
हॉर्मुज स्ट्रेट में विदेशी टैंकर पर अमेरिकी हमले के बाद 3 भारतीयों की जान चली गई है। इस भारत सरकार ने सख्त एक्शन लिया है।
ओमान के तट के पास कमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों को लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी चार्ज डी’अफेयर्स जेसन मीक्स (अमेरिकी राजनयिक) को बुलाकर सख्ती से अपना गुस्सा जताया है। यह दूसरी बार है जब विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे पर अमेरिकी दूतावास को तलब किया है।
'MT Settebello' नाम के टैंकर पर हुए हमले में 24 भारतीय क्रू मेंबर्स सवार थे। शुरू में तीन लोग लापता बताए गए, लेकिन अब पुष्टि हो गई है कि वे मारे गए हैं।
बाकी 21 को ओमान की मदद से सुरक्षित निकाल लिया गया। इन नाविकों की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। कई परिवार अब अपने बेटों के शव का इंतजार कर रहे हैं। शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने भी इस पर दुख जताया है।
विदेश मंत्रालय में अमेरिका डेस्क के एडिशनल सेक्रेटरी नागराज नायडू ने जेसन मीक्स को बुलाया। मीक्स फिलहाल अमेरिका के एंबेसडर की गैरमौजूदगी में सबसे सीनियर अधिकारी हैं।
भारत ने साफ कहा कि कमर्शियल जहाजों पर ऐसे हमले बर्दाश्त नहीं किए जा सकते। उधर, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हमले की निंदा करते हुए कहा कि नागरिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। भारत ने इलाके में तनाव कम करने और समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखने की अपील भी की है।
कल ही एक और कमर्शियल जहाज एमटी जालवीर पर भी हमला हुआ जिसमें 20 भारतीय क्रू सवार थे। राहत की बात यह है कि उसमें किसी की जान नहीं गई और सबको सुरक्षित निकाला गया।
कुछ दिनों में यह तीसरा या चौथा ऐसा हमला बताया जा रहा है। अमेरिका इन हमलों को ईरान से जुड़े जहाजों पर ब्लॉकेड लागू करने का हिस्सा बता रहा है, लेकिन भारत का कहना है कि इससे निर्दोष नाविकों की जान जा रही है।
भारत के हजारों नाविक दुनिया भर के जहाजों पर काम करते हैं। खासकर खाड़ी इलाके में। ऐसे में समुद्री सुरक्षा इस वक्त भारत के लिए बड़ी चिंता है। सरकार ने ओमान के साथ मिलकर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और अब डिप्लोमैटिक स्तर पर भी दबाव बना रही है।
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि यह मामला सिर्फ एक घटना नहीं बल्कि बड़े क्षेत्रीय तनाव का नतीजा है। ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते विवाद का असर आम नाविकों और देशों पर पड़ रहा है।