
TMC Crisis: TMC की बागी सांसद काकोली घोष ने कहा कि वह किसी भी राजनीतिक दबाव के आगे नहीं झुकेंगी। उन्होंने बताया कि 20 सांसदों के ग्रुप ने लोकसभा स्पीकर से सदन में अलग बैठने की व्यवस्था करने की आधिकारिक मांग की है।
न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में काकोली घोष ने कहा कि वह पिछले 40 वर्षों से राजनीति में सक्रिय हैं और हमेशा पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए लड़ती रही हैं। उन्होंने साफ कहा कि उनका सिर कट सकता है, लेकिन वह झुकेंगी नहीं।
काकोली घोष ने TMC छोड़ने के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि राज्य में बढ़ते कुशासन, अराजकता और बेरोजगारी ने उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया। वह 2011 में ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री बनने के बाद राजनीति में नहीं आई थीं, बल्कि चार दशकों से जनता के लिए संघर्ष कर रही हैं। उन्होंने अपने ऊपर लग रहे अवसरवाद (मौकापरस्ती) के आरोपों को भी खारिज किया और कहा कि आलोचनाओं का उन पर कोई असर नहीं पड़ता।
बातचीत के दौरान सांसद काकोली घोष ने आगे कहा है कि उनकी प्राथमिकता राजनीति नहीं, बल्कि देश और पश्चिम बंगाल का विकास है। उनका ग्रुप राज्य के विकास, देश के हित और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए काम करना चाहता है। इसी उद्देश्य से 20 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर से सदन में अलग बैठने की व्यवस्था करने की मांग की है।
काकोली घोष ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ वर्षों से अराजकता, कुशासन और बेरोजगारी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि राज्य की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है, इसलिए उन्होंने अलग रास्ता अपनाने का फैसला किया।
उन्होंने यह भी दावा किया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी या पार्टी नेतृत्व की ओर से उनसे बातचीत करने की कोई कोशिश नहीं की गई। काकोली ने बताया कि चुनाव में खराब प्रदर्शन की जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने जिला चेयरपर्सन पद से इस्तीफा दिया था, लेकिन इसके बाद पार्टी के किसी नेता ने उनसे संपर्क तक नहीं किया।
करीब 40 साल से ममता बनर्जी के साथ राजनीति कर रहीं काकोली घोष ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें ऐसा दिन भी देखना पड़ेगा। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि जिस पार्टी के लिए उन्होंने दशकों तक काम किया, वहीं अब उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने साफ किया कि उनका फैसला किसी पद या सत्ता के लिए नहीं, बल्कि राज्य और देश के हित में है।