Tamil Nadu Loan Burden: मुख्यमंत्री विजय ने राज्य पर 10 लाख करोड़ रुपये के कर्ज का आरोप लगाते हुए DMK सरकार को घेरा। विजय के खाली खजाने वाले बयान पर एमके स्टालिन ने पलटवार किया, जिसके बाद राज्य की वित्तीय स्थिति पर सियासी घमासान तेज हो गया।
Tamil Nadu Debt Crisis: तमिलनाडु में रविवार को जोसेफ विजय ने सीएम पद की शपथ ले ली। इसके बाद प्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर सीएम विजय और पूर्व सीएम स्टालिन के बीच बहस शुरू हो गई। CM पद की शपथ लेने के बाद विजय ने ऐलान किया कि उनकी सरकार जल्द ही राज्य की वित्तीय स्थिति पर एक व्हाइट पेपर जारी करेगी। विजय ने आरोप लगाया कि पिछली DMK सरकार तमिलनाडु को करीब 10 लाख करोड़ रुपये के कर्ज में छोड़ गई है और राज्य की आर्थिक हालत खराब कर दी गई है।
मुख्यमंत्री विजय के आरोपों पर पूर्व सीएम और DMK नेता एमके स्टालिन ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि सरकार चलाने की वास्तविक चुनौतियों को नई सरकार जल्द समझ जाएगी। स्टालिन ने सोशल मीडिया पोस्ट में तंज कसते हुए लिखा कि व्यवहारिक वादों की बात करने वाले विजय अब प्रशासन की बारीकियां सीखेंगे।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु सरकार का कर्ज सीमा के भीतर है और अभी से फंड की कमी का रोना न रोएं।
सीएम पद की शपथ लेने के बाद विजय ने कई बड़ी घोषणाएं की। उन्होंने कहा कि घरेलू उपभोक्ताओं को हर दो महीने में 200 यूनिट मुफ्त बिजली दी जाएगी। इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी एक रिपोर्ट में ऊर्जा विभगा के हवाले से बताया कि इस योजना से सरकार को हर साल करीब 1730 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे।
इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति खराब है। रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 के अंत तक तमिलनाडु पर कुल कर्ज 9.56 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया था, जो देश के किसी भी राज्य से सबसे ज्यादा हैं। हालांकि, दूसरी ओर तमिलनाडु देश का सबसे तेजी से बढ़ने वाला राज्य भी बना हुआ है। FY26 में राज्य की वास्तविक विकास दर 10.8% दर्ज की गई, जबकि FY25 में यह 11.2% थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाले राज्य ज्यादा कर्ज उठा सकते हैं क्योंकि उनकी भुगतान क्षमता भी मजबूत होती है। तमिलनाडु का कर्ज-GSDP अनुपात FY22 के 32.2% से घटकर FY25 में 30.6% पर आ गया है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि राज्य की आर्थिक चुनौतियों की बड़ी वजह वे कमिटेड एक्सपेंडिचर (Committed Expenditure) हैं, जिनमें कर्मचारियों का वेतन, पेंशन और पुराने कर्ज का ब्याज शामिल है। PRS Legislative Research की रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु अपने राजस्व का 62% हिस्सा सिर्फ इन वादों पर खर्च करता है। इससे स्वास्थ्य, शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे विकास कार्यों के लिए कम पैसा बचता है।
इसी बीच विजय सरकार की मुफ्त योजनाओं को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। 2025-26 के बजट में तमिलनाडु ने सब्सिडी पर 72,434 करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य रखा था, जो राज्य के कुल खर्च का लगभग 15% है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, TVK के चुनावी वादों जैसे महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये, मुफ्त LPG सिलेंडर और बेरोजगार युवाओं को भत्ता को पूरा करने में सरकार का सालाना कल्याणकारी खर्च करीब 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तमिलनाडु के लिए वित्तीय अनुशासन बनाए रखना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि राज्य तेजी से एजिंग स्टेट की श्रेणी में पहुंच रहा है। RBI के अनुसार, 2026 तक तमिलनाडु की 15% से ज्यादा आबादी 60 साल से ऊपर की हो जाएगी, जिससे पेंशन और सामाजिक कल्याण पर खर्च का दबाव और बढ़ सकता है।