
Trams revive in Kolkata: कोलकाता की सड़कों की जान ट्राम की फिर से वापसी हो सकती है। शुभेन्दु सरकार ने ट्राम को वापस लाने के लिए सर्वे का आदेश दिया है। पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री अर्जुन सिंह ने ऐलान किया कि शुभेन्दु सरकार पर्यावरण-अनुकूल सिस्टम को फिर से चालू करना चाहती है। उन्होंने कहा कि हम ट्राम को वापस लाना चाहते हैं। RITES को सर्वे पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
कोलकाता में ट्राम को अभी सिर्फ दो रूट पर चलाया जा रहा है। एक गारिया हाट से एस्प्लेनेड और दूसरा श्यामबाजार से एस्प्लेनाड। वामपंथी सरकार के दौर में ट्राम के 40 रूट थे, लेकिन ममता बनर्जी की सरकार में ज्यादा रूटों को बंद कर दिया गया था। अब भाजपा की सरकार फिर से ट्राम सर्विस को जिंदा करने में जुटी हुई है। सरकार का कहना है कि पहले पुरानी पटरियों को दुरुस्त किया जाएगा और फिर आधुनिक ट्राम गाड़ियां लाएगी। सरकार ने कहा कि इसका मकसद रोजाना सफर के साथ-साथ पर्यटन को बढ़ावा देना भी है।
दरअसल, कोलकाता की सड़कें समय के साथ-साथ गाड़ियों की वजह से भरने लगीं। मेट्रो, बस और दूसरे वाहनों ने ट्राम की अहमियत कम कर दी। सरकार को ट्राम का रखरखाव महंगा पड़ने लगा। ट्राम की वजह से ट्रांसपोर्ट विभाग का घाटा बढ़ने लगा। इसके बाद तृणमूल सरकार ने ज्यादातर रूट बंद कर दिए। दो रूट अब विरासत के प्रतीक के रूप में बचे हैं। अब अधिकारियों ने कहा कि इसे नए रूप में फिर से सड़कों पर लाया जाएगा।
कोलकाता में ट्राम सर्विस की शुरुआत ब्रिटिश काल में 1873 में शुरु हुई। 1880 में मीटर गेज पटरी बिछाई गई। 1900 में बिजली वाली ट्राम सर्विस शुरू हुई। एक जमाने में 450 ट्राम चलती थीं। दोनों शहरों (कोलकाता और हावड़ा) में 68 किलोमीटर पटरी बिछी हुई थी। स्वतंत्रता के बाद 1952 में राज्य सरकार ने इसे अपने हाथ में लेने का कानून बनाया। 1967 में ब्रिटिश मैनेजमेंट पूरी तरह चला गया। सत्यजीत रे और मृणाल सेन ने अपनी कई फिल्मों में कोलकाता की पहचान ट्राम को दिखाया।