
US Iran peace deal: अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हो गया है। दोनों देशों ने शांति समझौते पर डिजिटल हस्ताक्षर किए हैं। डील पर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान का बयान भी आया है। पेजेशकियान ने कहा कि अगर समझौते की सभी शर्तें पूरी तरह लागू होती हैं, तो यह ईरान के लिए गर्व का दस्तावेज बन सकता है। उन्होंने कहा कि अंतिम समझौता अभी आकार लेना बाकी है। लेकिन ईरान हर परिस्थिति के लिए तैयार है।
शांति समझौते को लेकर उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते में उन्हें कोई आर्थिक राहत नहीं दी गई है। सीएनएन से बातचीत में वेंस ने कहा कि अमेरिका या हमारे खाड़ी क्षेत्र के किसी सहयोगी ने ईरान को न तो प्रतिबंधों में राहत दी है और न ही उसकी कोई जमी हुई संपत्ति जारी की है। इस बारे में कुछ गलत रिपोर्टिंग हुई है। मुझे नहीं पता ये खबरें कहां से आ रही हैं।
तीन महीने से ज्यादा चले तनाव के बाद आखिरकार शांति की उम्मीद जगी है। शांति समझौता औपचारिक रूप से शुक्रवार को जेनेवा में होगा। इस डील से ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी ब्लॉकेड हटाए जाएंगे। होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुल जाएगा। यह खबर भारत के लिए राहत भरी है, क्योंकि भारत की ऊर्जा आपूर्ति का अधिकांश हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। जंग शुरू होने के बाद भारत में एलपीजी संकट गहरा गया था। भारत को ऊर्जा आपूर्ति के लिए दूसरे देशों की ओर रुख करना पड़ा था।
शांति समझौते की खबर पर मुहर लगते ही भारतीय प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर खुशी जताई थी। उन्होंने पश्चिम एशिया में स्थिरता और निर्बाध व्यापार पर जोर दिया। वहीं, शांति समझौते के ऐलान के बाद शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के कंसोर्टियम वाली टैंकर दिशा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से निकलकर भारत के लिए रवाना हुई। इस शिप कतर से 62,370 टन LNG भारत ला रही है। वहीं, फारस की खाड़ी में फंसे भारत और दूसरे देशों के झंडे वाले 34 और जहाजों के भारतीय बंदरगाहों तक सुरक्षित और तेजी से पहुंचने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अभी हालात सामान्य होने में कुछ हफ्ते लग सकते हैं।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि अगर यह शांति टिकी रही तो व्यापार से जुड़ी कई समस्याएं आसानी से हल हो जाएंगी।ईरान के साथ भारत का पुराना रिश्ता है। 2019 में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत को ईरानी तेल खरीदना बंद करना पड़ा था। अब अगर लंबे समय का समझौता होता है और प्रतिबंध हटते हैं तो भारत फिर से ईरान से तेल खरीद सकता है। साथ ही चाबहार बंदरगाह का विकास भी तेज हो सकेगा, जो इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।