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CJP Protests: प्रदर्शनकारियों को सुप्रीम कोर्ट से राहत, बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले नाबालिग छात्रों की रिहाई के आदेश

Supreme Court on NEET Student Protests: नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए 18 वर्ष से कम उम्र के गिरफ्तार छात्रों की रिहाई के निर्देश दिए। कोर्ट ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रखने और छात्रों पर फिलहाल कोई दंडात्मक कार्रवाई न करने का भी आदेश दिया।
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Jul 28, 2026
Supreme Court on NEET protest cases.
फाइल फोटो- पत्रिका

NEET UG 2026 Paper Leak: नीट-यूजी 2026 पेपर लीक को लेकर देशभर में हुए छात्र प्रदर्शनों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। अदालत ने प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए 18 वर्ष से कम आयु के उन छात्रों को तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया है, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि फिलहाल छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक या जबरन कार्रवाई न की जाए। साथ ही, अदालत ने प्रदर्शनों से जुड़े सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि उसके समक्ष रखे गए आरोप प्रथम दृष्टया स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग करते हैं।

अदालत ने कहा, "सभी राज्यों को निर्देश दिया जाता है कि छात्र प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए 18 वर्ष से कम आयु के उन बच्चों को रिहा किया जाए, जिनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।"

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में गिरफ्तार ऐसे अन्य लोगों को भी रिहा किया जाए, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। हालांकि, इन मामलों की जांच कानून के अनुसार जारी रहेगी।

'पेलेट गन के इस्तेमाल पर भी लिया संज्ञान'

ये निर्देश भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान दिए। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। अदालत उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें जंतर-मंतर समेत देश के कई राज्यों में हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग करने के आरोप लगाए गए हैं।

याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि नीट-यूजी 2026 पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया, पेलेट गन, आंसू गैस और इलेक्ट्रिक हथियारों का इस्तेमाल किया गया, जो संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 20 और 21 का उल्लंघन है।

कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के उन आरोपों का भी संज्ञान लिया, जिनमें कहा गया कि पेलेट गन के इस्तेमाल से गंभीर चोटें आईं। एक प्रदर्शनकारी की कथित रूप से आंखों की रोशनी चली गई। कीलों वाली लाठियों से स्थायी विकलांगता हुई। एक मीडियाकर्मी पर गंभीर हमला किया गया। सादे कपड़ों में मौजूद कुछ पुलिसकर्मियों सहित पुलिस द्वारा हिंसा की गई।

'यदि हम हर व्यक्तिगत तथ्य की जांच करने लगें…'

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने जुनैद मलिक नामक एक प्रदर्शन स्वयंसेवक की ओर से दायर अलग याचिका का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया गया है कि मलिक और उसके परिवार के साथ पुलिस ने मारपीट की। हालांकि, अदालत ने कहा कि इस चरण में वह व्यक्तिगत तथ्यों की जांच नहीं कर रही है। फिर भी उसने माना कि प्रथम दृष्टया छात्रों पर हिंसक हमलों के आरोप सामने आए हैं, जिनकी निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच आवश्यक है।

सीजेआई ने कहा, 'यदि हम हर व्यक्तिगत तथ्य की जांच करने लगें… तो फिलहाल सबसे संतुलित भाषा यही होगी कि प्रथम दृष्टया हिंसा का मामला बनता है। इसी कारण हम इन मामलों की सुनवाई कर रहे हैं।' अदालत ने बिहार से जुड़े उन आरोपों का भी उल्लेख किया, जिनमें कहा गया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित तौर पर एके-47 का इस्तेमाल किया गया।

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Updated on:
28 Jul 2026 02:06 pm
Published on:
28 Jul 2026 01:57 pm