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Abhishek Banerjee: 11 घंटे की लंबी पूछताछ के बाद ED दफ्तर से निकले अभिषेक बनर्जी, बोले- ‘जांच एजेंसी को पूरा सहयोग दे रहा हूं’

TMC सांसद अभिषेक बनर्जी से ED ने कथित शिक्षक भर्ती घोटाले मामले में करीब 11 घंटे पूछताछ की। पूछताछ के बाद उन्होंने जांच एजेंसी को पूरा सहयोग देने की बात कही। जानिए क्या बोले अभिषेक बनर्जी और क्या है पश्चिम बंगाल का चर्चित शिक्षक भर्ती घोटाला।

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Jun 15, 2026
abhishek banerjee ed
TMC Crisis: अभिषेक बनर्जी(फोटो-ANI)

Abhishek Banerjee ED Enquiry: Abhishek Banerjee ED Enquiry: टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी सोमवार को ED के दफ्तर पहुंचे थे। जहां उनसे करीब 11 घंटे पूछताछ की गई। जिसके बाद देर रात अभिषेक बनेर्जी दफ्तर से बाहर निकले और मीडिया से बात की। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वो जांच एजेंसी को पूरा सहयोग दे रहे हैं। आपको बता दें कि अभिषेक बनर्जी से कथित टीचर भर्ती घोटाले से जुड़े मामले में पूछताछ की गई।

अभिषेक बनर्जी ने क्या कहा?


ED के दफतर से बाहर निकलने पर अभिषेक बनर्जी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि कल मुझसे 8 से 8.30 घंटे और आज 11 घंटे पूछताछ की गई। यह 2023 का मामला है और मैं 10-12 बार एजेंसी के सामने पेश हो चुका हूं। मैं यह नहीं कहूँगा कि इस पर कोई राजनीतिक दबाव है या नहीं। भारतीय जनता पार्टी के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि बीजेपी के बारे में जितना कम कहा जाए, उतना ही अच्छा है। एक तरफ, वे हमारी पार्टी को तोड़ते हैं और चुनाव के बाद हिंसा करते हैं। अंत में उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर आप मेरा गला भी काट दें, तब भी मैं झुकूंगा नहीं। अगर एजेंसी मुझे भविष्य में भी बुलाएगी, तो मैं पेश होऊंगा। पूरी तरह से मैं जांच एजेंसी का सहयोग कर रहा हूं।

क्या है शिक्षक भर्ती घोटाला?


पश्चिम बंगाल के चर्चित प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले में ईडी कथित मनी लॉन्ड्रिंग, वित्तीय लेन-देन और भर्ती प्रक्रिया में सामने आई अनियमितताओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जांच कर रही है। यह मामला पश्चिम बंगाल में प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा है। आरोप है कि भर्ती के दौरान निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया और कई ऐसे अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी गई, जो पात्रता मानकों पर खरे नहीं उतरते थे, कम अंक प्राप्त करने वाले थे या जिनका नाम मेरिट लिस्ट में शामिल ही नहीं था। जांच एजेंसियों के अनुसार, नौकरी दिलाने के नाम पर कथित तौर पर एक संगठित नेटवर्क सक्रिय था, जिसके माध्यम से धन लेकर नियुक्तियां कराई गईं। आरोप है कि इस प्रक्रिया में योग्य उम्मीदवारों की अनदेखी कर पैसे देने वालों को लाभ पहुंचाया गया।

ED ने वर्ष 2022 में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत इस मामले की जांच शुरू की थी। एजेंसी की कार्रवाई की शुरुआत केंद्रीय जांच ब्यूरो की उस एफआईआर से हुई, जो उसी साल कोलकाता हाई कोर्ट के निर्देश पर दर्ज की गई थी। CBI और ED दोनों इस बात की जांच कर रही हैं कि कथित भर्ती घोटाले से अर्जित धन का इस्तेमाल कहां और कैसे किया गया, यह किन-किन लोगों तक पहुंचा और उसे छिपाने या अन्य माध्यमों में निवेश करने के लिए क्या कदम उठाए गए।

Updated on:
15 Jun 2026 11:11 pm
Published on:
15 Jun 2026 10:47 pm
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