में उस पिता का योगदान भी खास है, जिसने ट्रेन में घबराई हुई बेटी को संभालने से लेकर उसके बड़े सपनों को पूरा करने तक हर कदम पर उसका साथ दिया।
Updated on:
04 Sept 2026 06:06 pm
Published on:
04 Sept 2026 05:46 pm
