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अब बंगाल में शराब व्यापारियों ने पूर्व सीएम ममता बनर्जी को फंसाया, अवैध तरीके से 300 करोड़ वसूलने का आरोप

WB liquor retailers allegation: पश्चिम बंगाल के शराब रिटेलर्स ने बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है- 2022 से 2025 के बीच 300 करोड़ रुपये अनधिकृत ट्रांसपोर्ट चार्ज के नाम पर वसूले गए।

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Jun 14, 2026
Mamata Banerjee News
पश्चिम बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी। (फोटो- ANI)

पश्चिम बंगाल में अब शराब व्यापारियों ने पूर्व सीएम ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाया है। हजारों शराब रिटेलर्स ने पिछली सरकार पर तीखा हमला बोला है।

उन्होंने आरोप लगाया है कि 2021 से 2025 तक उनसे करीब 300 करोड़ रुपये अनधिकृत ट्रांसपोर्ट और हैंडलिंग चार्ज के नाम पर वसूले गए। जबकि राज्य की नीति के मुताबिक ये खर्च डिस्ट्रीब्यूटर्स को उठाना चाहिए था।

व्यापारियों का कहना है कि ये पैसा कैश में लिया गया और कोई रसीद भी नहीं दी गई। अब उन्होंने एक्साइज विभाग से तुरंत जांच कराने और इस प्रथा को बंद करने की मांग की है।

क्या थी नीति?

2017 में तत्कालीन ममता सरकार ने शराब नीति में बड़ा बदलाव किया था। वेस्ट बंगाल स्टेट बेवरेजेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बेवको) को बनाया गया ताकि शराब की सप्लाई का पूरा सिस्टम राज्य के नियंत्रण में आ जाए। 2021 में और बदलाव हुए। डिस्ट्रीब्यूटर्स की नई व्यवस्था शुरू की गई।

व्यापारियों का आरोप है कि इसी बदलाव के बाद डिस्ट्रीब्यूटर्स ने अपनी ताकत का फायदा उठाते हुए रिटेलर्स पर 10 से 13 रुपये प्रति क्रेट का अतिरिक्त चार्ज थोप दिया। लोडिंग-अनलोडिंग के नाम पर भी 3 रुपये प्रति क्रेट अलग से वसूला गया।

किसने लगाया आरोप?

एक प्रमुख संगठन सोसाइटी फॉर द वेलफेयर ऑफ वेस्ट बंगाल फॉरेन लिकर लाइसेंसेज के सेक्रेटरी बिजॉन कुमार पात्रा ने एक्साइज कमिश्नर को चिट्ठी लिखकर ये सब बताया है।

उन्होंने कहा कि जब भी हमने शिकायत की, अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। सप्लाई रोकने की धमकी दी जाती थी, इसलिए मजबूरन पैसा देना पड़ता था।

व्यापारियों पर कितना बोझ

राज्य में करीब 6000 शराब की दुकानें हैं। इस संगठन के पास 700 दुकानदार सदस्य हैं। पात्रा के मुताबिक सिर्फ इन सदस्यों की अनुमानित क्षति ही सैकड़ों करोड़ में पहुंच रही है। पूरे राज्य का आंकड़ा 300 करोड़ के करीब बताया जा रहा है।

पुरानी नीति क्या कहती है

राज्य की डिस्ट्रीब्यूटर-डिपो सप्लाई व्यवस्था में ट्रांसपोर्ट का खर्च डिस्ट्रीब्यूटर्स पर ही होता है। रिटेलर्स को सिर्फ दुकान पर माल पहुंचने के बाद की जिम्मेदारी उठानी होती है। लेकिन व्यावहारिक तौर पर सब उलटा हो गया। डिस्ट्रीब्यूटर्स ने रिटेलर्स को अपना बोझ लाद दिया।

व्यापारियों का कहना है कि ये सिलसिला 2021 से लगातार चल रहा है। कोविड के बाद की कुछ फीस और चार्ज भी अब हटाने की मांग की जा रही है, लेकिन मुख्य मुद्दा ट्रांसपोर्ट चार्ज का है।

Published on:
14 Jun 2026 04:08 pm