West Asia Crisis: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत सक्रिय है, एस जयशंकर और कतर के पीएम के बीच बातचीत में ईरान के हमलों पर चिंता जताई है और शांति के लिए संवाद पर जोर दिया है।
West Asia Crisis: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने कूटनीतिक स्तर पर सक्रियता बढ़ा दी है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी से फोन पर बातचीत कर क्षेत्रीय हालात की समीक्षा की है।
दोनों नेताओं के बीच हुई इस बातचीत में खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव और उसके वैश्विक असर पर चर्चा हुई। कतर के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा हालात का असर सिर्फ क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और स्थिरता पर भी पड़ सकता है।
बातचीत के दौरान कतर के प्रधानमंत्री ने ईरान के हमलों को 'अनुचित' बताया है और कहा कि इस तरह की कार्रवाई क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा है। उन्होंने विशेष रूप से पानी, खाद्य और ऊर्जा से जुड़े महत्वपूर्ण ढांचों को निशाना बनाए जाने पर चिंता जताई है।
भारत ने इस पूरे मुद्दे पर संतुलित रुख अपनाते हुए संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान की अपील की है। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए और विवादों का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से किया जाना चाहिए।
दोनों नेताओं ने होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में आवाजाही की सुरक्षा पर भी जोर दिया। वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए इन मार्गों का सुरक्षित रहना बेहद जरूरी माना गया।
इस बीच, जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री और यूएई के वरिष्ठ नेताओं से भी बातचीत की है। भारत लगातार क्षेत्र के प्रमुख देशों के संपर्क में रहकर हालात पर नजर बनाए हुए है और समाधान के लिए प्रयास कर रहा है।
फिलहाल, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत की सक्रिय कूटनीति यह संकेत दे रही है कि वह क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। भारत लगातार प्रमुख देशों के संपर्क में रहकर हालात पर नजर बनाए हुए है और बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर जोर दे रहा है। आने वाले दिनों में यह कूटनीतिक पहल कितनी प्रभावी होती है, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी, क्योंकि इस क्षेत्र की स्थिरता का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर भी पड़ता है।