
TMC Crisis: पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस समय बूरे दौर से गुजर रही है। चुनावों में हार के बाद पार्टी में बड़ी टूट देखने को मिली और ममता बनर्जी को अपने ही लोगों से बगावत का सामना करना पड़ा। इसी बीच आज ममता को एक और बड़ा झटका तब लगा जब उनकी करीबी और पार्टी की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। सुष्मिता लंबे समय तक टीएमसी का बड़ा चेहरा रही है और उनका अचानक पार्टी छोड़ देना ममता के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। पार्टी से इस्तीफे के बाद अब सुष्मिता की इस मामले पर पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। मीडिया से बातचीत करते हुए सुष्मिता ने कहा कि मैं आज आजाद हूं।
सुष्मिता देव ने दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए इस्तीफे पर अपनी पहली प्रतिक्रिया दी। टीएमसी में चल रही बगावत के चलते क्या पार्टी से जुड़े और भी बड़े नाम भविष्य में इस्तीफा दे सकते है, इस सवाल के जवाब में सुष्मिता ने कहा कि मुझे नहीं पता है कि कौन क्या कर रहा है। कौन पार्टी छोड़ रहा है और कौन नहीं यह वही लोग बता सकते है। मैं क्यों इस बात पर कमेंट करूं। मैंने आज सुबह अपना इस्तीफा उप राष्ट्रपति को दे दिया है। उन्होंने आगे कहा कि यह मेरा अधिकार है कि मैं कैसी राजनीति करना चाहती हूं और कहा करना चाहती हूं या फिर मैं राजनीति में रहुंगी या नहीं। मुझे यह सब तय करने के लिए कुछ दिन का समय चाहिए है।
सुष्मिता ने आगे कहा कि मैं बंगाल की राजनीति से सीधे तौर पर जुड़ी हुई नहीं हूं, मैं असम से हूं। आज के दिन मैं मुक्त हूं, आजाद हूं, मैं फ्री वुमन हूं। असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा से मुलाकात करने के सवाल पर सुष्मिता ने कहा कि उनके साथ मेरा बहुत पुराना रिश्ता है, हमने कांग्रेस में भी एक साथ काम किया है। वह केवल एक सामान्य मुलाकात थी। टीएमसी में आगे चलकर क्या होने वाला है इस सवाल पर सुष्मिता ने कहा कि मुझे दो तीन दिन इन चीजों से बाहर रहने दो। पार्टी छोड़ने का कारण पूछे जाने पर सुष्मिता ने कहा कि मैंने कुछ निजी और राजनीतिक कारणों से टीएमसी से इस्तीफा दिया है। हमारे देश में हर व्यक्ति को अपने विचार बदलने का अधिकार है। इससे ज्यादा मैं अभी कुछ नहीं बोलना चाहुंगी।
सुष्मिता देव का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब ममता बनर्जी की पार्टी लगातार अंदरूनी संकट से गुजर रही है। इससे पहले टीएमसी के वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रे ने भी राज्यसभा सदस्यता छोड़ते हुए पार्टी में बेलगाम भ्रष्टाचार और अराजक शासन का आरोप लगाया था। सुखेंदु संसद में टीएमसी के सबसे पहचान वाले चेहरों में शामिल थे। उन्होंने दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बैठक से कुछ घंटे पहले इस्तीफा देकर पार्टी नेतृत्व को बड़ा झटका दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगातार हो रहे इस्तीफे टीएमसी के भीतर बढ़ती असंतुष्टि को दिखाते हैं।
बता दें कि सुष्मिता देव पहले अखिल भारतीय महिला कांग्रेस (AIMC) की अध्यक्ष रह चुकी हैं। 2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार राजदीप रॉय से हार के बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी थी। इसके बाद 2021 में वह तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुईं और जल्द ही पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता बन गई। अब उनके इस्तीफे ने टीएमसी के सामने नया राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी लगातार पार्टी को एकजुट रखने की चुनौती का सामना कर रही हैं। कई सांसद और विधायक खुले तौर पर असंतोष जता चुके हैं, जिससे पार्टी की आंतरिक स्थिति कमजोर होती दिखाई दे रही है।